गोशालाओं में अनियमितता: पशुपालन विभाग के निदेशक ने प्रयागराज सहित UP में 12 जिलों के CVO से मांगा जवाब
पशुपालन विभाग के निदेशक ने प्रयागराज सहित UP के 12 जिलों के CVO से स्थायी गोशालाओं को क्षमता से कम ...और पढ़ें

यूपी की गोशालाओं में अनियमितता पर पशुपालन विभाग सख्त, 12 जिलों के CVO से मांगा स्पष्टीकरण।
HighLights
प्रदेश की 45 स्थायी गोशालाओं को क्षमता से अनुरूप संचालित नहीं करने का आरोप
प्रयागराज के अफसरों का दावा, दो महीने पहले ही फुल हो गए वृहद गोसंरक्षण केंद्र
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। स्थायी गोशालाओं को पूरी क्षमता से नहीं चलाने पर प्रयागराज सहित प्रदेश के 12 जनपदों के मुख्य पशु चिकित्साधिकारियों (सीवीओ) से स्पष्टीकरण मांगा गया है। पशुपालन विभाग के निदेशक प्रशासन एवं विकास ने करीब 15 दिन पहले इसका पत्र जारी किया। वहीं अफसरों का दावा है कि प्रयागराज की गोशालाएं दो महीने पहले फुल हो गईं थीं।
आंकड़े क्या कहते हैं?
108 गोशालाएं गंगापार-यमुनापार में हैं।
4 स्थायी गोशालाएं गंगापार-यमुनापार में हैं
20 हजार संरक्षित बेसहारा पशु
प्रदेश में में लगभग 45 स्थायी गोशालाएं बन चुकी हैं
बेसहारा पशुओं को संरक्षित करने के लिए गांवों में बनी अस्थायी गोशालाओं को बंद करने की तैयारी है। इनकी जगह ब्लाक स्तर पर वृहद गो संरक्षण केंद्र के रूप में स्थायी गोशालाएं बनाई जा रहीं हैं। प्रदेश के विभिन्न जनपदों में लगभग 45 स्थायी गोशालाएं बन चुकी हैं। प्रयागराज के मांडा के देवरी, बारा के सोनबरसा, कोरांव के लतीफपुर और होलागढ़ के उमरिया बादल स्थित वृहद गोसंरक्षण केंद्र भी इसमें शामिल हैं।
गोशालाओं को पूरी क्षमता से संचालित करने के निर्देश
इन गोशालाओं की न्यूनतम क्षमता 400 मवेशियों की है। इन गोशालाओं को पूरी क्षमता से संचालित करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। यह पशु अस्थायी गोशालाओं से स्थानांतरित होने हैं। पशुपालन विभाग के निदेशक प्रशासन एवं विकास डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने समीक्षा में पाया कि प्रयागराज, अलीगढ़, अमेठी, अयोध्या, बिजनौर, चंदौली, फतेहपुर, गोरखपुर, हरदोई, जौनपुर, झांसी और प्रतापगढ़ में अब भी स्थायी गोशालाएं पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो रहीं हैं।
प्रयागराज के गोआश्रय स्थलों में 400 से कम पशु नहीं!
आदेशों की इस अवहेलना पर निदेशक ने संबंधित जिलों के सीवीओ से तथ्यों के साथ स्पष्टीकरण मांगा है। प्रयागराज के सीवीओ डॉ. शिवनाथ यादव का कहना है कि जिले में संचालित हो रहे चार गोआश्रय स्थलों में एक भी ऐसे नहीं हैं, जहां 400 से कम पशु हों। दो महीने पहले ही यह पूरी तरह से भर गईं थीं।
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