Dragon Fruit: थाईलैंड और वियतनाम के ड्रैगन फ्रूट की रायबरेली में होगी पैदावार, किसान ने तैयार की बागवानी
इसकी खेती करने में पानी की भी बहुत अधिक जरूरत नहीं पड़ती और रोग भी नहीं लगता है। एक बार पौधा लगाने के बाद डेढ़ वर्ष में पैदावार शुरू हो जाती है। पौधा तैयार होने के बाद 20-25 वर्ष तक फल होते हैं। शुरूआत में एक पिलर के सहारे लगे पौधे से पांच से सात किलो की पैदावार होती है फिर 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होने लगती है।

जागरण संवाददाता, रायबरेली: कई किसान हैं जो मिट्टी और वातारण के अनुसार खेती करके आमदनी बढ़ा रहे हैं। इन्हीं में से एक हैं ऊंचाहार के बरसवां मजरे कंदरावा के किसान रामगोपाल सिंह चंदेल। उन्होंने बलुई-दोमट मिट्टी में अधिक पैदावार होने वाले थाईलैंड और वियतनाम के ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की।
वैसे ड्रैगन फ्रूट के दो चार पौधे तो कई किसानों ने लगा रखे हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर इसकी खेती प्रगतिशील किसान रामगोपाल ने शुरू की है। उन्होंने बाराबंकी और मिर्जापुर में इस फल की खेती करने वाले किसानों से मिलकर पहले फसल देखी और पैदावार के तरीके सीखे।
मिर्जापुर से एक हजार पौधे लाकर मार्च में आधा एकड़ में बागवानी शुरू की। एक पिलर के सहारे उन्होंने ड्रैगन फ्रूट के चार पौधे लगाए हैं।
पानी की जरूरत भी ज्यादा नहीं
किसान रामगोपाल सिंह ने बताया कि इसकी खेती करने में पानी की भी बहुत अधिक जरूरत नहीं पड़ती और रोग भी नहीं लगता है। एक बार पौधा लगाने के बाद डेढ़ वर्ष में पैदावार शुरू हो जाती है।
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पौधा तैयार होने के बाद 20-25 वर्ष तक फल होते हैं। शुरूआत में एक पिलर के सहारे लगे पौधे से पांच से सात किलो की पैदावार होती है, फिर 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होने लगती है। कम लागत में अधिक पैदावार पोषक तत्व की अधिकता के कारण लखनऊ, प्रयागराज, कानपुर में अच्छे दाम पर आसानी से बिक्री हो जाती है।
इसकी खेती से प्रत्येक वर्ष चार से पांच लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से आमदनी होती है। ड्रैगन फ्रूट की खेती देखने के लिए कई गांवों के किसान पहुंच रहे और खेती करने के तौर तरीके भी समझ रहे हैं।
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