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UP के 57 हजार ग्राम पंचायत में एक ऐसा गांव... जहां 30 हजार की आबादी के लिए बंद हैं IGRS के दरवाजे

By Surya Prakash Tiwari Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Tue, 06 Oct 2026 03:03 PM (IST)

उत्तर प्रदेश के उमरपुर नींवा गांव में 30 हजार आबादी के लिए IGRS पोर्टल बंद है, जिससे ग्रामीणों को शिकायत ...और पढ़ें

प्रयागराज-कौशांबी स्थित उमरपुर नींवा में ग्राम पंचायत का बंद कूड़ा प्रबंधन केंद्र, इसके बाहर फैला कचरा। जागरण

प्रयागराज-कौशांबी स्थित उमरपुर नींवा में ग्राम पंचायत का बंद कूड़ा प्रबंधन केंद्र, इसके बाहर फैला कचरा। जागरण

HighLights

  1. उमरपुर नींवा गांव का ब्लाक कौशांबी का चायल है तो थाना प्रयागराज का धूमनगंज

  2. 1997 के जिला बंटवारे में बरती गई अनदेखी का खामियाजा भुगत रहे 6 हजार परिवार

सूर्य प्रकाश तिवारी, प्रयागराज। संगम नगरी की शहरी बस्ती के बीच बसा उमरपुर नीवां गांव। प्रदेश की 57 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में शायद यह इकलौता ऐसा गांव होगा, जिसके लिए आईजीआरएस पोर्टल के दरवाजे पूरी तरह बंद हैं। यह पोर्टल भले ही क्यों न हर रोज हजारों फरियादियों का दर्द बांटता हो, लेकिन उमरपुर नींवा की 30 हजार की आबादी की यहां सुनवाई ही नहीं होती।

जनपद बंटवारे में लापरवाही का परिणाम

वर्ष 1997 में कौशांबी जिले के गठन के लिए प्रयागराज के बंटवारे में बरती गई लापरवाही का यह परिणाम है। सुलेमसराय से सटी इस ग्राम पंचायत का थाना प्रयागराज का धूमनगंज है, जबकि ब्लाक कौशांबी का चायल। राजस्व या पुलिस संबंधित काम प्रयागराज में होते हैं। वहीं सड़क, पानी, सफाई, पेंशन, छात्रवृत्ति, राशन, पीएम-सीएम आवास के लिए 30 किलोमीटर दूर चायल जाना पड़ता है।

Waterlogging and mud on road in Umarpur Niva

आईजीआरएस पोर्टल पर थाना-जिला दोनों दर्ज होते हैं

आईजीआरएस पोर्टल पर थाना व जनपद दोनों दर्ज करने पड़ते हैं। ग्रामीण थाने में धूमनगंज व जिले में कौशांबी दर्ज करते हैं। इस पर पोर्टल बताता है कि इस नाम का कोई थाना जिले में है ही नहीं। इसी तकनीकी अड़चन के कारण ग्रामीण आइजीआरएस की सुविधा से वंचित हैं। जबकि, गांव में समस्याओं का अंबार लगा है।

mud on road in Umarpur Niva

बदहाल हैं सड़कें, गलियों में बह रही गंदगी

65 वर्षीय महिला बनारसी सालों से पीएम आवास के लिए परेशान हैं। चायल या कौशांबी जाने की उनकी स्थिति नहीं। आनलाइन शिकायत दर्ज नहीं हो सकती। आखिर वह जाएं तो कहां। मनीष चौबे, अरुण त्रिपाठी, रवींद्र और संजय कहते हैं कि सड़क, बिजली, पानी और साफ-सफाई की समस्या बताने का एक मात्र सहज माध्यम आइजीआरएस है, उससे भी गांव वंचित है। कई साल से गांव को प्रयागराज में जोड़ने की मांग कर रहे हैं। कोई सुनने वाला नहीं है।

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