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इलाहाबाद HC के नाम से 95 वेबसाइटों को बंद करने का फर्जी आदेश, प्रयागराज में चौंकाने वाला मामला

By Tara Gupta Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Sat, 07 Nov 2026 01:03 PM (IST)

इलाहाबाद हाईकोर्ट के नाम पर 95 वेबसाइटों को बंद करने का एक फर्जी आदेश सामने आया है। अज्ञात व्यक्ति के ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट के नाम से वेबसाइटों को बंद करने के फर्जी आदेश मामले में प्रयागराज पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के नाम से वेबसाइटों को बंद करने के फर्जी आदेश मामले में प्रयागराज पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

HighLights

  1. यह आदेश रिट साहिल सिंह बनाम महानिदेशक (डीआटी साइबर ला) व अन्य के नाम से है

  2. हाई कोर्ट के ज्वाइंट रजिस्ट्रार की ओर से अज्ञात के खिलाफ कैंट थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट के नाम से एक फर्जी आदेश दिए जाने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इसमें अलग-अलग 95 वेबसाइट को बंद किए जाने का आदेश जारी किया गया है। यह फर्जी आदेश रिट साहिल सिंह बनाम महानिदेशक (डीआटी साइबर ला) व अन्य के नाम से है, जिस पर 14 अगस्त 2026 की तारीख अंकित है।

कैंट थाने में अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज

जांच के बाद अब प्रकरण में हाई कोर्ट के ज्वाइंट रजिस्ट्रार यन. चन्द्रा की ओर से अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ कैंट थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। एफआईआर के मुताबिक, उन्हें रायटर्स न्यूज के इंडिया टेक्नोलाजी संवाददाता मुंसिफ वेंगाटिल की ओर से ई-मेल मिली। मुंसिफ वेंगाटिल ने बताया कि उन्हें यह आदेश दूरसंचार विभाग की वेबसाइट पर मिला, जहां वेबसाइटों को ब्लाक करने के सरकारी निर्देश में इसका हवाला दिया गया था।

किसने की ऐसी हरकत?

बताया गया कि इस ईमेल के साथ जुड़ी अन्य जानकारी से पता चलता है कि इसे भेजने वाले व्यक्ति का नाम कार्तिकेय पांडे है, जो एक वकील हैं। 14 अगस्त 2026 को जारी आदेश में न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद का नाम लिखा है। इसमें 95 वेबसाइट को ब्लाक करने का आदेश था। हालांकि न्यायालय की वेबसाइट पर ऐसा कोई मामला या आदेश नहीं मिल रहा है, इसलिए यह पुष्टि करना आवश्यक है कि यह आदेश असली है या नहीं। वह रिपोर्टिंग के उद्देश्य से इसकी सत्यता की जांच (सत्यापन) करना चाहते हैं।

ऐसी रिट का कोई मामला ही नहीं

इस संबंध में, संलग्न कथित आदेश की सत्यता और प्रमाणिकता के बारे में रजिस्ट्रार (जे) (कंप्यूटर) से एक रिपोर्ट मांगी गई थी। उसके बाद पता चला कि सर्वर पर उपलब्ध डेटा के अनुसार, ''रिट A संख्या 30480/2026'' नाम का कोई मामला मौजूद ही नहीं है। साथ ही, इस गैर-मौजूद मामले में 14 अगस्त 2026 की तारीख वाला कोई भी निर्णय/आदेश अपलोड नहीं किया गया है। न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद के निजी सचिव ने भी पुष्टि की है कि उनके द्वारा ऐसा कोई आदेश पारित नहीं किया गया है।

 धोखाधड़ी करने के इरादे से जालसाजी की गई

कथित आदेश के माध्यम से 95 वेबसाइटों को ब्लाक करने का निर्देश दिया गया था। इन तथ्यों से स्पष्ट है कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने धोखाधड़ी करने के इरादे से जालसाजी की है और जाली दस्तावेजों को असली बताकर इस्तेमाल किया है। फिलहाल थाना प्रभारी कैंट अमरनाथ राय का कहना है कि तहरीर के आधार पर केस दर्ज कर विवेचना की जा रही है।

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