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1 नवंबर को सोने-चांदी की खरीदारी का विशेष मुहूर्त, नक्षत्रों के राजा रविपुष्य खोलेंगे उन्नति के द्वार 

By Sharad Dwivedi Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Sat, 31 Oct 2026 06:11 PM (IST)

1 नवंबर को रविपुष्य योग का विशेष संयोग है, जो सोने-चांदी की खरीदारी और नए कार्यों के लिए अत्यंत शुभ ...और पढ़ें

पहली नवंबर को रविपुष्य नक्षत्र है।

पहली नवंबर को रविपुष्य नक्षत्र है।

HighLights

  1. पुष्य नक्षत्र हर 27 दिन में आता है, लेकिन रविवार को पड़ने से महत्व बढ़ जाता है

  2. 1 नवंबर की सुबह 10.35 बजे लगेगा पुष्य नक्षत्र, औषधि की भी खरीदारी का महत्व

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। कार्तिक कृष्णपक्ष की सप्तमी तिथि पर नक्षत्रों के राजा पुष्य का प्रभाव रहेगा। रविवार यानी 1 नवंबर का दिन और पुष्य नक्षत्र होने से रविपुष्य योग का अद्भुत संयोग बन रहा है। मान्यता है कि यह लोगों की उन्नति का द्वार खोलेगा।

तंत्र साधना व लक्ष्मी पूजा का सार्थक प्रभाव मिलेगा 

वैसे पुष्य नक्षत्र हर 27 दिन में आता है, लेकिन रविवार को पड़ने से उसका महत्व बढ़ जाता है। इसमें औषधि, सोने-चांदी की सामग्री की खरीदारी का विशेष महत्व है। तंत्र साधना और मां लक्ष्मी की पूजा का सार्थक प्रभाव अतिशीघ्र प्राप्त होता है।

पुष्य नक्षत्र का कब से कब तक योग

ज्योतिर्विद आचार्य देवेंद्र प्रसाद त्रिपाठी के अनुसार पुष्य नक्षत्र रविवार की सुबह 10.35 बजे लगकर सोमवार की सुबह 9.04 बजे तक रहेगा। रविवार का दिन पड़ने से रविपुष्य योग बन रहा है, जो अत्यंत शुभ होता है।

औषधियां लेने से निरोगता होती है

उन्होंने बताया कि इसमें तंत्र साधना, मां लक्ष्मी और भगवान शिव के पूजन का विशेष महत्व होता है। इसमें औषधियां लेने से निरोगता होती है। सोने-चांदी की वस्तुएं खरीदने से सुख-संपन्नता की प्राप्ति होती है। दोपहर 1.52 से 3.23 बजे तक कुंभ की स्थिर लग्न और 3.24 से शाम 4.51 बजे तक मीन की द्विस्वभाव रहेगी। उक्त समयावधि में पूजन पुण्यकारी रहेगा।

नए कार्यों की करें शुरुआत

पाराशर ज्योतिष संस्थान के निदेशक आचार्य विद्याकांत पांडेय के अनुसार धन और समृद्धि के लिए रविपुष्य योग बहुत शुभ होता है। इस दिन किए गए धार्मिक कार्यों और पूजन से भाग्य में वृद्धि होती है। नए कार्यों की शुरुआत का यह सबसे उत्तम दिन है। इसमें व्यापार, संपत्ति निवेश, वाहन खरीदारी, गृह प्रवेश आदि कार्य करना चाहिए।

पूजन में इन मंत्रों का जप करें

दिन की शुरुआत सूर्योपासना से करें। सूर्यदेव को अर्घ्य देते समय ''ऊं सूर्याय नमः'' मंत्र का जप करना चाहिए। मां लक्ष्मी के पूजन में कमल अथवा गुलाब का पुष्प अर्पित करके ''ऊं ह्रीं श्रींक्लीं महालक्ष्म्यै नमः'' मंत्र का 108 बार जप करना पुण्यकारी होता है।

उधार लेने और देने से बचें : ज्योतिर्विद रामजी त्रिपाठी

श्री प्रभुदत्त ब्रह्मचारी आश्रम के ज्योतिर्विद रामजी त्रिपाठी के अनुसार अगर किसी की कुंडली में सूर्य और शनि संबंधी दोष हैं तो उसका निवारण पुष्य नक्षत्र में करवाना चाहिए। इस दिन उधार लेने और देने से बचना चाहिए। एकाक्षी नारियल, श्रीयंत्र, गोमती चक्र और लाल वस्त्र को घर में स्थापित करना शुभ होता है। तिल, गुड़, गेहूं का दान करना चाहिए। रविपुष्य योग में कोई नकारात्मक कार्य नहीं करना चाहिए। किसी का अहित न करें, कटु वचन बोलने से बचें।

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