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    UP Lok Sabha Election: नहीं बनी रोड, नहीं पड़ेगा वोट वाले गांव में खटाखट वोट, 2014 कर दिया था मतदान का बहिष्‍कार

    Updated: Sun, 26 May 2024 01:15 PM (IST)

    प्राइमरी स्कूल में बने मतदान केंद्र में लाइन लगाकर लोग मतदान के लिए अपनी बारी का इंतजार करते मिले। उनके जोश की बानगी मतदान केंद्र पर पड़े मतदान प्रतिशत से झलक रही थी। आसपास के मतदान केंद्रों पर 11.30 बजे तक मतदान की रफ्तार धीमी थी वहीं प्राथमिक विद्यालय सराय अभय उर्फ चंदौकी में बने मतदान केंद्र पर कुल 1060 मतदाताओं में से 40 प्रतिशत मतदान हो चुका था।

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    सराफ अभय उर्फ चंदौकी के ग्रामीणों ने मतदान को लेकर उत्साह दिखाया।

     जागरण संवाददाता, प्रयागराज। लोकसभा संसदीय क्षेत्र फूलपुर में इसी नाम वाले विधानसभा क्षेत्र का सराय अभय उर्फ चंदौकी गांव। इस गांव की कोई और खास पहचान नहीं, मगर इसे वर्ष 2014 लोकसभा चुनाव बहिष्कार के लिए जाना जाता है। नहीं बनी रोड, नहीं पड़ेगा वोट का नारा बुलंद करने वाले इस गांव में शनिवार को खटाखट वोट पड़े। पूरे गांव में उत्सव का माहौल था।

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    प्राइमरी स्कूल में बने मतदान केंद्र में लाइन लगाकर लोग मतदान के लिए अपनी बारी का इंतजार करते मिले। उनके जोश की बानगी मतदान केंद्र पर पड़े मतदान प्रतिशत से झलक रही थी। आसपास के मतदान केंद्रों पर 11.30 बजे तक मतदान की रफ्तार धीमी थी, वहीं प्राथमिक विद्यालय सराय अभय उर्फ चंदौकी में बने मतदान केंद्र पर कुल 1060 मतदाताओं में से 40 प्रतिशत मतदान हो चुका था।

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    कुछ मत देकर पास के एक घर के सामने गप मारने में जुटे थे। जागरण टीम से बातचीत में जैसे ही वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव का जिक्र आया, फट से अरुण कुमार मौर्य बोल पड़े- हां, भइया हम सबै मतदान का बहिष्कार किए थे। क्या बताएं कई साल से गांव से मुख्य मार्ग जाने के लिए सड़क नहीं बन रही थी, हर बार हम सबको आश्वासन की घुट्टी पिला दी जाती।

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    कहा कि विवाह और अन्य कार्यक्रम में कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था, आज भी याद कर मन दुखी हो जाता है। कुछ रिश्तेदार इसके लिए ताना भी मारते थे। बच्चों को स्कूल जाने और महिलाओं को बाहर ले जाने में दिक्कतें आतीं थीं। लोकसभा का चुनाव हो या फिर विधानसभा का, प्रत्याशी वादा करके चले जाते, फिर पांच साल तक कोई सुध नहीं लेते। उनके बगल बैठे हरिश्चंद्र यादव, अशर्फी लाल पटेल, धर्मराज पटेल व सौरभ लाल पटेल ने हामी भरी।

    बताया 2014 में हम सभी ने मतदान नहीं किया, तत्कालीन डीएम गांव आए और उनके काफी प्रयास के बाद भी महज 13 वोट पड़े थे। हालांकि हमें मतदान के महत्व का भान है, गांव में दो किलोमीटर लंबी रोड बन गई और सिकंदरा मार्ग से इसे मिला दिया गया। पूरे गांव में इस बार मतदान के लिए होड़ लगी है।

    अशर्फी लाल पटेल और उनके साथियों ने बाएं हाथ की तर्जनी पर लगे स्याही निशान को गर्व से दिखाते हुए कहा- लोकतंत्र के पर्व में पहले मतदान, फिर जलपान वाले वादे को गांव वालों ने निभा दिया है।