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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्रावास आवंटन: 3500 दाखिले, 600 छात्र-छात्राओं को ही मिलेगा हॉस्टल का कमरा

By Mritunjay Mishra Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Sun, 11 Oct 2026 08:08 PM (IST)

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में 3500 नए दाखि हुए लेकिन केवल 600 छात्र-छात्राओं को ही छात्रावास में कमरा मिल पाएगा। सीमित सीटों ...और पढ़ें

इलाहाबाद विश्वविद्यालय का छात्रावास। जागरण आर्काइव

इलाहाबाद विश्वविद्यालय का छात्रावास। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. विश्वविद्यालय के छात्रावासों में सीमित सीटों व नवीनीकरण से बढ़ी छात्र-छात्राओं की परेशानी

  2. हजारों विद्यार्थियों को डेलीगेसी में तलाशना होगा ठिकाना, ताराचंद मरम्मत के कारण बंद

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में दाखिले की दौड़ पूरी करने के बाद अब विद्यार्थियों के सामने रहने की जगह तलाशने की चुनौती खड़ी हो गई है। स्नातक पाठ्यक्रमों में इस वर्ष करीब 3500 सीटों पर प्रवेश हुए हैं, लेकिन छात्रावासों में जगह सीमित है।

किराए के कमरों में विद्यार्थियों को रहना होगा 

ऐसी स्थिति में लगभग 500 विद्यार्थियों को ही कमरा मिल पाने की स्थिति है। जबकि ट्रस्ट के छात्रावाससों में भी 100 से 150 छात्रों के रहने की जगह है। ऐसे में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं को विश्वविद्यालय परिसर से बाहर डेलीगेसी या किराये के कमरों में रहने का विकल्प तलाशना होगा।

विद्यार्थियों के लिए परेशानी का कारण

विश्वविद्यालय में छात्रावासों की सीमित क्षमता लंबे समय से विद्यार्थियों के लिए परेशानी का कारण रही है। इस बार छात्रावासों के नवीनीकरण के चलते भी आवास की उपलब्धता प्रभावित हो रही है। प्रवेश लेने के बाद दूसरे जिलों और प्रदेशों से प्रयागराज पहुंचने वाले विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई के साथ रहने और खाने-पीने की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बन गया है।

विश्वविद्यालय में छात्र-छात्राओं के लिए कुल 18 छात्रावास

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्र-छात्राओं के लिए कुल 18 छात्रावास हैं। इनमें सात महिला और 11 पुरुष छात्रावास शामिल हैं। इसके अतिरिक्त ट्रस्ट के तीन छात्रावास भी हैं। इसके बावजूद विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में आवास की सुविधा पर्याप्त नहीं है। स्नातक स्तर पर करीब 460 छात्र-छात्राओं को ही प्रथम चरण में छात्रावास आवंटित किए गए हैं।

डेलीगेसी बनेगी विद्यार्थियों का सहारा

छात्रावास में जगह नहीं मिलने पर विद्यार्थियों के सामने डेलीगेसी में रहने का विकल्प होता है। विश्वविद्यालय के आसपास के इलाकों में विद्यार्थी किराये पर कमरे लेकर या साझा आवास में रहकर पढ़ाई करते हैं। ऐसे में छात्रावासों की उपलब्धता और उनकी वास्तविक क्षमता के बीच अंतर का मुद्दा महत्वपूर्ण हो जाता है। ताराचंद छात्रावास में पिछले वर्ष भी आवंटन नहीं हुआ था और इस वर्ष भी यह नवीनीकरण के कारण बंद है। हालांकि हिंदू छात्रावास की मरम्मत के बाद यहा सर्वाधिक 78 स्नातक छात्रों को छात्रावास मिलेंगे।

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