बिना झटके रुकेगी पूरी मालगाड़ी, सामान का नुकसान नहीं होगा; रेलवे ने ब्रेक सिस्टम में लागू किए नए नियम
भारतीय रेलवे ने मालगाड़ियों के ब्रेक सिस्टम में नए नियम लागू किए हैं, जिससे अब वे बिना झटके और नियंत्रित ...और पढ़ें

मालगाड़ी। जागरण आर्काइव
HighLights
मालगाड़ी के डिस्ट्रिब्यूटर वाल्व को मिला यूनिक नंबर
अचानक ब्रेक लगने से अब माल का नहीं होगा नुकसान
अमरीश मनीष शुक्ला, प्रयागराज। भारतीय रेल की पटरियों पर दौड़ने वाली भारी-भरकम मालगाड़ियां अब बिना किसी झटके के एक साथ और नियंत्रित अंदाज में रुकेंगी। अचानक ब्रेक लगने से होने वाले तेज झटकों, पहियों के जाम होने (ब्रेक बाइंडिंग) और माल के नुकसान पर रोक लगाने के लिए रेलवे बोर्ड ने बड़ा कदम उठाया है।
रेलवे ने मालगाड़ियों के ब्रेक सिस्टम के सबसे अहम हिस्से यानी डिस्ट्रिब्यूटर वाल्व (डीवी) के लिए स्थायी ''यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर'' (यूआईएन) अनिवार्य कर दिया है। इस तकनीकी निगरानी से झटकों के कारण वैगनों में लदे सामान के नुकसान में 20 से 30 प्रतिशत तक की कमी आएगी।
मालगाड़ी में 50 से अधिक डिब्बे होते हैं। पहियों तक हवा का दबाव पहुंचाने का काम हर डिब्बे के नीचे लगा डिस्ट्रिब्यूटर वाल्व करता है। पहले वाल्वों की कोई अलग डिजिटल पहचान नहीं होती थी। मरम्मत के दौरान वाल्व बदले जाते थे, लेकिन उनका पिछला रिकार्ड न होने से यह पता लगाना मुश्किल था कि खराबी किस कारखाने या डिपो की लापरवाही से हुई। इससे आगे-पीछे के डिब्बों में ब्रेक का दबाव असमान रहता था और तेज झटकों से सीमेंट, खाद्यान्न, आटोमोबाइल और इलेक्ट्रानिक्स जैसे माल को भारी क्षति पहुंचती थी।
रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक (मैकेनिकल इंजीनियरिंग/ फ्रेट) लाेकेश सिंह के अनुसार अब हर वाल्व को स्थायी यूनीक नंबर दिया जाएगा। नए वाल्वों पर इसी महीने से और सेवा में लगे पुराने वाल्वों पर एक नवंबर से मरम्मत के दौरान यह नंबर दर्ज होगा। इसे ''फ्रेट मेंटेनेंस मैनेजमेंट'' (एफएमएम) साफ्टवेयर से जोड़ा जा रहा है, जिससे हर वाल्व की पूरी डिजिटल कुंडली उपलब्ध रहेगी। सभी डिब्बों में एक साथ ब्रेक लगने से माल सुरक्षित रहेगा और रेलवे के क्लेम घटेंगे।
