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    Sports News : खेतों में काम करती थी बबिता, अब अमेरिका में दो पदक जीत कर रचा इतिहास, कैसे पहुंची USA

    Updated: Fri, 04 Jul 2025 05:07 PM (IST)

    प्रयागराज के छोटे से गाँव की बबिता पटेल ने अपनी मेहनत से वर्ल्ड पुलिस एथलेटिक्स प्रतियोगिता में कांस्य और रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। किसान परिवार में जन्मी बबिता ने खेल सुविधाओं के अभाव के बावजूद हार नहीं मानी। उन्होंने हाई जंप में 1.30 मीटर की छलांग लगाकर कांस्य पदक जीता। हेप्टाथलॉन में रजत पदक हासिल किया।

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    प्रयागराज की बबिता पटेल ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन किया है।

    जागरण संवाददाता, प्रयागराज। प्रयागराज के छोटे से गांव तिली का पूरा अब्दालपुर मऊआइमा सोरांव की बबिता पटेल ने अपनी कड़ी मेहनत, सच्ची लगन और दृढ़ संकल्प के दम पर न केवल राष्ट्रीय, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन किया है। हाल ही में अमेरिका के बर्मिंघम शहर में आयोजित वर्ल्ड पुलिस एथलेटिक्स प्रतियोगिता में बबिता ने हाई जंप में 1.30 मीटर की छलांग लगाकर कांस्य पदक और हेप्टाथलॉन में रजत पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल उनके गांव, बल्कि पूरे देश को गर्व का अहसास कराया है। बबिता की कहानी एक साधारण परिवार की बेटी की असाधारण उपलब्धियों की कहानी है, जो संघर्ष, मेहनत और सपनों के पीछे की दृढ़ता का प्रतीक है।

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    खेतों से निकलकर विश्व मंच तक का सफर 

    बबिता पटेल का जन्म प्रयागराज के मऊआइमा विकास खंड के तिली का पूरा अब्दालपुर गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ। उनके पिता राम निवास एक मेहनती किसान हैं, जो खेतों में दिन-रात मेहनत कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। बबिता खुद पिता के साथ खेत में कम करती थी। माता सावित्री देवी ने हमेशा बबिता के सपनों को पंख देने में उनकी हौसला-अफजाई की। बबिता के परिवार में आर्थिक तंगी के बावजूद शिक्षा और खेल के प्रति उत्साह हमेशा रहा। गांव के खेत-खलिहानों में खेलते हुए बबिता ने बचपन से ही एथलेटिक्स के प्रति रुचि विकसित की। उनकी इस रुचि को उनके कोच घनश्याम यादव ने निखारा और उन्हें एक उम्दा एथलीट बनने के लिए प्रेरित किया।

    आर्थिक तंगी ने खड़ी की बाधा 

    बबिता की शुरुआती जिंदगी आसान नहीं थी। गांव में खेल सुविधाओं का अभाव और आर्थिक तंगी ने उनके रास्ते में कई बाधाएं खड़ी कीं। लेकिन, बबिता ने कभी हार नहीं मानी। उनके पिता राम निवास बताते हैं, "बबिता बचपन से ही जिद्दी थी। जब उसने ठान लिया कि उसे खेल में कुछ करना है, तो हमने भी उसका साथ दिया।" मां सावित्री देवी के लिए बबिता की हर जीत गर्व का क्षण है। वे कहती हैं, "हमारी बेटी ने हमें गर्व से सिर ऊंचा करने का मौका दिया।"

    बर्मिंघम में किया शानदार प्रदर्शन

    अमेरिका के बर्मिंघम शहर में आयोजित वर्ल्ड पुलिस एथलेटिक्स प्रतियोगिता में बबिता ने अपने प्रदर्शन से सभी का ध्यान खींचा। गुरुवार को हाई जंप में 1.30 मीटर की छलांग लगाकर उन्होंने कांस्य पदक हासिल किया। इससे एक दिन पहले बुधवार को हेप्टाथलॉन में रजत पदक जीतकर उन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया। बबिता ने दैनिक जागरण से बातचीत में बताया, "मैं आगामी 6 जुलाई को पोल वॉल्ट प्रतियोगिता में भी हिस्सा लूंगी और देश के लिए एक और पदक जीतने की पूरी कोशिश करूंगी।" उनकी इस उपलब्धि पर सांसद प्रवीण सिंह पटेल, एमएलसी सुरेंद्र चौधरी और पूर्व विधायक सत्यवीर मुन्ना ने उन्हें बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

    उपलब्धियों का स्वर्णिम सफर

    बबिता पटेल का खेल करियर शानदार उपलब्धियों से भरा हुआ है। वर्तमान में दिल्ली में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में हवलदार के पद पर तैनात बबिता ने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का परचम लहराया है। नवंबर 2024 में नई दिल्ली में आयोजित ऑल इंडिया पुलिस एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने पोल वाल्ट में स्वर्ण पदक जीता। इससे पहले, अगस्त 2023 में कनाडा में आयोजित वर्ल्ड पुलिस गेम्स में 3.52 मीटर की छलांग लगाकर उन्होंने स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। बबिता की अन्य उल्लेखनीय उपलब्धियों में लखनऊ में आयोजित आल इंडिया पुलिस गेम्स में पोल वाल्ट में स्वर्ण, ओडिशा के भुवनेश्वर में खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में स्वर्ण, गुवाहाटी में यूथ नेशनल चैंपियनशिप में रजत और पंजाब के पटियाला में सीनियर इंटर स्टेट प्रतियोगिता में कांस्य पदक शामिल हैं। ये सभी उपलब्धियां बबिता की मेहनत और उनके कोच घनश्याम यादव के मार्गदर्शन का परिणाम हैं।

    परिवार है बबिता की ताकत

    बबिता की सफलता के पीछे उनके परिवार का अटूट समर्थन रहा है। पिता राम निवास और माता सावित्री देवी ने हमेशा बबिता के सपनों को प्राथमिकता दी। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने बबिता की ट्रेनिंग और खेल सुविधाओं के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। बबिता की बड़ी बहन रीता बताती हैं, "बबिता हमेशा से मेहनती थी। जब हम खेतों में काम करते थे, तब भी वह समय निकालकर प्रैक्टिस करती थी।" बबिता के छोटे भाई अजय का कहना है, "दीदी की जीत हम सभी के लिए प्रेरणा है। हम चाहते हैं कि वह और ऊंचाइयों को छुएं।"

    कोच घनश्याम यादव हैं बबिता के मार्गदर्शक

    बबिता अपनी सफलता का श्रेय अपने कोच घनश्याम यादव को भी देती हैं। घनश्याम यादव ने बबिता की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें हाई जंप, हेप्टाथलॉन और पोल वॉल्ट जैसे कठिन खेलों में पारंगत किया। बबिता कहती हैं, "मेरे कोच ने मुझे हर कदम पर प्रेरित किया। उनकी ट्रेनिंग और विश्वास ने मुझे यहां तक पहुंचाया।"

    एथलीटों के लिए बनी प्रेरणा

    बबिता पटेल की कहानी न केवल उनके गांव तिली का पूरा अब्दालपुर, बल्कि पूरे देश की उन बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखती हैं। एक साधारण किसान परिवार से निकलकर विश्व मंच पर देश का नाम रोशन करने वाली बबिता ने साबित कर दिया कि मेहनत और लगन के सामने कोई बाधा टिक नहीं सकती। उनकी उपलब्धियां उन युवाओं को प्रेरित करती हैं, जो खेल के क्षेत्र में अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं।

    भविष्य की योजनाएं

    बबिता का अगला लक्ष्य 6 जुलाई 2025 को बर्मिंघम में होने वाली पोल वॉल्ट प्रतियोगिता में पदक जीतना है। वे कहती हैं, "मैं अपने देश के लिए और पदक जीतना चाहती हूं। मेरा सपना है कि मैं ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करूं।" बबिता की इस महत्वाकांक्षा को देखकर उनके कोच और परिवार को पूरा विश्वास है कि वह भविष्य में और भी बड़ी उपलब्धियां हासिल करेंगी।

    बोले क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी

    क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी प्रेम कुमार ने बताया कि मऊआइमा की बबिता पटेल की कहानी मेहनत, लगन और परिवार के समर्थन की जीवंत मिसाल है। खेतों से निकलकर विश्व मंच तक का उनका सफर हर उस व्यक्ति को प्रेरित करता है, जो अपने सपनों को हकीकत में बदलना चाहता है। बबिता की उपलब्धियां न केवल उनके परिवार और गांव के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय हैं। उनकी यह यात्रा हमें सिखाती है कि अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी मंजिल असंभव नहीं है।