MahaKumbh: इतना पूछते ही भड़के नागा संन्यासी, लोहे का स्टूल उठाकर पटका; मेडिकल रूम में मची भदगड़
महाकुंभ नगर के केंद्रीय अस्पताल में एक नागा संन्यासी ने आकस्मिक कक्ष में गुस्से में स्टूल पटककर हंगामा मचा दिया जिससे भगदड़ का माहौल बन गया। पुलिस ने उन्हें अस्पताल से बाहर निकाला। संन्यासी समर गांगुली जो पहले विदेशों में शानदार करियर और 12 लाख रुपये सालाना पैकेज पर काम करते थे ने फ्रेंच जर्मन और नेपाली जैसी भाषाओं में महारत हासिल की।
जागरण संवाददाता, महाकुंभ नगर। केंद्रीय अस्पताल में गुरुवार को एक नागा संन्यासी अचानक क्रोधित हो उठे। आकस्मिक कक्ष में पहुंचकर उन्होंने लोहे का स्टूल उठाकर पहले बेड पर पटका फिर आकस्मिक चिकित्साधिकारी की कुर्सी के पास हमला किया। इस दौरान स्वास्थ्य कर्मियों, मरीजों पर खतरा उत्पन्न हो गया। डाक्टरों से सूचना मिलने पर पुलिस कर्मी पहुंच गए। उन्होंने नागा संन्यासी को अस्पताल से बाहर निकाला और अपने साथ ले गए।
दिन में करीब 11 बजे आकस्मिक चिकित्सा कक्ष में गए नागा संन्यासी से स्वास्थ्य कर्मियों ने पूछा कि परेशानी क्या है। इतना सुनते ही उन्होंने स्टूल उठाकर पटकना शुरू कर दिया। चिकित्साधिकारी के मेज पर, कुर्सी के पास प्लाईवुड से बनी दीवार पर स्टूल फेंका। इससे वहां भगदड़ मच गई। अस्पताल के चिकित्साधीक्षक डा. मनोज कुमार कौशिक ने बताया कि बाबा ने अपनी बीमारी नहीं बताई और गुस्से में आ गए। पुलिस कर्मी उन्हें अपने साथ ले गए।
विश्व भ्रमण किया, सात भाषाएं सीखीं और बन गए संन्यासी
महाकुंभ में अखाड़ों की ओर जाने वाली सड़क के किनारे बैठे तंबुओं में बैठे नागा संन्यासियों, श्रद्धालुओं की उमड़ती भीड़, कैमरे और साक्षात्कार से दूर एक युवा संन्यासी आनंद की स्थिति में रेत पर लेटा हुआ। वह किसी ऐसी भाषा में बुदबुदा रहा था, जो समझ से परे थी। इस साधु के बारे में जानने की उत्सुकता और जिज्ञासा दोनों के मिश्रित भाव से अभिवादन के बाद मिली जानकारी ने लगभग चौंका दिया।
समर गांगुली बाबा।-जागरण
वह फ्रेंच में धारा प्रवाह अपने किसी अनुयायी से फोन पर बात कर रहे थे। यह हैं अहमदाबाद के समर गांगुली, जिन्होंने विदेश की नौकरी छोड़ी। फ्रेंच, जर्मन, इंग्लिश और नेपाली में प्रवीण बने और फिर संन्यास ले लिया। समर गांगुली ने अपनी शिक्षा अहमदाबाद में पूरी की और उसके बाद हार्डवेयर और नेटवर्किंग में डिप्लोमा किया। उनकी योग्यता और मेहनत ने उन्हें इंपोर्ट-एक्सपोर्ट के क्षेत्र में एक शानदार करियर दिया।
वेस्ट अफ्रीका, अमेरिका, ब्रिटेन और यूएई समेत 10 से अधिक देशों में उन्होंने काम किया और नई-नई जगहों का अनुभव लिया। उनकी नौकरी का पैकेज 12 लाख रुपये प्रति वर्ष तक था, जो एक साधारण युवा के लिए सपने जैसा होता है। लेकिन इस सफलता और पूरी दुनिया घूमने के बावजूद उनका मन अशांत था। वह भौतिक सुखों में आत्मिक शांति की कमी महसूस कर रहे थे।
भाषाओं का ज्ञान और वैश्विक अनुभव पर गांगुली बताते हैं कि दुनिया के विभिन्न देशों में काम करते हुए उन्होंने कई भाषाओं का ज्ञान अर्जित किया। अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, और नेपाली भाषा में पारंगत बना। गुजराती और हिंदी भी काफी अच्छे से बोलते हैं। इस बहुभाषीय क्षमता ने उन्हें विभिन्न संस्कृतियों को समझने और उनके साथ घुलने-मिलने में मदद की।
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