रायबरेली : वीआइपी जिले के रेलवे स्टेशन में सिग्नल की आधुनिक प्रणाली को लागू करने का काम शुरू हो गया है। आसपास के छोटे स्टेशनों तक में लखनऊ जैसे सेंट्रल स्टेशन के जैसे कलर लाइट सिग्नल पर ट्रेनें चलाने का इंतजाम था। मगर, रायबरेली में कई दशकों से वही पुरानी सिग्नल वाली व्यवस्था चली आ रही थी। इस नई सिग्नल प्रणाली के धरातल पर आने के बाद विद्युतीकृत लाइन के ट्रॉयल का रास्ता भी साफ हो जाएगा।

पहले से निर्धारित कार्ययोजना के तहत दो चरणों में ब्लॉक लिया गया। वैसे तो रेल विकास निगम लिमिटेड और रेलवे के कर्मचारी, श्रमिक सुबह से लेकर देर रात तक छिटपुट काम निपटाते रहे। लेकिन, ट्रैक और ट्रेनों के संचालन को प्रभावित करने वाले कार्य इस ब्लॉक के दौरान ही हुए। भारी भरकम टीम ने पूर्वी और पश्चिमी दोनों केबिन के पुराने इलेक्ट्रिक प्वाइंट डिडेक्टर बदले। ट्रैक सर्किट की टेस्टिग हुई। एक केबिन के बेसमेंट में लगे सर्किट ब्रेकर की वायरिग की हुई। इसके अलावा अन्य कार्य भी हुए। उत्तर रेलवे के नई दिल्ली मुख्यालय से आए मुख्य परिचालन प्रबंधक (सामान्य) अब्दुल करीब शम्सी, उप मुख्य परिचालन प्रबंधक हरीश समेत अन्य अफसरों ने चल रहे कार्यों का जायजा लिया। आरवीएनएल के प्रबंधक जेएन मिश्र ने बताया कि कार्य शुरू हो गया है। इसे समय पर खत्म करने की कोशिश की जाएगी। जिन्हें नहीं पता था वह दौड़ते रहे

रायबरेली रेलवे स्टेशन पर चल रहे नॉन इंटरलाकिग कार्य के चलते रेलवे के करीब दो दर्जन ट्रेनें रद्द कर दी हैं। यह ट्रेनें 19 मार्च तक नहीं चलेंगी। जिन यात्रियों को जानकारी थी, उन्होंने तो यात्रा के लिए दूसरे साधन का सहारा ले लिया। लेकिन, जो इससे अनजान थे, वे पूछताछ काउंटर पर खड़े दिखे। काउंटर पर जब ट्रेनों के कैंसल होने का पता चला तो मायूस होकर लौट गए।

Posted By: Jagran

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