विहिप का संकल्प: अशोक सिंहल शताब्दी वर्ष में काशी-मथुरा मुक्ति और सांस्कृतिक पुनर्जागरण संकल्प आगे बढ़ाएंगे
विश्व हिंदू परिषद अशोक सिंहल के जन्म शताब्दी वर्ष में काशी और मथुरा की मुक्ति के संकल्प को आगे बढ़ाएगी। सामाजिक समरसता जैसे अभियान चलाए जाएंगे।

अशोक सिंहल शताब्दी वर्ष विहिप मना रहा है।
HighLights
अशोक सिंहल के जन्म शताब्दी वर्ष में होंगे विविध आयोजन
छह अक्टूबर को संगठन कर रहा है सांस्कृतिक चेतना संगोष्ठी
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। विश्व हिंदू परिषद अशोक सिंहल का जन्म शताब्दी वर्ष मना रहा है। आयोजनों की शुरुआत 27 सितंबर से नई दिल्ली में हो चुकी है। इसी कड़ी में काशी प्रांत में दो बड़े आयोजन होने हैं। इनमें एक प्रयागराज में छह अक्टूबर अर्थात मंगलवार को एएमए सभागार में और दूसरा काशी में 25 अक्टूबर को होगा।
वर्ष भर चलने वाले अभियानों में समरसता, हिंदू समाज को संगठित करने के साथ संगठन का ध्यान काशी और मथुरा के मुक्ति के संकल्प को आगे बढ़ाने पर है। यह बातें प्रांत मंत्री डॉ. राजनारायण ने पिछले दिनों प्रयागराज शहर के केसर भवन में पत्रकारों से साझा की।
संगठन की पाक्षिक पत्रिका हिंदू विश्व के अशोक सिंहल पर केंद्रित अंक का विमोचन करते हुए प्रांत मंत्री ने कहा, विभिन्न आयोजनों के जरिए अशोक सिंहल के चिंतन, राष्ट्र समाज के प्रति उनके योगदान को हम सब याद करेंगे। मतांतरण पर प्रतिंध, घर वापसी को बढ़ावा, वेदों के ज्ञान का प्रचार, मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्ति, सामाजिक समरसता एवं सेवा के अधूरे कार्यों को गति दी जाएगी।
बताया कि छह अक्टूबर को शाम 4:30 बजे मेडिकल एसोसिएशन कन्वेशन सेंटर में सांस्कृतिक चेतना संगोष्ठी होगी। इसमें संगठन के केंद्रीय उपाध्यक्ष चम्पतराय व उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के साथ कई संत व पदाधिकारी शामिल होंगे। पूरे वर्ष स्वदेशी, गोरक्षा के कार्यों को गति दी जाएगी।
काशी प्रांत के 22 संगठनात्मक जिलों में शारदीय नवरात्र में महिला सशक्तिकरण के कई कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। सेवा बस्तियों का चिह्नीकरण हो चुका है वहां सेवा कार्य शुरू किए जाएंगे। मतांतरण प्रभावित स्थानों पर संगठन सत्संग के आयोजन को भी बढ़ाएगा। बजरंग दल कार्यकर्ता सम्मेलनों को भी आयोजित किया जाएगा।
गरबा आयोजन में सिर्फ सनातनियों को शामिल करें
विहिप के पदाधिकारियों ने हिंदू समाज से आग्रह किया है कि नवरात्रि में होने वाले गरबा कार्यक्रमों में सिर्फ सनातनी परंपरा के लोगों को शामिल करें। पंडाल में नृत्य करने वाले, संगीत बजाने वाले तथा गायक भी सनातनी हों। सनातन के प्रमुख त्योहारों पर हमारा आर्थिक व सांस्कृतिक व्यवहार उन्हीं लोगों के साथ होना चाहिए, जो स्वयं इनको धार्मिक भाव से मनाते हों। आह्वान किया गया कि संपूर्ण हिंदू समाज सांस्कृतिक पुनर्जागरण अभियान का हिस्सा बने। इस मौके पर अजय गुप्त, संजय गुप्त, आलोक प्रताप, बृजभूषण सिंह, सुनील आदि मौजूद रहे।
