भूख-प्यास से बेहाल काले हिरणों ने पकड़ी मध्य प्रदेश की राह, प्रयागराज के संरक्षित क्षेत्र में तेज गर्मी और चारे का संकट
प्रयागराज में भीषण गर्मी और चारे की कमी के कारण काले हिरण मध्य प्रदेश की ओर पलायन कर रहे हैं। ...और पढ़ें

प्रयागराज में मेजा के चांद खमरिया स्थित काले हिरणों के सरक्षित क्षेत्र में सूखा पड़ा तालाब। जागरण
HighLights
तेज धूप व गर्मी ने छीनी चांद खमरिया स्थित संरक्षित क्षेत्र की हरियाली
वन विभाग के बनवाए तालाब सूखे पड़े, शिकारियों व कुत्तों का भी खतरा
संसू, जागरण, खीरी (प्रयागराज)। अभी तो अप्रैल भी नहीं शुरू हुआ लेकिन गर्मी और तेज धूप ने यहां पर संरक्षित विलुप्तप्राय हो रहे काले हिरणों को बेहाल कर दिया है। संरक्षित क्षेत्र में दूर-दूर तक सिर्फ सूखी झांड़ियां और पत्थर ही नजर आ रहे हैं। भूख तो बेहाल कर ही रही है। प्यास भी तड़पा रही है। वन विभाग के तालाबों में भी धूल उड़ रही है। चारे-पानी के लिए हिरणों ने संरक्षित क्षेत्र छोड़ मध्य प्रदेश की तरफ रुख कर लिया है। इससे उनके शिकार का खतरा बढ़ गया है। कुत्तों के हमले का भी संकट खड़ा हो गया है।
मेजा का चांद खमरिया हिरनों का संरक्षित क्षेत्र
यमुनापार में मेजा तहसील क्षेत्र के चांद खमरिया में यह कृष्णमृग संरक्षित क्षेत्र है, जिसका क्षेत्रफल करीब 126 हेक्टेयर यानी 504 बीघे है। यह संरक्षित क्षेत्र चांद खमरिया के साथ ही बगल के गांव महुली तक फैला है। संकटग्रस्त प्रजातियों में गिने जाने वाले कृष्णमृग सहित 600 से अधिक हिरण यहां रहते हैं। सर्दी और बारिश के मौसम में तो इन्हें दिक्कत नहीं होती। वन विभाग ने थोड़ी-थोड़ी दूर पर आठ छोटे-छोटे तालाब बना रखे हैं, जो बारिश में पानी से लबालब हो जाते हैं। इलाके से गुजरी इटवा माइनर में भी पानी रहता है। हर तरफ हर तरफ घास ही घास होती है। न चारे का संकट होता है न पानी का।
शिकारियों व कुत्तों का खतरा
गर्मी के दिनों में स्थिति इसके ठीक विपरीत हो जाती है। इस बार भी कुछ ऐसे ही हालात हैं। राजेश सिंह पटेल, खेमराज, पप्पू पाल, विमल तिवारी आदि ग्रामीण बताते हैं कि अभी से संरक्षित क्षेत्र में हिरणों के चारे-पानी का संकट गहरा गया है। जहां हरियाली छटा बिखेरती थी, अब वहां दूर-दूर तक सूखी झाड़ियां दिखती हैं। पेट भरना तो दूर हिरण प्यास बुझाने तक को तरस रहे हैं। चांद खमरिया से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर मध्य प्रदेश की सीमा है। यूपी-एमपी के बार्डर से होकर लपरी नदी गुजरी है। चारे-पानी की तलाश में हिरणों ने संरक्षित क्षेत्र छोड़कर मध्य प्रदेश की तरफ रुख कर लिया है। इससे शिकारियों व कुत्तों का खतरा बढ़ गया है।
दो तालाब भरवाते थे, वह भी सूखे
वन विभाग की ओर से संरक्षित क्षेत्र में बनवाए गए आठ तालाबों में से दो को सबमर्सिबल पंप से भरवाया जाता था। अन्य तालाबों को भरवाने के लिए कोई खास इंतजाम नहीं है। इधर, तीन दिन पहले सबमर्सिबल पंप में खराबी आने के कारण दो तालाब भी नहीं भर पा रहे हैं। वन विभाग की ओर से यहां पर तैनात किए गए अफसर व कर्मचारी इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
क्या कहते हैं डीएफओ?
प्रयागराज के डीएफओ अरविंद कुमार का कहना है कि कृष्णमृग संरक्षित क्षेत्र में चारे-पानी की समस्या की जानकारी नहीं है। इसकी जांच कराई जाएगी। अगर कहीं कोई कमी है तो उसे दूर कराया जाएगा।
यह भी पढ़ें- जले मोबिल आयल का ईंधन बना छान रहे जलेबी और समोसा, प्रयागराज में गैस सिलेंडर की समस्या का खोज निकाला समाधान
यह भी पढ़ें- प्रयागराज जंक्शन पर 'लेडी नटवरलाल' गैंग का राजफाश, GRP ने सरगना समेत दो को दबोचा; मुंबई से दिल्ली तक फैला था जाल
