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प्रयागराज नकली नोट गिरोह: राजेश यादव के तार पुणे से जुड़े, करोड़ों रुपये का राज खुलेगा

Published: Sun, 01 Nov 2026 08:48 AM (IST)

प्रयागराज में राजेश यादव के घर से करोड़ों रुपये मिलने के बाद जांच एजेंसियां सक्रिय हैं। संदेह है कि राजेश ...और पढ़ें

नकली नोटों की तस्करी करने वालों के संपर्क में था राजेश। जागरण

नकली नोटों की तस्करी करने वालों के संपर्क में था राजेश। जागरण

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। बरईपुर रामनगर निवासी राजेश यादव उर्फ बबलू के घर से कराेड़ों रुपये मिलने के बाद जांच एजेंसियों ने हर बिंदु को खंगालना शुरू कर दिया है। पुणे में वहां किस कंपनी में काम करता था? कितने वर्ष तक काम किया? रुपये उसे कहां से मिले? कैसे रकम यहां ले आया? उसके घर में किन-किन लोगों को इसकी जानकारी थी?

ऐसे ही तमाम प्रश्नों के उत्तर को वह खोज रही है। सूत्रों की मानें तो राजेश यादव के तार नकली नोटों की तस्करी करने वाले गैंग से जुड़े होने का भी संदेह है। इसके लिए गहनता से उससे हर जानकारी एकत्र कर जांच एजेंसियों पुणे संपर्क साधने में लगी हैं। अफसरों को पूरी उम्मीद है कि इस पूरे प्रकरण की उलझी गुत्थी पुणे से ही सुलझेगी।

राजेश यादव उर्फ बबलू करीब 12 वर्ष तक पुणे में एक कंपनी में रहा। उसके दो भाई भी यहां काम करने गए, लेकिन दो वर्ष बाद ही घर लौट आए। कुछ करीबी रिश्तेदारों को राजेश ने वहां काम पर रखवाया, लेकिन जल्द ही उन्हें भी यहां से घर जाने को कह दिया। एक-एक कर सभी लौट आए, लेकिन राजेश वहीं डटा रहा। वर्ष 2021 में कंपनी में एक विभाग द्वारा छापेमारी के बाद वह वहां से लौटा तो करोड़पति हो गया था।

इधर बुधवार को उसके घर से जमीन में गड़े तीन नीले ड्रम में मिले करोड़ों रुपये के बाद मामला सुर्खियों में आया। पहले पुलिस और अब आयकर विभाग की टीम पूरे प्रकरण की जांच में जुटी है। इसके अलावा अन्य जांच एजेंसियां भी सक्रिय हैं। सूत्रों की मानें तो जांच एजेंसियों को पता चला है कि पुणे में रहने के दौरान नकली नोटों की तस्करी करने वाले गैंग से राजेश का जुड़ाव हो गया था। इसमें वह जिस कंपनी में काम करता था, वहां की भी संलिप्तता थी। हालांकि, यह अभी पूरी तौर पर साफ नहीं हो सका है और जांच एजेंसियां इसी उलझी कड़ी को सुलझाने में लगी हैं।

बार-बार बदल रहा बयान, घरवाले भी खामोश
राजेश यादव बार-बार अपना बयान बदल रहा है। कभी रुपये खुद के होने की बात कहता है तो कभी नहीं। उसका भाई राकेश यादव उर्फ महाकाल पूछताछ में बस यही कहता है कि राजेश ही रुपये लाया था और वह ही सब कुछ जानता है। यही बात परिवार के अन्य सदस्य भी कह रहे हैं। इसके अलावा कोई कुछ बोलने काे तैयार नहीं है। सूत्रों की मानें तो जांच में जुटी टीम सभी बिंदुओं को खंगालते हुए आगे बढ़ रही है। कब किसने क्या बयान दिया, सब कुछ दर्ज किया जा रहा है। इसी सब को क्रमवार लिखकर टीमें आगे बढ़ने की कोशिश में लगी हैं।

डबल लाकर में रखे गए हैं रुपये
राजेश यादव के घर से बरामद तीन नीले ड्रम में भरे नोट को पुलिस लाइंस स्थित डबल लाकर में रखा गया है। पहले इन रुपये को नवाबगंज थाने के मालखाने में रखा गया था। बाद में मामला आयकर विभाग के अधीन आने के बाद पुलिस अधिकारियों ने मिले रुपये को पुलिस लाइंस स्थित डबल लाकर में रखवा दिया है। राजेश यादव के घर में चल रही खोदाई और जांच के बाद आयकर विभाग की टीम बरामद रुपये की गिनती करेगी।

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पूरे परिवार के मोबाइल का निकाला गया डाटा
जांच टीम ने राजीव यादव समेत उसके परिवार के सभी सदस्यों के मोबाइल को कब्जे में ले रखा है। सभी का डाटा निकाला जा रहा है। इसमें से तीन मोबाइल काफी महंगे हैं। किन लोगों से राजीव यादव सबसे अधिक बात करता था? वह कहां के रहने वाले हैं? इसमें कौन रिश्तेदार और करीबी हैं?, इसकी एक सूची बनाई गई है। इन सभी के बारे में जांच टीम गोपनीय तरीके से पता लगा रही है।

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