Diwali 2026 : पंच दिवसीय दीप पर्व पर ग्रह-नक्षत्रों की अद्भुत जुगलबंदी, पांचों पर्व का शुभ मुहूर्त व पूजन विधि जानें यहां
Diwali 2026 पांच दिवसीय पंचदीप पर्व ग्रह-नक्षत्रों की अद्भुत जुगलबंदी के साथ मनाया जाएगा। प्रयागराज के ज्योतिर्विदों ने धनतेरस से ...और पढ़ें

Diwali 2026 प्रयागराज के ज्योतिर्विदों ने पांच पर्वों की पूजन विधि और महत्व बताया है।
HighLights
द्विग्रही योग-हस्त नक्षत्र का अद्भुत संयोग, पंचदीप पर्व में सुख-समृद्धि का योग
छह नवंबर को धनतेरस से आरंभ होगा पंचदीप पर्व, पांच दिनों तक विशेष संयोग
धनतेरस पर घर के मुख्य दरवाजे पर 4 दीपक जलाने से अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। Diwali 2026 सुख, समृद्धि व सनातन संस्कारों के प्रतीक पांच दिवसीय पंचदीप पर्व कार्तिक कृष्णपक्ष की त्रयोदशी तिथि छह नवंबर से शुरू होगा। पंचदीप पर्व का शुभारंभ धनतेरस पर द्विग्रही योग और हस्त नक्षत्र के अद्भुत संयोग पर होगा जो सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य का द्वार खोलने वाला है।
पांच दिनों तक ग्रह-नक्षत्रों की अद्भुत जुगलबंदी
सनातन परंपरा में हस्त नक्षत्र को सिद्धि और समृद्धि देने वाला माना गया है। इसके साथ द्विग्रही योग का निर्माण होता है, तो महालक्ष्मी की कृपा का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। धनतेरस पर्व के बाद हनुमान जी का जन्मोत्सव, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भइया दूज का पर्व मनाया जाएगा। लगातार पांच दिनों तक ग्रह-नक्षत्रों की अद्भुत जुगलबंदी बन रही है। इसमें दान और पूजन करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होगी है।

आर्थिक स्थिरता के लिए सर्वोत्तम : आचार्य देवेंद्र
श्रीधर्मज्ञानोपदेश संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य आचार्य देवेंद्र प्रसाद त्रिपाठी के अनुसार हस्त नक्षत्र को आकाश मंडल में विशेष स्थान प्राप्त है। इसे सिद्धि, कौशल और धन-धान्य की प्रदाता के रूप में देखा जाता है। धनतेरस पर्व पर हस्त नक्षत्र रहना अत्यंत शुभ है। प्रदोष व्यापिनी त्रयोदशी से धन त्रयोदशी (धनवंतरि जयंती) मनाई जाएगी। समुद्र मंथन में जिस कलश के साथ भगवती लक्ष्मी का अवतरण हुआ था। महालक्ष्मी की पूजा हस्त नक्षत्र की छत्रछाया में होगी जो व्यापारिक उन्नति, नई शुरुआत और आर्थिक स्थिरता के लिए सर्वोत्तम है।

अकाल मृत्यु के भय से मिलती है मुक्ति : आचार्य विद्याकांत
Diwali 2026 पाराशर ज्योतिष संस्थान के निदेशक आचार्य विद्याकांत पांडेय के अनुसार धनतेरस वाले दिन घर के मुख्य दरवाजे पर चार दीपक जलाने से अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है। मां लक्ष्मी, गणेश, कुबेर व इंद्र का पूजन करने का विधान है। शनिवार को हनुमान जी के जन्मोत्सव पर शिवरात्रि का योग है। हनुमान जी के प्राचीन मंदिरों में लाल लंगोट, सिंदूर, चमेली का तेल, तुलसी की माला और बेसन का लड्डू अर्पित करके हनुमान चालीसा, सुंदरकांड का पाठ अवश्य करना चाहिए।

पितरों के निमित्त करें दान : डॉ. अमिताभ
ज्योतिषाचार्य डॉ. अमिताभ गौड़ के अनुसार दीपावली पर्व रविवार को मनाया जाएगा। उस दिन स्वाति नक्षत्र, आयुष्मान योग के साथ तुला राशि में चंद्रमा, बुध और सूर्य के संचरण से त्रिग्रही योग का दुर्लभ संयोग बनना अलौकिक है। त्रिग्रही योग मां लक्ष्मी के पूजन से धन, वैभव की प्राप्ति होगी। सामाजिक मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। कार्तिक कृष्णपक्ष की अमावस्या पर पितरों के निमित्त पिंडदान करना चाहिए। पितरों की याद में गरीबों को भोजन कराने व दान से परिवार में सुख-संपन्नता रहती है।

गाय को खिलाएं हरा चारा : आचार्य अमित
Diwali 2026 ज्योतिषाचार्य आचार्य अमित बहोरे के अनुसार गोवर्धन पूजा का पर्व नौ नवंबर को मनाया जाएगा। इसमें गाय के गोबर का पर्वत बनाकर पूजन करना चाहिए। गाय को हरा चारा व गुड़ खिलाने से धन, वैभव व लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। वहीं, यम द्वितीया पर सुबह यमुना स्नान करके भाई की बलाएं लेकर बहनें उनकी कुशलता की कामना करेंगी। चित्रगुप्त व कलम-दवात का पूजन इसी दिन किया जाएगा।
पंचदीप पर्व कब से कब तक?
छह नवंबर : कार्तिक कृष्णपक्ष की द्वादशी तिथि पांच नवंबर को दिन में 11.58 बजे लगकर छह नवंबर की सुबह 11.07 बजे तक रहेगी। सुबह 11.08 बजे से त्रयोदशी तिथि लगेगी। इसमें कन्या राशि में चंद्रमा-शुक्र के संचरण से द्विग्रही योग बनेगा। हस्त नक्षत्र व प्रदोष का संयोग अत्यंत पुण्यकारी है।
सात नवंबर : सुबह 10.44 बजे कार्तिक कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि लगेगी। इस दिन हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। हनुमान जी का जन्म मेष लग्न में हुआ है जो शाम 4.25 से 6.02 बजे तक रहेगी। इसी समयावधि में हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाना कल्याणकारी रहेगा। इस दिन चित्रा नक्षत्र व शिवरात्रि का योग शुभ फल देगा।
आठ नवंबर : सुबह 10.52 बजे से अमावस्या लग जाएगी, जो नौ नवंबर की सुबह 11.32 बजे तक रहेगी। ऐसे में दीपावली पर्व रविवार को मनाया जाएगा। स्वाति नक्षत्र, आयुष्मान योग के साथ तुला राशि में चंद्रमा, बुध और सूर्य के संचरण से त्रिग्रही योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है।
नौ नवंबर : सुबह 11.32 बजे प्रतिप्रदा तिथि लग जाएगी। सुबह 7.29 बजे तक स्वाति और 7.30 बजे से विशाला नक्षत्र, सौभाग्य योग का अद्भुत संयोग है। तुला राशि में चंद्रमा, बुध व सूर्य के संचरण से त्रिग्रही योग बनना दुर्लभ है। इस दिन गोवर्धन पूजा उत्सव और स्नान-दान की अमावस्या मनायी जाएगी।
10 नवंबर : दोपहर 12.38 बजे से द्वितीया तिथि लगेगी। सुबह 9.05 बजे तक विशाखा और 9.06 बजे से अनुराधा नक्षत्र का योग है। तुला राशि में सूर्य-बुध के संचरण से द्विग्रही योग का संयोग बन रहा है। इसमें भइया दूज का पर्व मनाया जाएगा।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।