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प्रयागराज में गड़े रुपये का राज: पुणे में कारोबारी के घर छापा पड़ने के बाद रुपये लेकर भागा था राजेश यादव

By Gyanendra Singh1 Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Sun, 01 Nov 2026 06:47 PM (IST)

प्रयागराज में राजेश यादव ने पुणे के एक कारोबारी के करोड़ों रुपये छिपाकर रखे थे, जो 2021 में आयकर छापे ...और पढ़ें

प्रयागराज के नवाबगंज स्थित बरईपुर रामनगर निवासी राजेश यादव उर्फ बबलू, इसी के घर से नीलू ड्रम में मिले रुपये।

प्रयागराज के नवाबगंज स्थित बरईपुर रामनगर निवासी राजेश यादव उर्फ बबलू, इसी के घर से नीलू ड्रम में मिले रुपये।

HighLights

  1. पुणे में एक विभाग ने की थी छापेमारी, राजेश के कमरे में कारोबारी ने छिपाया था काला धन

  2. राजेश यादव ने पिकअप वाहन से ड्रम, बोरे और कार्टून में भरकर अपने घर लाया था रुपये

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। गंगापार में नवाबगंज के बरईपुर रामनगर निवासी राजेश यादव उर्फ बबलू के पास इतने रुपये कहां से आए?, यही सवाल हर किसी के जेहन में है। सूत्रों की मानें तो जांच टीम को पता चला है कि राजेश यादव पुणे में जिस कारोबारी के यहां काम करता था, उसके यहां वर्ष 2021 में एक विभाग ने छापेमारी की थी। करोड़ों की बेनामी संपत्ति सामने आई थी। इसी छापेमारी के दौरान करोड़ों रुपये कारोबारी ने राजेश यादव के कमरे में छिपा दिया था, जिसे लेकर वह भाग आया था। यही नहीं, उस समय कारोबारी के पूछने पर उसने खुद के पकड़े जाने की बात बताई थी।

पुणे में कंपनी मालिक का करीबी बन गया था राजेश

राजेश यादव वर्ष 2010 में पुणे में काम करने गया था। वहां वह एक कंपनी में काम करने लगा। कुछ ही समय में वह अपने मालिक का करीबी बन गया। कंपनी के बगल ही उसे उसके मालिक ने रहने के लिए कमरा दिया। वर्ष 2018 में उसका भाई राकेश कुमार महाकाल और लवकुश पुणे गए तो राजेश ने दोनों को काम पर लगवा दिया, लेकिन दो वर्ष बाद ही दोनों वापस गांव लौट आए।

करोड़ों की बेनामी संपत्ति हुई थी बरामद

सूत्रों की मानें तो वर्ष 2021 में एक विभाग के अधिकारियों ने कारोबारी के प्रतिष्ठान, आवास समेत कई जगह छापेमारी की। इसमें करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्ति बरामद हुई थी। इसी दौरान मौका पाकर कारोबारी ने कंपनी के बगल किराये के कमरे में रहने वाले राजेश के पास करोड़ों रुपये रख दिए थे।

पुणे के कारोबारी के रुपये लेकर फरार हुआ था

कई दिनों तक विभाग की कार्रवाई चलती रही और कारोबारी उसी में फंसा रहा। एक तरफ यह सब चल रहा था तो दूसरी ओर राजेश ने रुपये हड़पने की पूरी साजिश रच डाली। दो पिकअप वाहनों के चालकों से घरेलू सामान लादकर प्रयागराज चलने की बात कही। इसके बाद नीले ड्रम, बोरे, कार्टून में उसने रुपये को भरा और वाहनों में लदवाकर निकल पड़ा।

कारोबारी बुलाता रहा लेकिन गया नहीं

इसके लिए उसने राजेश ने भाई महाकाल और लवकुश की मदद ली। यहां रुपये लेकर पहुंचा तो घर के भीतर ही गड्ढा खोदकर उसे छिपा दिया। सूत्रों का कहना है कि उधर पुणे में मामला ठंडा होने के बाद कारोबारी ने राजेश को फोन किया तो उसने बताया कि छापेमारी के दौरान उसे भी अधिकारियों ने पकड़ लिया था और रुपये जब्त कर लिए हैं। कारोबारी उसे वापस बुलाता रहा, लेकिन वह नहीं गया। मामला काला धन का था, इसलिए कारोबारी ने मामले की शिकायत भी पुलिस से नहीं की। इधर, समय बीतने के बाद राजेश ने रुपये को खर्च करना शुरू किया। जमीन समेत अन्य संपत्तियां अर्जित करनी शुरू कर दी।

गांव में सन्नाटा, हर आने-जाने वालों पर नजर

बरईपुर रामनगर गांव में दो दिन से सन्नाटा पसरा है। गांव के गिने-चुने लोग ही नजर आ रहे हैं। राजेश यादव के घर की तरफ आने-जाने वाले हर व्यक्ति पर नजर रखी जा रही है। उसके घर से करीब दो सौ मीटर पहले ही पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है, जो बाहरी लोगों को पूछताछ कर आगे जाने की अनुमति देते हैं। वहीं, गांव के लोग भी बहुत जरूरी काम होने पर ही उधर से गुजर रहे हैं। साथ ही कोई भी खुलकर कुछ बोलने को तैयार नहीं है।

ग्रामीणों के बीच रुपये लाने की थी सुगबुगाहट

पुणे से राजेश यादव के घर लौटने के करीब छह माह बाद जब उसने रुपये खर्च करने शुरू किए, तभी ग्रामीणों में सुगबुगाहट शुरू हो गई थी कि वह पुणे से किसी कारोबारी का रुपये उठा लाया है। हालांकि रुपये इतने होंगे, इस बारे में किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था।

अक्सर परिवार के सदस्य ग्रामीणों से मारपीट करते थे

कुछ ग्रामीणों ने बताया कि रुपये के दम पर ही वह और उसके परिवार के अन्य सदस्य आए दिन किसी न किसी को पीट देते थे। दो वर्ष पहले राम मनोहर यादव उर्फ गुल्लर से जमीन को लेकर विवाद हुआ था। मारपीट भी हुई थी। इधर, दो माह पहले पट्टीदार पूजा के स्वजन से भी पारिवारिक जमीन के बंटवारे को लेकर मारपीट हो गई थी। तीन दिन पहले गांव के अभिराज को पीट दिया था। ऐसी ही कई घटनाएं हुईं और वह यही धमकी देता था कि जहां होगा रुपये खर्च कर बच जाएगा।

बैंक खातों, आभूषणों के बारे में जुटाई जा रही जानकारी

पुलिस के साथ ही आयकर विभाग की टीम राजेश और उसके स्वजन के बैंक खातों, आभूषणों के बारे में जानकारी जुटा रही है। जमीन खरीद से संबंधित सभी दस्तावेजों को कब्जे में ले लिया गया है। वर्ष 2021 से अब तक राजेश और उसके स्वजन द्वारा अर्जित की गईं संपत्तियों का ब्योरा खंगाला जा रहा है। साथ ही उसके करीबी रिश्तेदारों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।

परिवार मां दुर्गा का भक्त, कराया था भंडारा

श्रृंगवेरपुर धाम ब्लाक के बरईपुर रामनगर गांव में घर के पास ही राजेश यादव दुर्गा मंदिर बनवा रहा है। इस मंदिर का लगभग डेढ़ माह पहले ही निर्माण शुरू कराया गया था। उस समय राजेश और उसके परिवार ने भंडारे का आयोजन कराया था। राजेश और उसके परिवार के लोग देवी के भक्त हैं। इसीलिए मां दुर्गा की मंदिर का निर्माण शुरू कराया गया।

विवाद के चलते मंदिर निर्माण रुक गया 

परिवार के लोगों ने बताया कि गांव के बाहर मुख्य मार्ग पर जब मार्केट का निर्माण शुरू कराया गया था, तभी मनौती मानी गई थी कि मार्केट के निर्माण होने पर मंदिर बनवाई जाएगी। बताते हैं कि घर के पास ही गांव के रास्ते पर बन रहे मंदिर की जमीन को लेकर नवरात्र के दौरान आसपास के लोगों से विवाद हो गया। इसके चलते निर्माण कार्य रुक गया। जबकि इसके पहले मंदिर निर्माण कार्य काफी तेजी से हुआ था, जिससे उसके पिलर और छत पड़ गई थी। अगले नवरात्र में मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम तय किया गया था।

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