UP परिषदीय विद्यालय: प्रशस्त एप पर वीडियो देखकर स्क्रीनिंग करने में रुचि नहीं ले रहे गुरुजी, जिलों की यहां देखें स्थिति
उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों के शिक्षक दिव्यांग विद्यार्थियों की स्क्रीनिंग के लिए प्रशस्त ऐप पर वीडियो देखने में उदासीनता दिखा रहे हैं। हालांकि प्रयागराज में स्थिति ठीक है।

उप्र परिषदीय विद्यालय के शिक्षक प्रशस्त एप स्क्रीनिंग को लेकर हिचकिचा रहे हैं।
HighLights
पोर्टल पर कुल 5,74,984 अध्यापकप पंजीकृत
वीडियो देखने में 4,90,856 शिक्षकों ने रुचि ली
प्रयागराज में 69.4 प्रतिशत शिक्षकों ने देखा वीडियो
राज्य ब्यूरो, जागरण, प्रयागराज। प्रदेश के सभी बोर्डों के वित्तपोषित, वित्तविहीन व परिषदीय विद्यालयों के प्रत्येक अध्यापकों को प्रशस्त एप/पोर्टल पर उपलब्ध कराए गए वीडियो अनिवार्य रूप से देखने हैं। इनके जरिए दिव्यांग विद्यार्थियों की स्क्रीनिंग की प्रक्रिया पूरी करनी है। ये वीडियो समावेशी शिक्षा और शिक्षकों में संवेदनशीलता को बढ़ाने में सहायक हैं।
10 वीडियो शिक्षकों को देखना है
बावजूद इसके एप पर उलब्ध सभी 10 वीडियों को देखने में शिक्षक उदासीन हैं। पिछले दिनों हुई समीक्षा के अनुसार पोर्टल पर कुल 5,74,984 अध्यापक पंजीकृत हैं जबकि वीडियो देखने में 4,90,856 शिक्षकों ने रुचि ली।
इन जिलों में नहीं रुचि ले रहे शिक्षक
महानिदेशक स्कूल शिक्षा की ओर से उन 10 जनपदों का विवरण जारी किया गया है, जहां के अध्यापकों ने वीडियो देखने में रुचि नहीं ली। इनमें कन्नौज, सोनभद्र, एटा, गाजियाबाद जैसे जिले शामिल हैं। यहां क्रमश: 24.1 प्रतिशत, 24.5 प्रतिशत, 24.7 प्रतिशत, 25.1 प्रतिश्त शिक्षकों ने वीडियों देखा है।
बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी
इसी क्रम में गौतम बुद्ध नगर में 25.1 प्रतिशत, अलीगढ़ में 25.5 प्रतिशत, राजधानी लखनऊ में 25.6 प्रतिशत, हमीरपुर में 25.6 प्रतिशत, आजमगढ़ में 25.7 प्रतिशत, संत कबीर नगर में 25.8 प्रतिशत अध्यापकों ने रुचि दिखाई है। स्थिति को असंतोषजनक मानते हुए सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी किया गया है।
तकनीकी समस्या का निदान होगा
कहा गया है कि यदि एप पर लॉगिन में किसी तरह की तकनीकी समस्या आ रही हो तो उनके निदान के लिए support-prashast@gov.in पर मेल कर सकते हैं। प्रत्येक वीडियो को देखना अनिवार्य है। इस संबंध में बीएसए अनिल कुमार ने कहा कि प्रयागराज न्यूनतम की स्थिति से बाहर है। यहां 1386 शिक्षकों में से 962 शिक्षकों अर्थात 69.4 प्रतिशत ने वीडियो देख लिया है। मांडा विकासखंड में सब से अच्छा कार्य हुआ है, फिर भी सुनिश्चित कराया जा रहा है कि प्रत्येक शिक्षक वीडियो देखें और उसके अनुसार विद्यार्थियों की स्क्रीनिंग करें।
