Chabi Baba की कमर पर छह सालों से बंधा है ताला, जटा-जूट बाबा की जटाओं से झुक जाती है गर्दन- ऐसे करते हैं देखभाल
महाकुंभ में अजब-गजब बाबाओं का संगम देखने को मिल रहा है। हरियाणा से 800 किलोमीटर पैदल आने वाले डंडा बाबा और चाबी वाले बाबा कबीरा जो छह वर्षों से ताला बांधे हुए हैं अपनी भक्ति की अनोखी कहानी सुनाते हैं। वहीं जटा-जूट बाबा अमित पुरी अपनी छह फीट लंबी जटाओं के साथ जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति की साधना में लीन हैं।

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। महाकुंभ में अजब-गजब बाबाओं का संगम देखने को मिल रहा है। कोई हरियाणआ से 800 किलोमीटर पैदलकर चलकर महाकुंभ पहुंचा है तो किसी ने अपनी कमर पर छह वर्षों से एक ताला बांधा हुआ है। सभी की अपनी कहानी है और मन में है ईश्वर की भक्ति।
कबीरा बाबा, जिन्हें लोग ''चाबी वाले बाबा'' के नाम से जानते हैं, अपने ताले की साधना के कारण चर्चित हैं। 17 वर्ष की आयु में घर छोड़कर संन्यास धारण करने वाले कबीरा बाबा वर्तमान में ताला बाबा दिगंबर अजीत अटल अखाड़ा से जुड़े हैं।
चाबी बाबा देते हैं कर्म के माध्यम से भाग्य निर्माण का संदेश
उन्होंने अपनी कमर पर छह वर्षों से एक ताला बांधा हुआ है और संकल्प लिया है कि इसे या तो 12 साल बाद या 21 साल बाद तोड़ेंगे। उनका संदेश है कि "अच्छे कर्म करो, बदलाव आएगा। कर्म से भाग्य खुल जाएगा। उनका यह प्रतीकात्मक प्रयोग आध्यात्मिक चेतना के साथ-साथ कर्म की महत्ता पर बल देता है।
छह फीट लंबी जटाओं के साथ साधना करते हैं जटा-जूट बाबा
जटा-जूट बाबा के नाम से पहचाने जाने वाले दिगंबर अमित पुरी जी निरंजनी अखाड़ा से जुड़े हैं। अपनी छह फीट लंबी जटाओं के लिए प्रसिद्ध हैं। वे बताते हैं कि बाल्यावस्था में ही सन्यास धारण करने के बाद से उन्होंने अपने बाल कभी नहीं कटवाए। उनकी जटाएं इतनी भारी हो चुकी हैं कि इससे उनकी गर्दन झुक जाती है।
वे बालों की देखभाल के लिए मुल्तानी मिट्टी, आंवला, रीठा, शिकाकाई का उपयोग करते हैं और जूं से बचाव के लिए नारियल तेल व कपूर लगाते हैं। मूल रूप से केदारनाथ से आए जटा-जूट बाबा कहते हैं कि वे जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति के लिए इस साधना में लीन हैं।
विश्व शांति दिवस के रूप में मनाई जाएगी ब्रह्मा बाबा पुण्यतिथि
नारी शक्ति के सबसे विशाल संगठन की नींव रखने वाले ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के संस्थापक ब्रह्मा बाबा की 56वीं पुण्यतिथि शनिवार को विश्व शांति दिवस के रूप में मनाई जाएगी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य रहेंगे।
इस दौरान ब्रह्माकुमारीज प्रयागराज की संचालिका ब्रह्माकुमारी मनोरमा दीदी के निर्देशन में बड़ी संख्या में लोग उपस्थित होकर राजयोग ध्यान की साधना और विश्व शांति की कामना करेंगे। बताया गया है कि 18 जनवरी 1969 को 93 वर्ष की आयु में ब्रह्माकुमारीज़ के साकार संस्थापक ब्रह्मा बाबा ने संपूर्णता की स्थिति प्राप्त कर अव्यक्त हो गए थे।
उनके अव्यक्त होने के बाद संस्थान की बागडोर पूर्व मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि ने संभाली। बाबा की त्याग-तपस्या का परिणाम रहा कि खुद पीछे रहकर नारी शक्ति को आगे बढ़ाया और पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति अध्यात्म का परचम फहराया।
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