UP RERA की ढीली वसूली कार्रवाई पर इलाहाबाद हाई कोर्ट का सख्त रुख, निगरानी करने का दिया आदेश
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी रेरा द्वारा जारी वसूली प्रमाणपत्रों के धीमे क्रियान्वयन पर स्वतः संज्ञान लिया है। कोर्ट ने ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट।
HighLights
हाई कोर्ट ने स्वत: जनहित याचिका कायम की
438 वसूली प्रमाणपत्रों में 109 का ही निस्तारण
विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथारिटी (रेरा) द्वारा जारी वसूली प्रमाणपत्रों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की है। मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की पीठ ने यह आदेश पारित किया।
329 प्रमाणपत्रों पर वसूली अब भी बाकी
पीठ ने पाया कि कुल 438 वसूली प्रमाणपत्रों में से केवल 109 का निस्तारण हुआ है, जबकि 329 प्रमाणपत्रों पर वसूली अब भी बाकी है। पीठ ने माना कि इस मामले में हाई कोर्ट की निगरानी जरूरी है और इसी कारण वर्तमान जनहित याचिका दर्ज करने का निर्देश दिया।
अगली सुनवाई 21 दिसंबर को
अदालत ने जिलाधिकारी गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (गाजियाबाद) और रेरा गौतमबुद्ध नगर को नोटिस जारी करने का आदेश दिया। पीठ ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई पर जिलाधिकारी अपने समक्ष लंबित विभिन्न वसूलियों की स्थिति अदालत में पेश करें। इसमें हर वसूली प्रमाणपत्र कितना पुराना है और उसे लागू कराने के लिए अब तक किए गए प्रयासों का ब्योरा देना होगा। उक्त मामले की अगली सुनवाई 21 दिसंबर को होगी।