भागो-भागो, आग लगी... हो सकता है ब्लैकआउट! घबराएं नहीं, कल पूरे उत्तर प्रदेश में Mock Drill की तैयारी
प्रयागराज में भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच सुरक्षा मॉक ड्रिल की तैयारी! 7 मई को सायरन बजेंगे घायलों को ले जाया जाएगा। नागरिक सुरक्षा आपदा प्रबंधन पुलिस और फायर ब्रिगेड मिलकर युद्ध जैसी स्थिति में नागरिकों को सुरक्षित करने का अभ्यास करेंगे। यह केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर हो रहा है जिससे हवाई हमलों से बचाव का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। UP Mock Drill | पहलगाम (कश्मीर) में आतंकी घटना और उसके बाद भारत-पाकिस्तान के बीच हुई तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए सुरक्षा की दृष्टि से मॉकड्रिल की तैयारी है। सात मई को किसी भी सार्वजनिक और भीड़भाड़ वाले स्थान पर तेज आवाज में सायरन बजने लगे, अचानक स्ट्रेचर पर घायलों को उठाकर कर्मचारी एंबुलेंस की ओर भागते दिखें, भागो-भागो, चलो जल्दी से निकलो कहते हुए आपाधापी, सीटियां अनवरत बजती रहें और कहीं किसी जगह आग लगी मिले तो आपके लिए भी यह चौंकने वाली स्थिति होगी।
दरअसल सिविल डिफेंस, डिजास्टर मैनेजमेंट, पुलिस व फायर ब्रिगेड कर्मियों का एक ऐसा संयुक्त अभ्यास होने जा रहा है जिसमें दो देशों के बीच युद्ध होने पर नागरिकों को सुरक्षित करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय से हुए निर्देश के बाद सोमवार शाम से ही इस मॉकड्रिल के प्रति सक्रियता बढ़ गई। सिविल डिफेंस के वार्डेन, इसके तमाम आला नियंत्रकाें की मौजूदगी में यह आयोजन होना है।
उत्तर प्रदेश में भी मॉकड्रिल की पूरी तैयारी है। शासन स्तर से यूपी के 19 जगहों का चयन हुआ, जहां मॉकड्रिल की जानी है। हालांकि डीजीपी प्रशांत कुमार ने बताया है कि सुरक्षा की दृष्टि से पूरे प्रदेश में मॉकड्रिल की जाएगी।
शासन की ओर से जारी लिस्ट में इन जगहों के नाम शामिल
आगरा, प्रयागराज, बरेली, गाजियाबाद, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मथुरा, मेराठ, मुरादाबाद, सहारनपुर, वाराणसी, बख्शी का तालाब, मुगलसराय और सरसावां, बागपत, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर और गोरखपुर।
त्रिस्तरीय सुरक्षा का होगा अभ्यास
भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध शीघ्र ही शुरू होने के आसार जताए जा रहे हैं। इसके देखते हुए हवाई हमलों से नागरिकों को बचाने का प्रशिक्षण मॉकड्रिल में दिया जाएगा। कब कहां और कैसे सायरन बजाना है, कहीं अप्रिय घटना होने या आग लगने पर नागरिकों को उसके प्रभाव से बचाते हुए कैसे और कहां सुरक्षित स्थान पर ले जाना है, हवाई हमले में कहीं किसी की मृत्यु हो जाती है तो उसे फौरन जिला प्रशासन की ओर से निर्धारित स्थान पर ले जाने, किसी भवन या अपार्टमेंट आदि में आग लगने, ऊंची इमारत के गिरने की स्थिति में राहत कार्यों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
हमलों के समय आग लगने, नागरिक सुविधाओं को जारी रखने, बम निरोधक दस्ते का सहयोग, स्वास्थ्य सेवाएं त्वरित उपलब्ध कराने समेत अन्य जरूरी सेवाओं को मौके पर लागू करने की मॉकड्रिल होगी। ब्लैक आउट होने की स्थिति में उठाए जाने जाने वाले सभी जरूरी कदम, नागरिकों तक संदेश पहुंचाने और नागरिकों के दायित्व की जानकारी दी जाएगी।
बनता है कंट्रोल रूम, वायुसेना से आते हैं संदेश
युद्ध के समय शहर में सिविल डिफेंस की ओर से एक कंट्रोल रूम बनाए जाने की व्यवस्था रहती है। इसमें चीफ वार्डेन ऑफिसर कमांडिंग बैठते हैं। साइमेंटिनियस ब्राड कास्टिंग सिस्टम लगाया जाता है जो वायु सेना के कंट्रोल रूप से हाट लाइन पर जुड़ता है। इसमें वायु सेना की ओर से संदेश बराबर आते रहते हैं, दुश्मन देश के लड़ाकू जहाज कहां किस तरफ से आ रहे हैं, कहां नगरीय इलाकों में हवाई हमले की आशंका है, इस तरह के संदेश कंट्रोल रूम को वायुसेना देती है।
उस दौरान कंट्रोल रूप से एक साथ 35 फोन लाइन पर संदेश चलते हैं। जब हमले की संभावना खत्म हो जाती है तब सिविल डिफेंस के वार्डेंन धीरे-धीरे नागरिक सुविधाओं और अन्य प्रबंधन के कार्य करते हैं।
जिलाधिकारी के साथ मंगलवार को बैठक होनी है। उसमें तय होगा कि मॉक ड्रिल का स्थान और स्वरूप क्या होगा। सभी जरूरी बातों और सुरक्षात्मक कदम का ध्यान रखते हुए मॉकड्रिल करेंगे।
-अनिल कुमार गुप्ता अन्नू, चीफ वार्डेन आफिसर कमांडिंग
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