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    UP News: आंगनबाड़ी केंद्रों पर करोड़ों खर्च कर रही सरकार, फिर भी घट रही बच्चों की संख्या

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 05:52 PM (IST)

    रायबरेली में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की संख्या घट रही है जबकि सरकार बजट बढ़ा रही है। जिले में हजारों आंगनबाड़ी केंद्र हैं लेकिन नौनिहाल कम आ रहे हैं। सरकार की योजनाओं के बावजूद विभाग बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने में विफल है। अधिकारी प्राइवेट स्कूलों में नामांकन को इसका कारण बता रहे हैं।

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    आंगनबाड़ी केंद्रों पर करोड़ों खर्च, फिर भी घट रही बच्चों की संख्या

    जागरण संवाददाता, रायबरेली। जिला बाल पुष्टाहार विभाग के अंतर्गत लगभग 2,833 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, जिनमें लगभग एक लाख, सात हजार, छह सौ 37 बच्चे पंजीकृत है। लगभग 2683 आंगनबाड़ी कार्यकत्री हैं। फिर भी नौनिहालों की संख्या बढ़ने के बजाय कम हो रही है, जबकि शासन लगातार बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग का बजट बढ़ा रहा है। साथ ही प्रति बच्चे पर शासन हजारों रुपये प्रतिवर्ष खर्च कर रहा है।

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    नौनिहालों को आंगनबाड़ी केंद्र तक पहुंचाने के लिए सरकार नई-नई योजना चला रही है। इसके लिए बाल पुष्टाहार विभाग के अधिकारियों को लगातार निर्देशित किया जा रहा है। जिले में नगर सहित 18 ब्लाकों में बाल विकास परियोजना कार्यालय खोले गए हैं, जहां से आसानी से क्षेत्र के केंद्रों पर नजर रखी जा सके। वहीं बाल विकास परियोजना सीडीपीओ की तैनाती हैं। एक मुख्य सेविका के अधीन 20 आंगनबाड़ी केंद्र आते हैं।

    इसके अतिरिक्त जिला कार्यक्रम कार्यक्रम अधिकारी की जिले में तैनाती है। वहीं शासन द्वारा बच्चों को सीधे तौर कापी, पेंसिल, किताब, खेल सामग्री व दोपहर का पोषण युक्त भोजन देता है। इसके अतिरिक्त दाल व दलिया भी घर में बनवाकर खाने के लिए दिया जाता है।

    सभी बच्चों को दूर न जाना पड़े, इसके लिए उसी गांव य मोहल्ले में आंगनबाड़ी केंद्र खोले जा रहे हैं, जिससे अभिभावक बच्चों का आसानी से केंद्रों पर दाखिला करा सकें। इसके अतिरिक्त नौनिहालों के लिए हाइटेक बाल वाटिका भी बनाई जा रही है। रैली व अन्य माध्यम से बच्चों को केंद्र तक पहुंचाने के लिए शासन अधिकारियों को निर्देशित कर रहा है।

    इन सभी व्यवस्थाओं के बावजूद विभाग बच्चों को स्कूल तक नहीं पहुंचा रहा है। इससे साफ जाहिर कि विभाग के आला अधिकारी शासन की मंशा के अनुरूप काम नहीं कर रहे हैं। ये विभाग के आंकड़े कह रे हैं। आंकड़े शासन की ंशापर पानी फेर रहे है। वहीं जमीनी हकीकत इससे ी खरब है।मौके पर बहुत कम बच्चे मिलते है। ई कंद्रोंपर ए य दो ीबच्चे केंद् पुंच रहे हैं।

    घट रही नौनिहालों की संख्या

    • मार्च, 2025 - 1, 15, 261
    • अप्रैल, 2025 - 1,15, 963
    • मई, 2025 - 1,15, 353
    • जून, 2025 - 1,15682
    • जुलाई, 2025 - 1,12 806
    • अगस्त, 2025-1,07,637

    हमारे यहां बच्चों की संख्या कम नहीं है। बच्चों की संख्या बढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं है। बच्चों के पंजीकरण कम हो रहे हैं, इसका मतलब बच्चे कान्वेंट व प्राइवेट में जा रहे होंगे, कोई किसी को रोक सकता है क्या। अब तो गांव-गांव प्राइवेट प्री स्कूल खुल गए हैं। -विनय कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी