यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 26, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Maha Kumbh Mela 2025: जयकारों के बीच अग्नि अखाड़ा का छावनी प्रवेश, पुष्पवर्षा से हुआ जोरदार स्वागत; देखें तस्वीरें
Maha Kumbh Mela 2025 श्री पंच अग्नि अखाड़ा की पेशवाई शुरू हो गई है और संत महाकुंभ मेला क्षेत्र में ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, महाकुंभनगर। Prayagraj MahaKumbh Mela 2025: श्री पंच अग्नि अखाड़ा का छावनी प्रवेश (पेशवाई) आरंभ हो गया है। अखाड़ा के संतों ने चौफटका स्थित अनंत माधव मंदिर में पूजन किया। पूजन के बाद यात्रा आरंभ हो गई है। महामंडलेश्वर संपूर्णानंद, सोमेश्वरानंद, वीरेंद्रानंद, शुक्लानंद रथ पर रखे चांदी के सिंहासन में विराजमान होकर चल रहे हैं।
जयकारा लगाते व पुष्पवर्षा करते हुए भक्तों का कारवां साथ-साथ बढ़ रहा है। यात्रा विभिन्न मार्गों से होते हुए महाकुंभ मेला क्षेत्र में प्रवेश करेगी। पहुंचेगी। त्रिवेणी बांध से यात्रा पांटून पुल पार करके सेक्टर 20 स्थित अखाड़ा नगर में प्रवेश करेगी। वहां अखाड़ा के शिविर में प्रवेश करके संत अपना डेरा जमाएंगे।

Mahakumbh 2025: श्री पंच अग्नि अखाड़ा का छावनी प्रवेश (पेशवाई) आरंभ। जागरण
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तंबुओं की नगरी में विराजेंगे भगवान वेंकटेश्वर स्वामी
MahaKumbh Mela दुनिया का सबसे अमीर मंदिर ट्रस्ट तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) भी संगमतीरे महाकुंभ का साक्षी बनेगा। इसके लिए नागवासुकि सेक्टर छह में 2.5 एकड़ में शिविर निर्माण का कार्य शुरू कर दिया गया है। शिविर का निर्माण करने के लिए आंध्र प्रदेश के कारीगर पहुंच चुके हैं। शिविर में भगवान विष्णु के दशावतारों में एक भगवान वेंकटेश्वर स्वामी (बालाजी) की आठ फीट की प्रतिमा की प्रतिकृति रखी जाएगी।
इसे आंध्र प्रदेश के कारीगर बनाएंगे। तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) टी. रवि ने बताया कि भगवान वेंकटेश्वर स्वामी के प्रतिमा की प्रतिकृति के बगल मां पद्मावती की दो फीट की प्रतिमा भी रखी जाएगी। इसे ट्रस्ट के पदाधिकारी मेला शुरू होने से पहले 10 जनवरी तक शिविर में लेकर आएंगे।

Mahakumbh 2025: श्री पंच अग्नि अखाड़ा का छावनी प्रवेश (पेशवाई) आरंभ। जागरण
शिविर में बालाजी के मंदिर का निर्माण और आभूषण व अन्य निर्माण सामग्री तिरुपति के कारीगर करेंगे। सभी सामग्रियां ट्रकों से तिरुपति से मेला क्षेत्र में पहुंचेंगी। मेला की अवधि में पालकी शोभायात्रा निकाली जाएगी। प्रमुख शाही स्नान पर्वों को छोड़कर अन्य दिनों में दोनों प्रतिमाओं की पालकी शोभायात्रा भी निकाली जाएगी।
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इसे संगम दर्शन के लिए भी ले जाया जाएगा। मेला की अवधि में श्रद्धालुओं को प्रतिमाओं का दर्शन करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। शिविर में श्रद्धालुओं को मुफ्त में प्रसादम दिया जाएगा। इसके अलावा यहां पर सुबह से शाम तक सुप्रभातम, अर्चना, तोमाला सेवा, कल्याणोत्सव जैसे तमाम कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। जनवरी के पहले सप्ताह में अन्य सुविधाओं पर फैसला लिया जाएगा।
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MahaKumbh Mela: तिरुपति बालाजी और मां पद्मावती। साभार: सीपीआरओ
आंध्र प्रदेश में है भव्य मंदिर
भगवान वेंकटेश्वर स्वामी यानी बालाजी का पवित्र मंदिर आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले के पहाड़ी शहर तिरुमाला में स्थित है। यह भगवान विष्णु के अवतार वेंकटेश्वर को समर्पित है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान वेंकटेश्वर मानवता को "कलियुग" की कठिनाइयों और क्लेशों से मुक्ति दिलाने के लिए पृथ्वी पर अवतरित हुए थे। इस अवधारणा के अनुसार इस क्षेत्र को कलियुग वैकुंठम के रूप में जाना जाता है। भगवान को कलियुग प्रत्यक्ष दैवम के रूप में जाना जाता है।