आधुनिक रेल डिब्बा कारखाना में चोरी की घटनाएं बढ़ती जा रहीं, 25 से ज्यादा घरों में सेंध, सुरक्षाकर्मी नाकाम
रायबरेली के आधुनिक रेलडिब्बा कारखाने में चोरियों की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। कर्मचारियों के अनुसार कारखाने में पहले भी छोटी-मोटी चोरियां होती रही हैं लेकिन 29 नवंबर 2021 को बड़ी चोरी हुई थी जिसमें सात घरों के ताले टूटे थे। पुलिस ने कई बार चोरियों का खुलासा किया लेकिन चोर फिर भी घटनाओं को अंजाम देते रहे। कर्मचारियों का कहना है कि चोरों का एक ही गिरोह सक्रिय है।

जागरण संवाददाता, रायबरेली। विश्वस्तरीय कहे जाने वाले आधुनिक रेलडिब्बा कारखाना में आए दिन कारखाने की चाक चौबंद व्यवस्था को लेकर बाते कहीं जाती हैं, लेकिन यहां हो रही चोरियों पर लगाम नही लग पा रही है। अब तो यहां के कर्मचारी किसी दूसरे कारखाने में स्थानांतरण कर दिए जाने की बात कहने लगे हैं।
बता दें कि कारखाने में वैसे तो छोटी छोटी चोरियों कारखाना निर्माण के दौरान होती रही हैं, लेकिन पहली बड़ी चोरी 29 नवंबर 2021 को हुई थी जिसमें एक साथ सात घरो के ताले टूटे थे। इसके बाद 21 अगस्त 2024 को 15 आवासो व उसी माह 10 आवासों में चोरी की घटनाओं को चोरों ने अंजाम दिया था।
बीती 29 अप्रैल को भी चोरो ने तीन बंद घरो से कीमती सामाना गायब कर दिया था। सबसे बड़ी बात यह है कि चोरी की हर घटना का पैटर्न एक समान था। हर बार चोरों ने बंद आवासों को ही अपना निशाना बनाया है। हर बार कमरों में लगे कुुंडे तोड़ कर चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया गया। पुलिस ने भी अपनी वाहवाही में हर बार चोरियों का खुलाशा किया, लेकिन चोरों ने कुछ दिन बाद ही चोरी की घटनाओं को अंजाम देकर यह बता दिया कि पुलिस की कहानी आखिर कितनी सच्ची है।
कर्मचारी नेता आदर्श सिंह बघेल, रोहित मिश्रा, मनोज यादव आदि का कहना है कि यदि पुलिस ने सही सही चोरियों का राजफाश किया होता तो कारखाने में चोरी की घटनाओं पर अंकुश लग गया होता। चोरियों के हर बार के एक ही पैटर्न को देखकर स्पष्ट है कि चोरों का एक ही गिरोह सक्रिय है।
कारखाने के गेट से लेकर अंदर तक आरपीएफ व भूतपूर्व सैनिकों की सक्रियता के बाद भी चोरी करके आसानी से गायब हो जाने से यह भी शंका जतायी जा रही है कि कहीं चोर कारखाने के अंदर ही तो नही रह रहे हैं।इतनी सुरक्षा के बीच बाहर से आकर रेकी करना कठिन काम है।भले ही चोर बाहर के हों लेकिन बिना कारखानो के अंदर के किसी व्यक्ति की मदद के चोरी करना व आसानी से गायब हो जाना संभव नही है।
चर्चा यह भी है कि कारखाने में कुछ लोगो ने अपने आवास बाहरी लोगों को रहने के लिए दे रखे हैं।ऐसे में उन पर भी चोरी में शामिल होने से इंकार नही किया जा सकता। नौ महीने पहले आवासीय परिसर में हुई लगभग 25 घरो में चोरी के बाद कारखाना प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था सख्त करने के बड़े-बड़े दावे किए थे। चोरियों के बाद एल्युमिनियम के कुंडे हटाकर दरवाजो में स्टील के कुंडे लगाए गए थे।
वहीं आगे लगे जालीदार दरवाजो को हटवाकर लोहे के दरवाजे लगाने का काम जारी है। आवासीय परिसर की चहारदीवारी को भी ऊंचा कराते हुए उसमें कटीले तारों की बेरीकेटिंग कराई गई थी। इसके बावजूद चोरों ने फिर से चोरी की घटनाओं को अंजाम देकर सारी व्यवस्थाओं को अंगूठा दिखा दिया है। आरेडिका कर्मचारियों ने कहा कि यदि इस बार पुलिस ने घटनाओं का सही खुलासा न किया तो वह सब आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
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