UP में प्रधानाचार्य भर्ती से संस्कृत विद्यालयों के शिक्षक बाहर, अनुभव प्रमाण व पदनाम विसंगति बनी बड़ी बाधा
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने 2,647 प्रधानाचार्य व प्रधानाध्यापक पदों पर भर्ती निकाली है, जिसमें संस्कृत विद्यालयों के ...और पढ़ें

उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज।
HighLights
VOT के संस्थापक अध्यक्ष ने आयोग को विसंगतियों से कराया अवगत
UPESSC ने 2,647 प्रधानाचार्य व प्रधानाध्यापक पदों पर भर्ती निकाली है
राज्य ब्यूरो, जागरण, प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) ने अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के लिए 2,647 प्रधानाचार्य व प्रधानाध्यापक पदों पर भर्ती निकाली है। ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 23 अक्टूबर से शुरू है। आवेदन व शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 22 नवंबर है। आवेदन में संशोधन की अंतिम तिथि 25 नवंबर है। इसके लिए संभावित परीक्षा तिथि सात जनवरी 2027 है।
क्यों बाहर हो रहे संस्कृत विद्यालयों के शिक्षक?
इस भर्ती के लिए बड़ी संख्या में अभ्यर्थी आवेदन कर रहे हैं। इससे संस्कृत विद्यालयों के शिक्षक बाहर हो रहे हैं, जबकि संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा छह से 12 तक तथा महाविद्यालयों में शास्त्री एवं आचार्य स्तर तक शिक्षण कार्य होता है। यहां कार्यरत शिक्षकों एवं प्रधानाचार्यों के पास निर्धारित शैक्षिक योग्यता और पर्याप्त शिक्षण अनुभव है फिर भी उन्हें वर्तमान भर्ती प्रक्रिया में समान अवसर न मिलने की शिकायत है। प्रधानाचार्य पद की योग्यता की बात करें तो परास्नातक 50% अंक, बीएड, चार वर्ष का व कक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थियों के शिक्षण का अनुभव चाहिए।
वेतन, पदनाम व अध्यापन स्तर की विसंगति भी
इसी क्रम में प्रधानाध्यापक पद के लिए भी बीएड के साथ अध्यापन का चार वर्ष का अनुभव आवश्यक है। संस्कृत महाविद्यालयों में प्रथमा से आचार्य तक की पढ़ाई होती है। यहां के शिक्षक का पदनाम प्रवक्ता, सहायक प्रवक्ता है। वे कक्षा नौ से 12 (पूर्व मध्यमा, उत्तर मध्यमा) तक की कक्षाओं में शिक्षण करते हैं लेकिन संस्कृत विद्यालयों के वेतन, पदनाम और अध्यापन स्तर की विसंगति सामने आ रही है। अनुभव प्रमाणन व पदनाम की विसंगति विशेष रूप से प्रधानाचार्य पद के लिए आवेदन में आड़े आ रही है। वर्तमान विज्ञापन का ग्रेड पे, शिक्षा का स्तर और शैक्षणिक अहर्ता समान होने पर भी यह समस्या बनी हुई है।
आयोग के उप सचिव का ध्यान आकर्षित कराया
वॉयस ऑफ टीचर्स (VOT) के संस्थापक अध्यक्ष आचार्य राजेश मिश्र धीर ने इसे लेकर उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के उप सचिव डॉ. संजय सिंह से मुलाकात की। पत्र देकर विसंगतियों की ओर ध्यान आकर्षित कराया है। कहा कि संस्कृत शिक्षा व्यवस्था में प्रचलित पदनाम, वेतनमान और शैक्षणिक स्तर की भिन्नताओं के कारण सामान्य माध्यमिक शिक्षा संस्थानों के शिक्षकों के समान अनुभव प्रमाणपत्र प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है। कुछ जगहों पर अध्यापन अनुभव के प्रमाणीकरण में समस्या है तो कहीं पदनाम की भिन्नता को आधार बनाकर पात्रता पर प्रश्नचिह्न लगाया जा रहा है।
यह मांग की गई
उन्होंने कहा कि संस्कृत शिक्षा व्यवस्था की विशिष्ट प्रकृति को ध्यान में रखते हुए संस्कृत महाविद्यालयों में प्रवक्ता एवं सहायक प्रवक्ता के पदों पर किए गए अध्यापन कार्य को कक्षा नौ से 12 तक के समकक्ष अध्यापन अनुभव के रूप में मान्यता प्रदान की जाए। अनुभव प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को स्पष्ट एवं एकरूप बनाया जाए। आयोग के पोर्टल या स्पष्टीकरण जारी करने से संस्कृत विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को भी समान अवसर मिल सकेगा।
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