जेल के गेट से गिरफ्तार आजम खान पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, अनुच्छेद 32 के सहारे ED से जंग की तैयारी
आजम खान ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की गिरफ्तारी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 32 के तहत याचिका ...और पढ़ें
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आजम खान को गिरफ्तार करके साथ ले लाती ईडी जागरण आर्काइव
HighLights
अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका में अजीमनगर थाने में दर्ज प्राथमिकी को भी किया शामिल
2019 में दर्ज प्राथमिकी में सात वर्ष बाद ईडी की कार्रवाई पर उठाए सवाल
अनिल अवस्थी, रामपुर। मनी लांड्रिंग के मामले में गाजियाबाद जेल भेजे गए सपा नेता आजम खान के पास बचाव के रास्ते अधिक नहीं बचे हैं। उनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 32 के तहत राहत मांगी गई है। वर्ष 2019 में दर्ज मामले में सात वर्ष बाद बिना किसी नोटिस के कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में अजीम नगर थाने में दर्ज प्राथमिकी को भी शामिल किया गया है।
उधर, मनी लांड्रिंग के अब तक दर्ज मामलों में गिरफ्तार आरोपितों को जमानत मिलने में लगभग साल भर का समय लगा है। ऐसे में इस मामले में ईडी से निपटना आजम खान के लिए बड़ी चुनौती है।
अब्दुल्ला के दो जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के मामले में सजा मिलने के बाद आजम खान को सुप्रीम कोर्ट ने 20 मई 2022 को अंतरिम जमानत दे दी थी। तब आजम खान अनुच्छेद 142 का सहारा लिया था।

यह अनुच्छेद सर्वोच्च न्यायालय को पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने की शक्ति प्रदान करता है। आजम खान के अधिवक्ता काशिफ कामरान खां कहते हैं कि इस बार सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 32 के तहत राहत मांगी गई है।
इस अनुच्छेद के तहत मौलिक अधिकार का हनन होने पर पीड़ित बिना किसी निचली अदालत में जाए सीधे सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर सकता है।
कहा कि ईडी ने अगर वर्ष 2019 में मनी लांड्रिंग का केस दर्ज किया था तो सात वर्ष तक एक भी नोटिस क्यों नहीं दिया। जेल से रिहाई के तत्काल बाद अचानक गिरफ्तार और अजीम नगर थाने में अब प्राथमिकी दर्ज कराना मौलिक अधिकारों के हनन के दायरे में ही आता है।
कहा कि इसलिए उम्मीद है कि आजम खान को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलेगी। वहीं अब तक ईडी द्वारा मनी लांड्रिंग के मामलों में की गई गिरफ्तारी के मामलों में आरोपितों को जमानत हासिल करने में छह महीने से कम वक्त नहीं लगा। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आप नेता संजय सिंह भी इसके उदाहरण हैं।
विशेष बात यह है कि मनी लांन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के मामलों के लिए बनी विशेष अदालतों ने इससे जुड़े 59 मामलों में जो फैसले सुनाए हैं उनमें 56 मामलों में 124 आरोपितों को दोषी ठहराया जा चुका है।
ये आंकड़े आजम खान की फिलहाल मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। अधिवक्ता काशिफ कहते हैं कि हर मामले की परिस्थितियां अलग होती है, अलग फैसले ही नजीर बनते हैं।
ये था पूरा मामला
दो पैन कार्ड मामले में लगभग साल भर से जेल में बंद आजम खान 31 अक्टूबर को जेल से रिहा हुए। मनी लांड्रिंग के आरोप में ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने उन्हें जेल के गेट पर ही गिरफ्तार कर लिया था।
फिलहाल वह इस मामले में गाजियाबाद के डासना जेल में हैं। जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण में सरकारी धन का दुरुपयोग करने के मामले में जांच कर रही ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने आजम खान और उनके जौहर ट्रस्ट समेत पांच फर्मों के खिलाफ अजीम नगर थाने में प्राथमिकी भी दर्ज कराई है।
आरोप है कि विश्वविद्यालय निर्माण पर खर्च हुए कुल बजट 494.46 करोड़ में 416.14 करोड़ रुपये का जौहर ट्रस्ट हिसाब नहीं दे पाया। इसे ब्लैक मनी माना जा रहा है।
साथ ही निर्माण कार्य पर आजम खान ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर 85.81 करोड़ रुपये खर्च कर दिए। इस प्रकरण में ही ईडी ने आजम खान को गिरफ्तार किया है।
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