प्रयागराज: विधि विश्वविद्यालय में प्रशासनिक टकराव चरम पर, VC ने रजिस्ट्रार की शक्तियां छीनी; 10 दिन में मांगा जवाब
प्रयागराज के डॉ. राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में कुलपति और कुलसचिव के बीच प्रशासनिक टकराव गहरा गया है। कुलपति ...और पढ़ें

डॉ. राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, प्रयागराज।
HighLights
RPNLU के कुलपति ने रजिस्ट्रार को तत्काल प्रभाव से कार्यविरत रहने का दिया निर्देश
कुलसचिव का परेशान करने की साजिश, कुलपति पर नियुक्ति में भ्रष्टाचार छिपाने का आरोप
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। डॉ. राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में कुलपति और कुलसचिव के बीच प्रशासनिक टकराव चरम पर पहुंच गया है। कुलपति प्रो. उषा टंडन ने कुलसचिव वरुण कुमार पांडेय को तत्काल प्रभाव से विश्वविद्यालय का कोई भी कार्य नहीं करने का निर्देश देते हुए उनकी समस्त प्रशासनिक एवं कार्यकारी शक्तियां वापस ले ली हैं। साथ ही विश्वविद्यालय के अभिलेखों, गोपनीय दस्तावेजों और अन्य प्रशासनिक संसाधनों का अधिकृत अधिकारियों को हस्तांतरण करने का आदेश दिया है। इस कार्रवाई से विश्वविद्यालय के प्रशासनिक गलियारों में हलचल मच गई है।
कुलसचिव की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए
कुलपति कार्यालय की ओर से दो नवंबर को जारी आदेश में कुलसचिव की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। इसमें सक्षम प्राधिकारियों, विशेषकर कुलपति के निर्देशों का अनुपालन नहीं करने, प्रशासनिक कार्यों में अपेक्षित सहयोग न देने, कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही और विश्वविद्यालय के गोपनीय अभिलेखों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में जवाबदेही पर सवाल खड़े किए गए हैं।
कुलपति ने कारण बताओ नोटिस जारी की
विश्वविद्यालय प्रशासन ने गोपनीय सूचनाओं के अनधिकृत इस्तेमाल अथवा उनके सार्वजनिक होने की आशंका को भी गंभीर विषय बताया है। कुलपति की ओर से जारी आदेश और कारण बताओ नोटिस के अनुसार कुलसचिव को इन मामलों में पहले भी जवाब देने का अवसर दिया गया था। 26 सितंबर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद भी विभिन्न पत्रों के माध्यम से स्पष्टीकरण और संबंधित अभिलेख मांगे गए, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिला। अब कुलसचिव को नए नोटिस पर अपना विस्तृत पक्ष रखने के लिए दस दिन का समय दिया गया है।
कुलसचिव ने तीखी आपत्ति जताई
हालांकि इस कार्रवाई पर कुलसचिव वरुण पांडेय ने तीखी आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे अधिकार क्षेत्र से बाहर की कार्रवाई बताते हुए कहा कि उनकी नियुक्ति शासन स्तर से हुई है। ऐसे में कुलपति को उनकी शक्तियां वापस लेने का अधिकार नहीं है। पांडेय का आरोप है कि उन्होंने कारण बताओ नोटिस का जवाब देने के लिए संबंधित पत्रावलियां मांगी थीं, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने अब तक उन्हें उपलब्ध नहीं कराया।
दस्तावेज ही नहीं दिए जा रहे तो अपना पक्ष कैसे रखेंगे?
उनका कहना है कि जब जरूरी दस्तावेज ही नहीं दिए जा रहे तो अपना पक्ष कैसे रखेंगे? कुलसचिव ने कार्रवाई के पीछे कुलपति की नाकामियों को छिपाने और नियुक्तियों में कथित व्यापक भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने का आरोप भी लगाया है। उन्होंने दावा किया कि इससे पहले 11 वित्त नियंत्रकों के साथ भी इसी तरह की कार्रवाई की जा चुकी है।
शासन को संस्तुति भेजने पर भी विचार किया जाएगा
इधर, कुलपति प्रो. उषा टंडन ने पत्र में स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई अंतरिम और निवारक प्रकृति की है। इसे कुलसचिव का निलंबन, पद से हटाना नहीं माना जाएगा। उनके अधिकारों का इस्तेमाल अब कुलपति द्वारा अधिकृत अधिकारी करेंगे। कुलसचिव के जवाब और उपलब्ध अभिलेखों की समीक्षा के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर शासन को संस्तुति भेजने पर भी विचार किया जाएगा।
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