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प्रयागराज की अनूठी शृंगार चौकियां: प्रकृति संरक्षण संग भव्यता का अद्भुत संगम देखने जुटते हैं हजारों श्रद्धालु

By Sharad Dwivedi Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Sun, 18 Oct 2026 06:35 PM (IST)

प्रयागराज में शारदीय नवरात्र के दौरान श्रीपथरचट्टी और श्रीमहांत बाबा हाथीराम पजावा रामलीला कमेटियों की अनूठी शृंगार चौकियां आकर्षक हैं। ...और पढ़ें

श्रीपथरचट्टी रामलीला कमेटी की ओर से भोर में निकाली गई शृंगार चौकी। जागरण

श्रीपथरचट्टी रामलीला कमेटी की ओर से भोर में निकाली गई शृंगार चौकी। जागरण

HighLights

  1. शारदीय नवरात्र में प्रयागराज की दो कमेटियों की अनूठी शृंगार चौकियां देखने उमड़ती है भीड़

  2. श्रीपथरचट्टी व श्रीमहांत बाबा हाथीराम पजावा रामलीला कमेटी भोर में निकालती हैं चौकियां

  3. पर्यावरण संरक्षण को चौकी बनाने में लकड़ी, पॉलीथिन व प्लास्टिक का प्रयोग नहीं किया जाता

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। भक्ति जब प्रकृति की रक्षा-संरक्षण का संकल्प बनती है तो धरा पावन हो जाती है। सनातन संस्कारों को प्रवाहित करने वाली चौकियां ऐसी ही प्रेरणा दे रही हैं। हिलोर मारती आस्था के बीच श्रीपथरचट्टी रामलीला कमेटी और श्रीमहांत बाबा हाथीराम पजावा रामलीला कमेटी की भोर में निकलने वाली अलौकिक चौकियां भक्ति के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही हैं।

लकड़ी, पॉलीथिन और प्लास्टिक का प्रयोग नहीं

ये शृंगार की आकर्षक चौकियां केले के पौधे, चांदी और रत्नों से बनी अद्भुत कलाकृति और नक्काशी वाली होती हैं। भोर में निकलने वाली इन चौकियाें को देखने हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। सबकी दृष्टि चौकियों को देखकर ठहर जाती है। पर्यावरण संरक्षण के लिए चौकी बनाने में लकड़ी, पॉलीथिन और प्लास्टिक का प्रयोग नहीं किया जाता।

Prayagraj Pajava Shringar Chowki

सदियों पुरानी परंपरा 

शारदीय नवरात्र की तृतीया से नवमी तिथि पर भोर में चौकी निकालने की सदियों पुरानी परंपरा है। प्रभु श्रीराम-लक्ष्मण प्रतिदिन अलग-अलग चौकियों में आसीन होकर दर्शन देने निकलते हैं। श्रीमहांत बाबा हाथीराम की चौकी शाहगंज स्थित राम मंदिर और श्रीपथरचट्टी की चौकी रामबाग स्थित लीला मैदान से सजकर निकलती है।

चौकियों पर आसीन होते हैं भगवान 

चांदी, महीन मोती (पोत), कुंदन, सोने के वर्क और केले के पत्ते-तने से बनी चौकियाें में अलग-अलग दिन भगवान बैठते हैं। केले के तने-पत्ते से बनी चौकी पर षष्ठी तिथि पर आसीन होते हैं। ध्वज-पताका के बीच भोर चार बजे दोनों कमेटियों की चौकियां निकलती हैं। चौक में आमना-सामना होने के बाद मार्ग बदलकर वापस अपने स्थान पर लौट जाते हैं।

1820 से भोर की चौकी निकालने की परंपरा शुरू हुई

श्रीमहांत बाबा हाथीराम पजावा रामलीला कमेटी के निर्देशक सचिन कुमार गुप्ता व राजगद्दी संयोजक मोहन जी टंडन (टंडन भइया) के अनुसार गुलामी के कालखंड में 1820 के आस-पास भोर की चौकी निकालने की परंपरा शुरू हुई। पूर्वजों ने समाजिक एकता के लिए यह परंपरा शुरू करायी थी। श्रीपथरचट्टी रामलीला के श्रृंगार कमेटी के महामंत्री राजेश सिंह 20 वर्षों से भोर की चौकी निकलवा रहे हैं। बताते हैं कि मान्यता है कि वनवास काल में प्रभु श्रीराम ने षष्ठी तिथि पर पुष्पों से सीता जी का श्रृंगार किया था। इसी कारण षष्ठी तिथि पर दोनों कमेटियां केले से बनी चौकियों का प्रदर्शन कराती हैं। पेड़ न काटना पड़े उसके लिए लकड़ी, पालीथिन व प्लास्टिक का प्रयोग नहीं कराते।

यह चौकियां हैं खास

भोर में पुष्पक विमान, स्वर्णिम गरुण की विशेष चौकी निकलती है। दशहरा पर्व के बाद प्लाई, फाेम में लपेटकर कमेकिल डालकर सुरक्षित रखा जाता है। दशहरा पर्व शुरू होने के दो महीने पहले बनारस के कारीगरों से चौकियों की सफाई और सजावट कराई जाती है।

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