शब-ए-बराअत में मगफिरत कर मांगी दुआएं
सहारनपुर : शब-ए-बारात के अवसर पर जहां लोगों ने खुदा की इबादत की वहीं रात्रि में कब्रिस्तानों में जाक
सहारनपुर : शब-ए-बारात के अवसर पर जहां लोगों ने खुदा की इबादत की वहीं रात्रि में कब्रिस्तानों में जाकर अपने जन्नतनशी पुरखों की कब्रों पर फतिहा पढ़ा तथा इबादत के दौरान अपनी गलतियों की माफी मांगी।
बता दें कि शब-ए-बराअत की रात की खास मान्यता है। इस रात को मगफिरत यानि कि माफी की रात भी कहा जाता है। शब एक फारसी शब्द है, जिस का अर्थ रात है और बारात अरबी शब्द है जिस का अर्थ निजात यानी छुटकारा है। सहारनपुर इमाम कारी इसहाक गोरा के मुताबिक इस रात को अल्लाह तआला अनगिनत लोगों को जहन्नुम से निजात अता करते हैं। लोग कब्रिस्तान भी जाते हैं और अपने पूर्वजों के लिए दुआ करते हैं और फातिहा पढ़ते हैं। आज की पूरी रात लोग जाग कर इबादत करते हैं और अपने गुनाहों के लिए माफी मांगते हैं। रविवार को शब-ए-बराअत को लेकर समाज के लोगों में काफी उल्लास देखा जा रहा है। मस्जिदों को सजाया गया है। कई मस्जिदों में रंग-रोगन व साफ-सफाई का कार्य पूरा कर लिया गया है। शब-ए-बराअत की रात मुस्लिम समुदाय के लोग अपने गुनाहों से छुटकारा पाने के लिए पूरी रात कुरान पढ़ गुनाहों की माफी मांगी। जन्नतनशी लोगों के लिए रात को कब्रिस्तान पहुंचकर उनके मगफिरत के लिए फातीहा पढ़ा तथा अपने परिवार में सलामती बनाए रखने की दुआ की। कारी गोरा का कहना है कि इस रात में शरीयत के अनुसार पटाखा फोड़ना, बाइकों पर स्टंट करना गुनाह का काम है। इससे परहेज करना चाहिए। उन्होंने बताया कि करीब 1500 ई. पूर्व इस्लाम के धर्म गुरु पैगंबर हजरत मुहम्मद सल्ललाहो अलैह वस्लम के आदेश पर शब-ए-बराअत त्यौहार मनाया जाता है। यह त्यौहार सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में मुस्लिम समुदाय के लोग मनाते हैं। शब-ए-बराअत बड़ी बरकत वाली रात है। माफी मांगने पर उसके गुनाह माफ कर दिए जाते हैं। तमाम रात कब्रिस्तानों में लोगो की भीड़ रही तथा लोग इबादत में लगे रहे।
साफ सफाई की बेहतर व्यवस्था
शब-ए-बराअत के अवसर पर जहां पुलिस व्यवस्था चाक चौबंद रही तथा कई मार्गों पर वाहनों का रूट डाइवर्जन किया गया। वहीं कब्रिस्तानों में साफ सफाई व रोशनी आदि की बेहतर व्यवस्था होने के कारण अकीदतमंदों को किसी प्रकार की दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ा।
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