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    अधूरे रह गए 16 जोड़ों के सपने: पहचान पत्र में अंतर ने रोक दी सामूहिक विवाह की खुशियां

    Updated: Sun, 30 Nov 2025 07:22 PM (IST)

    मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत रामपुर में 1045 जोड़ों का चयन हुआ, पर केवल 834 के ही फेरे हो पाए। 16 जोड़े बायोमेट्रिक पहचान की 'झाम' में फंस गए, जिससे उनकी शादी टल गई। ₹1 लाख के बजट वाली इस योजना में पहचान में अंतर आने पर जांच की मांग उठी है। समाज कल्याण विभाग ने आधार अपडेट न होने को कारण बताया।

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    सामूह‍िक व‍िवाह में बैठे जोड़े

    जागरण संवाददाता, रामपुर। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत शुक्रवार को समारोह का आयोजन हुआ था। इसके लिए आनलाइन आवेदन की विभागीय प्रक्रिया के आधार पर 1045 जोड़ों का चयन हुआ था। विवाह समाराेह के बाद 850 की शादी होने की जानकारी दी गई लेकिन वास्तव में शादी 834 जोड़ों की ही हुई। 16 जोड़े पहचान की झाम में फंस गए। इस कारण उनकी शादी लटक गई। अधिकारियों का कहना है कि दर्शाए गए तथ्यों से मिलान में कुछ अंतर पाए जाने के कारण फिलहाल उनकी विवाह नहीं कराया गया है।

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    इस बार मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में प्रति जोड़े पर एक लाख रुपये के बजट के हिसाब से व्यय किया गया। इससे पहले प्रति जोड़े पर 51 हजार रुपये का बजट व्यय किया जाता है। एक लाख रुपये के बजट में अनुदान के 60 हजार रुपये लाभार्थी कन्या के खाते में जबकि 25 हजार रुपये का उपहार स्वरुप सामान दिए जाने व 15 हजार रुपये के हिसाब से भोजन व पंड़ाल आदि की व्यवस्था पर व्यय करने के निर्देश हैं।

    28 को हुए विवाह समारोह को विभागीय प्रक्रिया के तहत 1045 जोड़ों का चयन सत्यापन के बाद किया गया था। विवाह समारोह की तिथि निर्धारित होने पर इन सभी को जिला समाज कल्याण विभाग की ओर से सूचना भी भेजी गई लेकिन सभी 1045 जोड़ों की शादी नहीं हो सकी। विभाग के द्वारा सूचना विभाग के माध्यम से 850 जोडों की ही शादी होना बताई। बाद में जोड में 834 जोडा़ें की ही शादी होना पाई गई। 16 जोड़े यहां भी शादी में वंचित पाए गए।

    घटती संख्या को लेकर इस बार सवाल खड़े हो रहे हैं कि जब सामूहिक विवाह के लिए 1045 लाभार्थियों का चयन हो गया था तब समारोह में किस वजह से नहीं पहुंच पाए। प्रत्येक जोड़े पर व्यय सरकार की ओर से 51 हजार से बढ़ाकर एक लाख रुपये कर देने से इस बार संख्या अधिक बढ़ने का अनुमान था। हालांकि विभाग के लोग इसे सामान्य बता रहे हैं। उनका कहना है कि हर आयोजन में ही चयनित जोड़ों में से कुछ अनुपस्थित हो जाते हैं। इस बार भी अनुपस्थित हो गए।

    समाज कल्याण अधिकारी सूरज कुमारी ने बताया कि इस बार बायोमीट्रिक मशीन की व्यवस्था पहचान के लिए की गई थी। कुछ जोडों में किसी एक वधू या वर का आधार अपडेट नहीं होने के कारण मशीन नहीं पकड़ सकी। इस कारण ऐसे लाभार्थी सामूहिक विवाह का हिस्सा नहीं बन सके। हालांकि सभी लाभार्थियों को इस बार पहचान के लिए बायोमीट्रिक मशीन की व्यवस्था होने से अवगत कराते हुए अपना-अपना आधारकार्ड आदि अपडेट कराने के लिए कहा गया था।

    किस क्षेत्र के कितने लाभार्थी हुए शामिल

    सामूहिक विवाह योजना का लाभ उठाने वाले 834 लाभार्थियों में सबसे अधिक 173 जोडे सैदनगर विकास खंड क्षेत्र के रहे। यह ब्लाक आकांक्षा ब्लाक की श्रेणी में आता है। शाहबाद में 137, चमरौआ 151, मिलक 163, बिलासपुर में ग्रामीण के 57, नगर पालिका क्षेत्र के सात, स्वार के 48, केमरी के चार, मसवासी के सात, टांडा के 31 , मिलक नगर पालिका क्षेत्र के 15, दढियाल के 39 व नरपतनगर के दो जोडे शामिल रहे।

    विश्व हिंदू महासंघ ने जांच कराने की मांग

    विश्व हिंदू महासंघ के जिलाध्यक्ष सरजीत चौधरी ने जिलाधिकारी को प्रेषित पत्र में विवाह समारोह को लेकर विभिन्न आरोप लगाते हुए जांच कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि अनियमिता बरती गई है। फर्जी लाभार्थी से लेकर अन्य आरोप लगाते हुए जांच कराने की मांग की गई है।

     

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