यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 28, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
UP News: संभल जामा मस्जिद की साफ-सफाई और लाइटनिंग को हरी झंडी, अगली सुनवाई 4 मार्च को
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल की विवादित शाही जामा मस्जिद की साफ-सफाई और लाइटनिंग की अनुमति दी है। रमजान महीने में ...और पढ़ें

विधि संवाददाता प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि दो मार्च से शुरू हो रहे रमजान महीने में संभल की विवादित शाही जामा मस्जिद की साफ-सफाई की जाए और हर वर्ष की भांति लाइटनिंग की अनुमति दी जाए। साफ सफाई एएसआई व प्रशासन कराएंगे। आज शुक्रवार को एएसआई ने फोटोग्राफ सहित अपनी रिपोर्ट पेश की।
कहा भवन परिसर की अभी रंगाई पुताई व मरम्मत की आवश्यकता नहीं है। राष्ट्रीय धरोहरों के रखरखाव के नियम है। जिसके तहत भवन का स्वरूप यथावत कायम रखा जाता है।
याची के वरिष्ठ अधिवक्ता एसएफए नकवी ने रिपोर्ट पर आपत्ति दाखिल करने के लिए समय मांगा। जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने एएसआई अधिवक्ता मनोज कुमार सिंह को भी रिपोर्ट हलफनामे के जरिए दाखिल करने को कहा। याचिका की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल कर रहे हैं। अगली सुनवाई 4 मार्च मंगलवार को होगी।
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कोर्ट ने दी रंगाई पोताई की अनुमति। जागरण
गौरतलब है कि दो मार्च से रमजान का महीना शुरू हो रहा है। जामा मस्जिद मस्जिद कमेटी ने पुनरीक्षण याचिका दायर कर रमजान से पहले कथित मस्जिद की रंगाई पुताई, मरम्मत व अतिरिक्त लाइटनिंग कराने की अनुमति मांगी।
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कोर्ट ने एएसआई के तीन अधिकारियों की टीम को मौके का निरीक्षण कर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था। याची अधिवक्ता ने टीम के साथ एसडीएम के मौजूद होने पर आपत्ति की। जिसपर कोर्ट ने महाधिवक्ता से इसकी वजह जाननी चाही, कहा- जाने की जरूरत नहीं थी। कुछ अलग होता तो कोर्ट देखती।
सरकार की तरफ से महाधिवक्ता अजय कुमार मिश्र व मुख्य स्थाई अधिवक्ता कुणाल रवि सिंह ने पक्ष रखा। कथित मस्जिद की साफ सफाई कराने में सहयोग का आश्वासन दिया।
संभल हिंसा में चार लोगों की गई जान
संभल की जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर होने का दावा पेश किए जाने बाद पहले 19 नवंबर और दोबारा 24 नवंबर को मस्जिद का सर्वे किया गया। इसी दौरान हिंसा भड़क गई और जमकर पथराव, आगजनी, तोड़फोड़ और फायरिंग की गई। इसमें चार लोगों की गोली लगने से मौत हो गई थी।
इसके साथ ही पुलिस अधिकारियों समेत डेढ़ दर्जन से अधिक पुलिस कर्मी गोली व पत्थर लगने से घायल हो गए थे। पुलिस की ओर से हिंसा में शामिल 37 लोगों को नामजद करते हुए 3750 अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
