आठ साल में बदल गई प्रयागराज शहर की पहचान, आज ही के दिन 2018 में योगी सरकार ने इलाहाबाद का बदला था नाम
योगी सरकार द्वारा 2018 में इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने के बाद शहर की पहचान पूरी तरह बदल गई है। ...और पढ़ें

प्रयागराज में भरद्वाज आश्रम कॉरिडोर। जागरण
HighLights
नाम बदलते ही विकास कार्य को लगे पंख, साल-दर साल बढ़ी खूबसूरती
कुंभ 2019 और महाकुंभ 2025, के बजट से सड़कें चौड़ी हुईं, फुटपाथ बने
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। पहले 'इलाहाबाद' से निकलकर अंगड़ाई लेता 'प्रयागराज', फिर कुंभ 2019 और 'महाकुंभ 2025' की आभा से दुनिया भर में बिखरी इसकी चमक-दमक। प्रमुख रास्तों पर सांस्कृतिक रोशनी डालते चौराहे और चमचमाती रंगीन लाइट से निखर कर आती बाजारों की खूबसूरती। जी हां, यह प्रयागराज है जो 15 अक्टूबर 2018 तक इलाहाबाद था। विश्व प्रसिद्ध संगम तट से लेकर पुराने शहर के प्रमुख रास्तों और मुहल्लों में बीते आठ साल में बदलाव आया उसकी नींव 16 अक्टूबर 2018 को पड़ी थी, जब मुख्यमंत्री बने योगी आदित्यनाथ ने पुराणों में उल्लिखित 'प्रयाग' के आधार पर जिले का नामकरण प्रयागराज कर दिया था।
शहर में विकास के लगे पंख
पौराणिक और धार्मिक महत्व को देखते हुए इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने की मांग बहुत पहले से उठ रही थी। प्रदेश में 2017 से पहले की सरकारों ने इस पर ध्यान नहीं दिया था। योगी सरकार की कैबिनेट ने मंजूरी देकर प्रयागराज नाम स्थापित कराया तो जैसे इस शहर में विकास को पंख ही लग गए। कुंभ 2019 और महाकुंभ 2025, के बजट से शहर में अरबाें रुपये झोंके गए। जिससे सड़कें चौड़ी हुईं, फुटपाथ बने।
जगह-जगह ओवर ब्रिज निर्माण हुए
आजाद पार्क, खुसरो बाग, भरद्वाजमुनि पार्क, एयरपोर्ट मार्ग, बंधवा स्थित बड़े हनुमान मंदिर के आसपास कारिडोर, गंगा और यमुना किनारे पक्के घाट, अरैल में पक्के घाट और सेल्फी प्वाइंट, नैनी पुल से लेकर अरैल तक सुंदरीकरण, नगर क्षेत्र में सिविल लाइंस, सुभाष चौराहा, के आसपास कदम-कदम पर शापिंग माल खुले, स्मार्ट सिटी परियोजना से प्रमुख मार्गों पर माड्युलर बस स्टापेज, ओपेन एयर जिम, पब्लिक शेयरिंग बाइक और यातायात को सुगम करने के लिए जगह-जगह ओवर ब्रिज के निर्माण हुए।
अयोध्या, वाराणसी, चित्रकूट सड़क मार्ग से जाना आसान
शहर को बेहद गहराई से जानने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय में मीडिया स्टडीज सेंटर के समन्वयक डॉ. धनंजय चोपड़ा कहते हैं कि शहर में आठ साल में बहुत बदलाव आया। इससे बड़ी बात क्या होगी कि महाकुंभ में पूरी दुनिया का केंद्र अपना प्रयागराज हो गया था। जिस तरह से देश के कई महानगरों के लिए यहां से हवाई यात्रा का नेटवर्क बन गया है, रेल और बसों की सुविधा पहले से व्यापक हुई है। यहां से अयोध्या, वाराणसी, मथुरा, चित्रकूट सड़क मार्ग से जाना काफी आसान हो गया है।
