दीवाली पर लक्ष्मी-गणेश पूजन के एक नहीं चार विशेष मुहूर्त कब-कब? मध्यरात्रि में काली पूजन का दो घंटे उत्तम समय
दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश पूजन के चार विशेष मुहूर्त और मध्यरात्रि में काली पूजन का उत्तम समय बताया गया है। यह ...और पढ़ें

दीवाली आठ नवंबर को है, लक्ष्मी-गणेश पूजन के शुभ मुहूर्त चार हैं।
HighLights
आयुष्मान योग, त्रिग्रही संयोग में दीपोत्सव 8 नवंबर को
घरों के साथ ही प्रतिष्ठानों में होगी मां लक्ष्मी-श्रीगणेश पूजा
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। सुख, समृद्धि और वैभव का महापर्व दीवाली भक्तिमय माहौल में हर्षोल्लास से मनाया जाएगा। दीपोत्सव पर इस बार दुर्लभ और अत्यंत शुभ संयोग बन रहे हैं। जो साधना, धन-वैभव और पूजा-पाठ के लिए बेहद खास है।
धन-धान्य की प्राप्ति की मान्यता
रविवार को सूर्यास्त के बाद चहुंओर दीपक जलेंगे, आकर्षक झालरों की सजावट होगी। घरों और प्रतिष्ठानों में मां लक्ष्मी, गणेश जी, कुबेर के साथ इंद्र की पूजा की जाएगी। व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में बहीखाता बदले जाएंगे। मान्यता है कि इससे धन-धान्य की प्राप्ति होती है।
त्रिग्रही का दुर्लभ संयोग
ज्योतिर्विद आचार्य देवेंद्र प्रसाद त्रिपाठी के अनुसार आठ नवंबर की सुबह 10.52 बजे से अमावस्या लग कर नौ नवंबर की सुबह 11.32 बजे तक रहेगी। दीपावली पर्व पर स्वाति नक्षत्र, आयुष्मान योग के साथ तुला राशि में चंद्रमा, बुध और सूर्य के संचरण से त्रिग्रही का दुर्लभ संयोग बन रहा है। आयुष्मान योग को दीर्घायु और आरोग्य (उत्तम स्वास्थ्य) प्रदान करने वाला माना गया है। इस महासंयोग में दीपदान करने, माता लक्ष्मी, बुद्धि के दाता भगवान श्रीगणेश और धन के देवता कुबेर जी की पूजा और मंत्र साधना से साधक को स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। घर में वर्षभर सुख-समृद्धि का वास रहता है।
दीवाली पर पूजन के चार विशेष मुहूर्त
दीवाली पर रविवार आठ नवंबर को मां लक्ष्मी, गणेश और कुबेर के पूजन के चार विशेष मुहूर्त हैं। इसमें दोपहर 1.26 से 2.57 बजे तक कुंभ की स्थिर लग्न तथा दोपहर 2.58 से 4.25 बजे मीन लग्न द्विस्वभाव रहेगी। इसमें पूजन किया जा सकता है। इसके बाद शाम 6.02 से 7.58 बजे तक वृष की स्थिर लग्न तथा रात 7.59 से 10.12 बजे तक मिथुन लग्न द्विस्वभाव होना भी पूजन के लिए खास है।
लक्ष्मीस्रोत-श्रीसूक्त का करें पाठ, कमलगट्टे से जप
पाराशर ज्योतिष संस्थान के निदेशक आचार्य विद्याकांत पांडेय के अनुसार दीपावली पर्व पर सूर्यास्त से पहले स्नान करके शुद्ध वस्त्र पहनकर एक चौकी में मां लक्ष्मी, गणेश व कुबेर की मूर्ति अथवा चित्र रखकर उसमें मौली बांधे। फिर चौकी पर छह चौमुखे व 26 छोटे घी के दीपक जलाकर देवी-देवताओं को गंगाजल से स्नान कराना चाहिए। उन्हें रोली, अक्षत, मिष्ठान, धूप, धान का लावा, मधु, सफेद मेवा, दीप, फल अर्पित करके मन में मां लक्ष्मी का आह्वान करें। इसके बाद 'लक्ष्मीस्तोत्र व श्रीसूक्त' का पाठ करना पुण्यकारी रहेगा।
मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने को ऐसे करें पूजन
आचार्य ने बताया कि मां लक्ष्मी के पूजन में कमलगट्टे का बहुत अधिक महत्व है। मां लक्ष्मी के पूजन में कमलगट्टे की माला से 'ओम श्रीं हृीं श्री कमले कमलालये प्रसीद-प्रसीद ओम श्रीं हृीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम:' का 108 बार जाप करने से मां लक्ष्मी अतिशीघ्र प्रसन्न होती हैं। इसके अलावा ग्रहीय परिवर्तन को देखते हुए लक्ष्मी, गणेश, कुबेर के अलावा दूसरे देवताओं की भी पूजा करनी चाहिए। इससे हर भवबाधा से मुक्ति मिलती है।
रात 12.30 से 2.43 बजे तक काली पूजा का उत्तम समय
दीपावली पर मां काली को प्रसन्न करने के लिए महानिषा, तांत्रिक पूजा की जाती है। ज्योतिर्विद आचार्य अविनाश राय के अनुसार मां काली के पूजन के लिए सबसे उत्तम समय मध्यरात्रि है। रात 12.30 से 2.43 बजे तक करीब सवा दो घंटे सिंह की स्थिर लग्न रहेगी। यह मां काली की पूजा का उत्तम समय है। पूजा के दौरान झपकी भी आ जाती है तो वह खंडित हो जाती है।
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