शिक्षामित्रों को विशेष TET से बाहर रखना भेदभाव नहीं; हाईकोर्ट ने सरकार को दिए 2028 तक 6 टीईटी आयोजित करने के आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षामित्रों को विशेष टीईटी से बाहर रखने को भेदभाव नहीं माना है। हालांकि, कोर्ट ने राज्य सरकार ...और पढ़ें
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HighLights
शिक्षामित्रों को विशेष टीईटी से बाहर रखना भेदभाव नहीं।
नियमित सहायक अध्यापकों और शिक्षामित्रों की सेवा स्थिति भिन्न।
सरकार 2028 तक छह नियमित टीईटी परीक्षाएं आयोजित करने का निर्देश।
विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शिक्षामित्रों को विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में शामिल करने की मांग अस्वीकार कर दी है। कोर्ट ने कहा कि नियमित पदों पर नियुक्त सहायक अध्यापकों और शिक्षामित्रों की सेवा स्थिति अलग-अलग है। ऐसे में विशेष टीईटी से शिक्षामित्रों को बाहर रखना भेदभाव नहीं है।
हालांकि, उन्हें टीईटी पास करने के पर्याप्त अवसर देने के लिए राज्य सरकार और उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को 31 अगस्त 2028 तक कम से कम छह नियमित टीईटी परीक्षाएं कराने का निर्देश दिया गया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने वसीम अहमद की विशेष अपील पर पारित किया है। अपील में दो सितंबर 2026 के शासनादेश और तीन सितंबर को जारी विज्ञापन को चुनौती दी गई थी।
इनके तहत विशेष टीईटी में केवल कार्यरत शिक्षकों और संविदा पर कार्यरत विशेष शिक्षकों को शामिल करने की व्यवस्था थी। अपीलकर्ताओं ने कहा कि वे 20 वर्षों से अधिक समय से शिक्षामित्र के रूप में काम कर रहे हैं। संविदा पर कार्यरत विशेष शिक्षकों को परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया गया, जबकि शिक्षामित्रों को इससे बाहर रखा गया।
उनका कहना था कि सभी पात्र अभ्यर्थियों को टीईटी पास करने के पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए। आयोग ने बताया कि तीन नवंबर से शुरू हुई विशेष टीईटी में करीब 86 हजार नियमित सहायक अध्यापकों और विशेष शिक्षकों को अवसर दिया गया है। शिक्षामित्रों की संख्या करीब डेढ़ लाख है। वे नियमित पदों पर नियुक्त नहीं हैं, बल्कि मानदेय पर कार्यरत हैं।
विशेष शिक्षकों को अलग श्रेणी में रखने का आधार दिव्यांग बच्चों और विशेष जरूरत वाले विद्यार्थियों को शिक्षा देना है। आयोग के अनुसार अगली नियमित टीईटी परीक्षा 26 और 27 फरवरी 2027 को होगी। इसके बाद जून-जुलाई और दिसंबर-जनवरी में भी परीक्षाएं प्रस्तावित हैं। आयोग ने 2028 में परीक्षा कराने का भी भरोसा दिया।
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खंडपीठ ने कहा कि शिक्षामित्रों को 2026, 2027 और 2028 में टीईटी पास करने के लिए हर वर्ष दो अवसर मिलने चाहिए। निर्धारित अवसर पूरे करने के लिए 2028 में 31 अगस्त से पहले एक और नियमित टीईटी परीक्षा कराई जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस तारीख के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत कोई अतिरिक्त अवसर नहीं मिलेगा। इन्हीं निर्देशों के साथ विशेष अपील निस्तारित कर दी गई।
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