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Hanuman Jayanti 2027: शिवरात्रि योग में जन्मेंगे श्रीहनुमान, श्रेष्ठ मुहूर्त कब व इस दिन किन बातों का करें पालन?

By Sharad Dwivedi Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Fri, 06 Nov 2026 03:23 PM (IST)

प्रयागराज में 7 नवंबर को हनुमान जयंती मनाई जाएगी, जिसमें 'शिवरात्रि योग' और 'चित्रा नक्षत्र' का दुर्लभ संयोग बन रहा ...और पढ़ें

कार्तिक कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि पर सात नवंबर को रुद्रावतार हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाया जाएगा।

कार्तिक कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि पर सात नवंबर को रुद्रावतार हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाया जाएगा।

HighLights

  1. 'शिवरात्रि योग' व 'चित्रा नक्षत्र' का बेहद दुर्लभ-शुभ संयोग

  2. सात नवंबर की शाम 4.25 से 6.02 बजे तक श्रेष्ठ मुहूर्त

  3. प्रयागराज के हनुमानजी के मंदिरों में होगा दर्शन-पूजन

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। Hanuman Jayanti 2027 धर्म और आस्था की नगरी प्रयागराज में कार्तिक कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि पर शनिवार सात नवंबर को रुद्रावतार संकटमोचन हनुमान जी का जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। जन्म पर चहुंओर उल्लास छाएगा।

दुर्लभ संयोग में दर्शन-पूजन अत्यंत पुण्यकारी

इस दिन त्रिवेणी बांध स्थित लेटे (बड़े) हनुमान जी, हनुमत निकेतन, रामबाग हनुमान जी, छुआरा हनुमान जी, संकट मोचन हनुमान जी सहित हर प्राचीन मंदिरों में अभिषेक और पूजन किया जाएगा। पुष्प और आभूषणों से श्रृंगार होगा। प्राचीन मंदिरों जन्मोत्सव पर 'शिवरात्रि योग''और 'चित्रा नक्षत्र' का बेहद दुर्लभ व शुभ संयोग बन रहा है। इस पावन अवसर पर प्राचीन मंदिरों में बजरंगबली के दर्शन और पूजन करना अत्यंत पुण्यकारी रहेगा।

सुबह 10.44 बजे से चतुर्दशी तिथि का आरंभ हो जाएगा

ज्योतिर्विद आचार्य देवेंद्र प्रसाद त्रिपाठी के अनुसार, त्रेतायुग में हनुमान जी का जन्म कार्तिक कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि को मेष लग्न में हुआ था। शनिवार सुबह 10.44 बजे से चतुर्दशी तिथि का आरंभ हो जाएगा। वहीं, हनुमान जी के जन्म की विशेष मेष लग्न शाम 4.25 से लेकर 6.02 बजे तक रहेगी। चित्रा नक्षत्र और शिवरात्रि का योग विशेष है। हनुमान जी रुद्रावतार हैं ऐसे में शिवरात्रि का योग होना विशेष पुण्यकारी है।

मुख्य द्वार पर चार मुख वाला दीपक जलाना चाहिए

शास्त्रों के मुताबिक इसी समयावधि के बीच संकटमोचन का जन्मोत्सव मनाना श्रद्धालुओं के लिए सबसे ज्यादा कल्याणकारी और फलदायी सिद्ध होगा। प्रभुदत्त ब्रह्मचारी आश्रम के ज्योतिर्विद आचार्य रामजी त्रिपाठी के अनुसार मेष लग्न के दौरान प्रभु श्रीराम के नाम का जप, हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करने वाले भक्तों को दैहिक, दैविक और भौतिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। इस दिन हनुमत उपासना करने के बाद सूर्यास्त होते ही घर के मुख्य द्वार पर चौमुखा (चार मुख वाला) दीपक जलाना चाहिए। ऐसा करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है।

11 बार करें सुंदरकांड का पाठ

पाराशर ज्योतिष संस्थान के निदेशक आचार्य विद्याकांत पांडेय के अनुसार हनुमान जी संकटमोचन हैं। वे भक्तों के समस्त कष्टों को जल्द दूर करते हैं। हनुमत कृपा की प्राप्ति के लिए भाव से साधना करनी चाहिए। उन्हें चना, गुड़, बेसन का लड्डू, चमेली का तेल, सिंदूर, लाल लंगोट, तुलसी की माला व जनेऊ हनुमान जी को अर्पित करना चाहिए।

'ऊं हं हनुमते नम:' का 108 बार जप करें

Hanuman Jayanti 2027 मेष लग्न में भगवा अथवा लाल वस्त्र धारण करके देशी घी का दीपक जलाकर प्राचीन हनुमान मंदिर में 'ऊं हं हनुमते नम:' का 108 बार जप करें। साथ ही श्रीराम नाम अथवा सीताराम का कम से कम 108 बार उच्चारण करें। साढ़े साती से मुक्ति के लिए 11 बार सुंदरकांड व हनुमान चालीसा का पाठ, दशरथ कृत शनि स्रोत व हनुमान बाहुक का पाठ करना पुण्यकारी होता है।

हनुमान जन्मोत्सव पर इसका करें पालन

- मांस, मदिरा, अंडा, लहसुन और प्याज आदि तामसिक चीजों का सेवन न करें।
- पूजा के समय काले अथवा सफेद रंग के कपड़ा न पहनें।
- लाल, पीला अथवा केसरिया (नारंगी) रंग का वस्त्र पहनकर पूजा करें।
- व्रत रखने वाले लोग नमक का सेवन न करें।
- शारीरिक और मानसिक रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करें।
- महिलाएं हनुमान जी की मूर्ति को स्पर्श करने से बचें।
- हनुमान जी की पूजा में चरणामृत या पंचामृत का उपयोग वर्जित है।
- बंदर अथवा किसी पशु को परेशान न करें।
- क्रोध न करें, अपशब्द बोलने से बचें।

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