UP News: यहां आग लगी तो हो काबू पाना नहीं होगा आसान! दमकल पहुंचने तक सब कुछ जलकर हो जाता है राख
लालगोपालगंज में फायर स्टेशन न होने से आग लगने पर काबू पाना मुश्किल है। सोरांव से दमकल पहुंचने में देरी होती है जिससे नुकसान होता है। 35 हजार की आबादी वाले इस कस्बे में लोग हैंडपंप से आग बुझाने की कोशिश करते हैं पर नाकाम रहते हैं। हाल में कई आग की घटनाएं हुई हैं। स्थानीय लोगों ने फायर स्टेशन की स्थापना की मांग की है।
संवाद सूत्र, लालगोपालगंज। कस्बा में फायर स्टेशन न होने से अचानक लगी आग पर काबू पाना किसी चुनौती से कम नहीं होता है। आग लगने के बाद काबू पाने के लिए लोगों को बड़ी मशक्कत उठानी पड़ती है। सोरांव से चला फायर ब्रिगेड जब तक लालगोपालगंज व आसपास क्षेत्र के घटनास्थल पर पहुंचता है। तब तक सब कुछ समाप्त हो चुका होता है।
लालगोपालगंज कस्बा प्रतापगढ़ जनपद की सीमा पर बसा है। नगर पंचायत क्षेत्र की लगभग 35 हजार आबादी के अलावा आंचलिक क्षेत्र में एक बड़ी आबादी निवास करती है। कस्बा में फायर स्टेशन ना होने से आग लगने पर लोगों को जान माल की क्षति झेलनी मजबूरी होती है।
दुकान मकान कल कारखाने के अलावा कहीं भी आग लगने पर लोग हैंडपंप, सबमर्सिबल और निजी जल स्रोत के सहारे आग पर काबू पाने के लिए पूरी ऊर्जा झोंक देते हैं। इसके बावजूद आग बुझाने में लोग नाकाम साबित होते हैं।
बीते बुधवार की रात मुख्य बाजार से गुजर रहे एक एक डंपर के टायर में आग लग गई थी। जहां आग बुझाने के लिए लोग बगलें झांकते नजर आए। विगत वर्ष एक घर में आग लगने से घर गृहस्ती जहां जलकर राख हो गई थी। वहीं मवेशियों को जान गंवानी पड़ी थी।
बाजार के एक कबाड़ की दुकान में भीषण आग लगी थी। बरौंधा रोड़ पर एक फर्नीचर की दुकान में आग लगी। जहां फायर ब्रिगेड तब पहुंचा, जब सब जल गया था। गर्मी में गेहूं की खड़ी फसलें आग की चपेट में आती रही हैं। क्षेत्रीय लोगों ने कस्बा में फायर स्टेशन के स्थापना की मांग उठाई है।
- (१) कस्बा में आग लगने के बाद फायर स्टेशन सोरांव को घटना की सूचना बेमायनी होता है। मौके पर नहीं पहुंचत पाता। नफीस अहमद सभासद वार्ड नंबर 15
- (२) लालगोपालगंज में कष्ट करो कि एक बड़ी संख्या है। गर्मी के दिनों में आग लगने से गेहूं की फसलें जल जाती हैं। फायर स्टेशन की स्थापना जरूरी है। काश्तकार वासिल फारुकी
- (३) दुकानों में आग लगने के बाद निजी जल स्रोत और सबमर्सिबल जैसे संसाधनों काप्रयोग मजबूरी होता है। दमकल की व्यवस्था होनी चाहिए। ज्ञान बाबू केसरवानी, उर्फ मुन्ना
- (४) मकान और कल कारखानों में अचानक आग लग जाती है। लेकिन कस्बा में फायर स्टेशन न होने से आग बुझा पाना कठिन होता है। व्यापारी विनय अग्रवाल
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