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महाकुंभ 2025 में 40 करोड़ रुपये से बने चमचमाते चौराहे बयां कर रहे दुर्दशा की दास्तां, दो साल में ही हुए बदसूरत

By Amardeep Bhatt Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Sun, 18 Oct 2026 04:00 PM (IST)

महाकुंभ 2025 के लिए 40 करोड़ रुपये की लागत से संवारे गए प्रयागराज के चौराहे दो साल में ही बदहाल ...और पढ़ें

आजाद नगर चौराहे पर पार्क पर टूटा गेट।-जागरण

आजाद नगर चौराहे पर पार्क पर टूटा गेट।-जागरण

HighLights

  1. प्रमुख चौराहों की रेलिंग टूट गई, कहीं-कहीं जड़ से उखड़ी

  2. महाकुंभ में बदली थी सूरत, अब विभागों ने फेर ली हैं आंखें

अमरदीप भट्ट, प्रयागराज। याद कीजिए ''महाकुंभ 2025'' के वे दिन जब शहर के प्रमुख चौराहों की सूरत अचानक से बदल गई थी। चमचमाती रेलिंग और उनके बीच कलाकृतियां एक नई पहचान के रूप में उभरी थीं। दो साल भी पूरे नहीं बीते, इन चौराहों की दुर्दशा हो गई। रेलिंग टूट-फूट गई है, भीतर मन को रिझाने वाली हरियाली उजड़ गई और इससे संबंधित विभागों के अफसरों ने मुंह फेर लिया है।

रेलिंग, गोलाकार लगे सीमेंट ब्लाक उखड़े

रेलिंग क्या, चौराहों के तल में गोलाकार लगाए गए सीमेंट के ब्लाक तक उखड़ गए हैं। यह स्थिति तब है जब चौराहों की धुलाई के लिए अक्सर नगर निगम की टीम पहुंचती है और उनके माध्यम से सूचना उच्चाधिकारियों तक पहुंचती है।

Prayagraj Patrika intersection Park Broken Gate

ये खूबसूरत चौराहे अब बदहाल 

चौराहों की बर्बादी देखना हो तो सिविल लाइंस बस स्टैंड से स्टैनली रोड पर तेलियरगंज की तरफ बढ़िए। अलोपीबाग से भरद्वाजमुनि चौराहा (बालसन चौराहा), शहर के दिल सिविल लाइंस में सुभाष चौराहा, सिविल लाइंस हनुमान मंदिर से संगम मार्ग पर मधवापुर सब्जी मंडी तक का रास्ता नाप लीजिए। वाराणसी, मीरजापुर, मध्य प्रदेश या चित्रकूट-बांदा से शहर प्रयागराज का जुड़ाव कराने वाले बांगड़ धर्मशाला चौराहा को ही देख लीजिए।

Prayagraj Sauth Malaka intersection neglected Park

चौराहों पर लगे रंगबिरंगे झालर गायब

बर्बादी की कहानी विभागों की उदासीनता और करोड़ों खर्च हो चुके बजट में ''खेल'' की ओर इशारा करेगी। रेलिंग कहीं टूटी-फूटी, कहीं जड़ से उखड़ी और कहीं-कहीं इसके गेट गायब हैं। रेलिंग के भीतर गंदगी, कचरा, धूल और टूटी-फूटी लाइट मिलेगी। चौराहों का इस्तेमाल अब ज्यादातर विभिन्न संस्थाओं या जनप्रतिनिधियों के प्रचार-प्रसार के लिए हो रहा है। इनमें लगी रंगविरंगे झालरें जो रात में शहर की खूबसूरती एक अलग ही अंदाज में दिखाती थीं वह भी ज्यादातर गायब हैं।

नंबर गेम

84 चौराहों का हुआ था सुंदरीकरण
40 करोड़ रुपये (लगभग) हुए थे खर्च
06 प्रमुख मार्गों पर बने हैं चौराहे
03 विभागों ने कराया था निर्माण
02 साल में ही रेलिंग जवाब दे गई
02 चौराहों पर सूर्यनमस्कार की बनी है कलाकृति।

इन चौराहों की हालत ज्यादा खराब

सिविल लाइंस बस स्टैंड, आजाद नगर चौराहा, साउथ मलाका चौराहा, पत्रिका चौराहा, संगम पेट्रोल पंप चौराहा, आयुक्त कार्यालय के सामने, कचहरी के पास जहाज चौराहा, रेलवे इलेक्ट्रीफिकेशन कार्यालय का चौराहा, मजार चौराहा से सलोरी आरओबी की तरफ बढ़ने पर स्थित चौराहा।

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