जालौन में स्कूल भवन निर्माण जांच के मांग वाली याचिका इलाहाबाद HC में खारिज, कोर्ट ने याची की साख व नीयत पर उठाए सवाल
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जालौन में स्कूल भवनों के निर्माण में अनियमितताओं की जांच की मांग वाली जनहित याचिका खारिज ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट।
HighLights
नीरज श्रीवास्तव ने केंद्र सरकार सहित छह अन्य को प्रतिवादी बनाकर याचिका दायर की थी
कोर्ट ने कहा- याचिका किसी अन्य के कहने पर दायर की गई लगती है, सुनवाई का आधार नहीं
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जालौन जिले में स्कूल भवनों के निर्माण में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग वाली जनहित याचिका खारिज कर दी है। मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र की खंडपीठ ने याची की साख और नीयत पर सवाल उठाया।
नीरज श्रीवास्तव ने केंद्र सरकार सहित छह अन्य को प्रतिवादी बनाकर याचिका दायर की थी। उन्होंने मांग की थी कि जालौन में वर्ष 2017 से 2023 के बीच बने स्कूल भवनों में राष्ट्रीय विद्यालय सुरक्षा नीति के मानकों के उल्लंघन की जांच के लिए राज्य स्तरीय तकनीकी समिति गठित कर भवनों के लिए आवंटित धन की वसूली कराई जाए।
खंडपीठ ने कहा कि याचिका में याची की योग्यता और पृष्ठभूमि का कोई विवरण नहीं है। उन्होंने खुद को ‘समाजसेवी’ बताया, जबकि हलफनामे में पेशे के कालम में ‘सोशल वर्कर’ लिखा, जो स्वतः विरोधाभासी है। याचिका में बुनियादी तथ्यों का भी अभाव है और यह नहीं बताया गया कि याची की इस मामले में रुचि कैसे पैदा हुई?
पीठ के अनुसार, याचिका की विषयवस्तु और शिकायत की प्रकृति से याची महज नाम देने वाला प्रतीत होता है, जिसका मामले से कोई सरोकार नहीं है। याचिका किसी अन्य के कहने पर दायर की गई लगती है, इसलिए इसे सद्भावनापूर्ण नहीं माना जा सकता। पीठ ने कहा , याचिका पर सुनवाई का कोई आधार नहीं बनता।
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