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    Hathras Stampede: HC ने तत्कालीन DM-SSP को किया तलब; महाकुंभ प्रशासन को दी नसीहत, कहा- हाथरस की घटना से सबक लें

    इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाथरस में हुई भगदड़ मामले में तत्कालीन जिलाधिकारी और एसएसपी को तलब किया है। कोर्ट ने कहा है कि प्रशासनिक बदइंतजामी के कारण 121 श्रद्धालुओं की मौत में उनकी जवाबदेही तय की जा सकती है। कोर्ट ने प्रयागराज महाकुंभ मेले के आयोजन से जुड़े अधिकारियों को भी हाथरस की घटना से सबक लेने की नसीहत दी है।

    By Jagran News Edited By: Sakshi Gupta Updated: Tue, 07 Jan 2025 10:48 PM (IST)
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    हाईकोर्ट ने हाथरस भगदड़ मामले में तत्कालीन डीएम-एसएसपी को तलब किया है। (तस्वीर जागरण)

    विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाथरस में हुई भगदड़ मामले में जवाब मांगा है। कोर्ट ने दो जुलाई 2024 को गांव फुलरई मुगलगढी में सूरजपाल उर्फ भोले बाबा के अनुयायियों की तरफ से आयोजित सत्संग में हुई भगदड़ में हुई मौतों के मामले में तत्कालीन जिलाधिकारी व एसएसपी को हलफनामे के साथ 15 जनवरी को तलब किया है।

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    कोर्ट ने कहा है कि प्रशासनिक बदइंतजामी के कारण 121 श्रद्धालुओं की मौत में क्यों न उनकी जवाबदेही तय की जाए? कोर्ट ने प्रयागराज महाकुंभ मेले के आयोजन से जुड़े प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को भी हाथरस की घटना से सबक लेने की नसीहत दी है।

    महाकुंभ को लेकर प्रशासन रहे अलर्ट मोड पर- कोर्ट

    कोर्ट ने कहा कि महाकुंभ में करोड़ों लोग आएंगे। वैसे तो केंद्र व राज्य सरकार इंतजाम में लगी है, प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री मौके पर आकर व्यवस्था देख रहे हैं। निर्विघ्न ढंग से महाकुंभ मेला संपन्न होने पर प्रदेश ही नहीं, देश के बाहर एक अच्छा उदाहरण पेश होगा।

    यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने हाथरस की घटना में बदइंतजामी की आरोपित मंजू देवी की जमानत अर्जी की सुनवाई करते हुए दिया है। पोरा पुलिस चौकी इंचार्ज बृजेश पांडेय ने उसके खिलाफ सिकंदराराऊ थाने में एफआइआर दर्ज कराई है। आयोजकों को भगदड़ के लिए जिम्मेदार बताया है। विवेचना जारी है।

    सरकार की तरफ से कहा गया कि आयोजकों ने 80 हजार लोगों की भीड़ आने की बात कहते हुए अनुमति ली थी, लेकिन ढाई लाख श्रद्धालुओं का जमावड़ा हो गया। भोले बाबा प्रवचन के बाद जाने लगे तो दर्शन के लिए भीड़ उनकी तरफ बढ़ी। सेवादारों ने भीड़ को जबरन रोक लिया। इससे भगदड़ मच गई। सैकड़ों दब व कुचल गए। कीचड़ भरे खेत में पैरों तले रौंद दिए गए।

    बचाव पक्ष का कहना था कि प्रशासन की तरफ से 50 पुलिसकर्मी ही तैनात किए गए थे, जो भीड़ को नियंत्रित करने के लिए नाकाफी थे। प्रशासन की बदइंतजामी साफ है।

    कोर्ट ने आगे ये कहा-

    कोर्ट ने कहा, ‘पूर्व में ऐसी तमाम घटनाएं हुई हैं। गरीब लोगों की भीड़ बुला ली जाती है। कोई व्यवस्था नहीं की जाती। श्रद्धा व विश्वास में भीड़ आपा खो बैठती है और भगदड़ में असामयिक मौतें हो जाती हैं। आयोजकों द्वारा समुचित व्यवस्था नहीं की जाती।’ प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है। कोर्ट ने आदेश की प्रति सीजेएम हाथरस, गृह सचिव, आयुक्त, जिलाधिकारी व पुलिस आयुक्त प्रयागराज को भेजने का निर्देश दिया है।

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