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    अब मेलों में भी बिकेगा रामपुरी चाकू

    By JagranEdited By:
    Updated: Tue, 03 Nov 2020 01:08 AM (IST)

    रामपुर मुस्लेमीन दुनियाभर में मशहूर रामपुरी चाकू अब मेलों में भी बिकेगा।

    अब मेलों में भी बिकेगा रामपुरी चाकू

    रामपुर, मुस्लेमीन : दुनियाभर में मशहूर रामपुरी चाकू अब मेलों में भी बिकेगा। इसके लिए दीपावली के मौके पर मेले लगाए जाएंगे। इसके बाद रामायण मेले लगेंगे, जिनमें रामपुर के पारम्पारिक उत्पादों के साथ ही चाकू की दुकानें भी सजेंगी।

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    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 11 सितंबर को वीडियो कांफ्रेसिग के जरिये विकास कार्यों की समीक्षा की थी। तब अफसरों से रामपुरी चाकू के बारे में भी बात की थी। उन्होंने कहा था कि रामपुरी चाकू की खास पहचान है। इसे बढ़ावा दिया जाए। चाकू का इस्तेमाल अपराध करने के लिए ही नहीं, बल्कि और दूसरे कामों में भी होता है। इसलिए नियमों के दायरे में रहते हुए चाकू कारोबार को बढ़ावा देने की जरूरत है। सीएम का इशारा मिलते ही अफसर रामपुरी चाकू को बढ़ावा देने के लिए योजना बनाने में जुट गए। जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह कहते हैं कि रामपुरी चाकू को प्रोमोट करने के लिए इसके कारीगरों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्हे ऋण भी उपलब्ध कराया जा रहा है। अब रामपुर के पारम्पारिक उत्पाद रामपुरी चाकू, जरदौजी, पतंग, टोपी, वायलिन को बढ़ावा देने के लिए मेले लगाए जा रहे हैं। दीपावली के मौके पर चार नवंबर से 14 नवंबर तक किला मैदान, बापू माल और ज्वालानगर में मेले लगाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि रामपुरी चाकू प्रतिबंधित नहीं है। छह इंच फाल तक का चाकू बेचा और खरीदा जा सकता है। दीपावली के बाद जिलेभर में जगह-जगह रामायण मेले लगाए जाएंगे। इनमें भी रामपुरी उत्पादों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा। रामपुर में है चाकू बाजार

    नवाबी दौर से ही रामपुर में चाकू बनते रहे हैं। यहां जामा मस्जिद के पास चाकू बाजार भी है, जहां छोटे बड़े हर साइज के चाकू मिलते हैं। यह चाकू अब खूबसूरती के साथ ही रायफल व पिस्टल के लुक में भी बनाए जा रहे हैं। हालांकि चाकू कारोबार अब पहले की तरह नहीं रहा। अब यहां चाकू के बजाय दूसरा सामान ज्यादा बिकता है। चाकू की चंद दुकानें ही रह गई हैं। पहले इस बाजार में चाकू ही बिकते थे। लेकिन, चाकू पर लगी सरकारी पाबंदियों के कारण दुकानदारों को परेशानी होने लगीं। पहले दूसरे जिले में लगने वाले मेलों में भी चाकू की दुकानें लगती थीं। जिन पर 30 साल पहले सरकार ने कई पाबंदी लगा दीं। चाकू बनाने के भी शहर में दर्जनभर से ज्यादा कारखाने थे। लेकिन, पाबंदियों के कारण कारखाने भी बंद होते गए।