भारत को रोबोटिक्स हब बनाने की राह प्रशस्त करेंगे तीन IIIT
भारत रोबोटिक्स के क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है। देश की तीन प्रमुख IIIT- प्रयागराज दिल्ली और हैदराबाद- मिलकर भारत को रोबोटिक्स हब बनाने की दिशा में काम कर रही हैं। इन संस्थानों के वैज्ञानिकों ने यूरोपीय संघ द्वारा वित्तपोषित आइरिस-हब परियोजना के तहत इटली और पोलैंड में गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया है। अब वे देश के उद्योग और शैक्षणिक क्षेत्र के विशेषज्ञों को प्रशिक्षित करेंगे।

मृत्युंजय मिश्र, जागरण, प्रयागराज। वह दिन दूर नहीं जब भारत भी रोबोटिक्स के क्षेत्र में जापान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी और सिंगापुर जैसे देशों के साथ कदमताल करेगा। कृषि, चिकित्सा और सुरक्षा से लेकर घरों के काम काज में उपयोग किए जाने वाले रोबोट तैयार होंगे।
इस सपने को सच करने के लिए देश की तीन IIIT एक साथ काम करते हुए भारत को रोबोटिक्स हब बनाएंगे। पहले प्रशिक्षण, फिर अनुसंधान और इसके आगे नवोन्मेष तक का सफर तय होगा।
यूरोपीय संघ द्वारा वित्तपोषित आइरिस-हब परियोजना में शामिल आइआइआइटी प्रयागराज, दिल्ली और हैदराबाद के विज्ञानियों ने इटली और पोलैंड में दो-सप्ताह के गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा कर लिया है। अब देश के उद्योग और शैक्षणिक क्षेत्र के विशेषज्ञों को प्रशिक्षित करने का कार्य होगा।
यूरोपीय संघ ने भारत में रोबोटिक्स के विस्तार के लिए आइआइआइटी प्रयागराज, दिल्ली और हैदराबाद को आठ करोड़ रुपये की एक परियोजना सौंपी है।
इसके मुख्य अन्वेषक आइआइआइटी दिल्ली के डॉ. जैनेंद्र शुक्ला तथा आइआइआइटी प्रयागराज के प्रो. वृजेंद्र सिंह सह अन्वेषक हैं।
पौलेंड में रोबोट तकनीक के प्रशिक्षण के दौरान प्रो. वृजेंद्र सिंह। सौ. स्वयं
प्रशिक्षण का पहला चरण जून में इटली की यूनिवर्सिटी डेगली स्टडी डी जेनोवा और पोलैंड की वारसा यूनिवर्सिटी आफ टेक्नोलाजी में हुआ। इसमें विज्ञानियों को ऐसे रोबोटिक सिस्टम विकसित करने के लिए प्रशिक्षित किया गया, जो जटिल कार्यों को सटीकता और दक्षता के साथ करने में सक्षम हों।
इसके साथ ही स्वायत्त रोबोट बनाने के लिए महत्वपूर्ण मोबाइल रोबोटिक्स और रोबोट प्रोग्रामिंग का भी प्रशिक्षण मिला। प्रशिक्षण का पहला चरण पूरा हो गया है और अब दूसरे चरण का गहन प्रशिक्षण अक्टूबर में ग्रीस और स्पेन में होगा। अब तीनों आइआआइटी एक हब की तरह पूरे देश को कवर कर प्रशिक्षण और अनुसंधान को आगे बढ़ाएंगी।
उद्योगों से लेकर घरों के लिए तैयार होंगे इंटेलीजेंट रोबोट
तीनों आइआइआइटी रोबोटिक्स के अलग-अलग क्षेत्रों में प्रशिक्षण और अनुसंधान के साथ मिलकर भी काम करेंगे। कृषि, चिकित्सा, उद्योग, हाऊस होल्ड के लिए इंटेलीजेंट रोबोट तैयार होंगे। घरों में ऐसे रोबोट होंगे तो इंसानों की तरह वार्तालाप और काम कर सकेंगे।
जेनेवा में ह्यूमन रोबोट की तकनीक को भी आइआइआइटी के विज्ञानियों के साथ साझा किया गया। सौ. वृजेंद्र सिंह
उंगलियों के इशारे पर काम करने वाले गेस्चर आधारित रोबोट तैयार होंगे, कृषि में प्रयोग के लिए इंटेलीजेंट ड्रोन और यहां तक कि क्लासरूम रोबोट भी होंगे। वृजेंद्र सिंह कहते हैं कि संयुक्त प्रोजेक्ट में स्वदेशी तकनीकों का विकास होगा जो निर्माण की लागत कम कर इसको आम आदमी के लिए भी सुलभ बना देंगी।
देश के चुनिंदा संस्थानों में ही रोबोटिक्स पर काम
रोबोटिक्स के क्षेत्र में अनुसंधान-नवाचार के क्षेत्र में आइआइटी बांबे, आइआइटी मद्रास और आइआइटी कानपुर प्रमुख रूप से काम कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त एनआइटी त्रिची और आइआइआइटी प्रयागराज में भी रोबोटिक्स पर काम हो रहा है।
वृजेंद्र सिंह कहते हैं कि आइआइआइटी प्रयागराज में पहले से ही सेंटर आफ इंटेलीजेंट रोबोटिक्स स्थापित हैं। अब सेंटर के जरिये कंपनियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों को इंटेलीजेंट रोबोट बनाने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। इसमें सर्किट तैयार करने से लेकर एआइ के प्रयोग से इंटेलीजेंट रोबो बनाने, उपलब्ध रोबोट को अपने अनुसार नियंत्रित करना सिखाएंगे।
पोलैंड के वारसा यूनिवर्सिटी आफ टेक्नोलाजी में रोबोटिक आर्म का भी प्रदर्शन किया गया। विज्ञानियों को इसके बारे में भी जानकारी दी गई। सौ. वृजेंद्र सिंह
रोबोटिक्स के अनुसार अपडेट होगा पाठ्यक्रम
प्रो. वृजेंद्र सिंह ने बताया कि तकनीकी की पहली सीढ़ी एकेडमिक होती है, लेकिन भारत में एकेडमिक में रोबोटिक्स का विकास अच्छा नहीं है। ऐसे में अब आइआइआइटी में पाठ्यक्रम को रोबोटिक्स अनुसंधान के अनुसार अपडेट किया जाएगा। इसके लिए प्रयोगशाला को आधुनिक किया जा रहा है।
रोबोटिक्स अनुसंधान के अनुसार, उपकरण, कैमरा, सेंसर मंगा लिए गए हैं। इससे छात्र प्रयोग कर सीखेंगे। प्रो. वृजेंद्र सिंह कहते हैं कि संस्थान में एमटेक इन रोबोटिक्स एंड मशीन इंटेलीजेंस पाठ्यक्रम चल रहा है। भविष्य में रोबोटिक्स पर डिप्लोमा कोर्स भी शुरू होगा।
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