फर्जी नियुक्तियों को लेकर इलाहाबाद HC सख्त, कहा- शिक्षा के गिरते स्तर के कारण बंद हो रहे सरकारी स्कूल
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी नियुक्तियों पर कड़ा रुख अपनाया है। कक्षा 1 से 8 तक ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट।
HighLights
कोर्ट ने बेशिवि के 1 से 8 तक के शिक्षकों को नियुक्ति पत्र व शैक्षणिक दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया
STF जांच में सामने आया कि प्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षकों ने जाली दस्तावेजों के सहारे नौकरी पाई है
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बेसिक शिक्षा विभाग के कक्षा एक से आठ तक के सभी शिक्षकों को अपने नियुक्ति पत्र और शैक्षणिक दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकलपीठ ने कुसुमलता की याचिका पर यह महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। कोर्ट ने यह निर्देश तब दिया जब स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) अपर पुलिस अधीक्षक कार्यालय से मिले निर्देशों के आधार पर बताया गया कि याची ने गोरखपुर के कोदीपुर स्थित कंपोजिट प्राथमिक विद्यालय बैरीपार में तैनात सहायक अध्यापिका कुसुमलता श्रीवास्तव के शैक्षणिक दस्तावेजों का इस्तेमाल कर नौकरी हासिल की।
याची 12 और 13 अक्टूबर को एसटीएफ के समक्ष पेश नहीं हुई और सत्यापन के लिए शैक्षणिक योग्यता के दस्तावेज भी जमा नहीं किए। पिछली सुनवाई पर उनके अधिवक्ता ने आपरेशन के कारण बेड रेस्ट पर होने की जानकारी दी थी। कोर्ट ने कहा कि एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षकों ने जाली दस्तावेजों के सहारे नौकरी पाई है। कई मामलों में एक ही शैक्षणिक दस्तावेज़ पर 10 या उससे अधिक लोग नौकरी कर रहे हैं।
समन्वय पीठ के 22 जनवरी 2026 के आदेश गरिमा सिंह बनाम राज्य का भी उल्लेख कोर्ट ने किया, जिसमें प्रमुख सचिव को फर्जी ढंग से हुई नियुक्ति निरस्त करने और वेतन वसूली सहित कार्रवाई करने तथा मिलीभगत करने वाले अधिकारियों पर कठोर विभागीय और दंडात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे। छह माह की समय-सीमा तय की गई थी।
कोर्ट का कहना था कि बड़ी संख्या में प्राथमिक विद्यालय छात्र संख्या घटने से बंद हुए हैं। मुफ्त किताबें, मिड-डे मील और यूनिफार्म जैसी सुविधाओं के बावजूद सुधार न होने पर कोर्ट ने कहा कि इसका एक प्रमुख कारण शिक्षकों की गुणवत्ता हो सकती है। यह समस्या हाल की नियुक्तियों तक सीमित नहीं, बल्कि पिछले दो दशकों से है। अच्छे शिक्षक के लिए केवल विषय का ज्ञान काफी नहीं, बल्कि शिक्षण क्षमता, नियमित उपस्थिति, बच्चों के प्रति धैर्य और निष्पक्षता भी आवश्यक है। जो व्यक्ति नियुक्ति करने वाले प्राधिकारी को धोखा देकर शुरुआत करता है, उससे बच्चों के भरोसे को निभाने की उम्मीद नहीं की जा सकती।
कोर्ट ने कहा सभी शिक्षक एक सप्ताह में बीएसए को सारे दस्तावेज देंगे। नोटरी से प्रमाणित शपथ पत्र देकर बताएंगे कि उनका कोई निकट संबंधी बीएसए या उससे ऊपर के पद पर शिक्षा विभाग में कार्यरत या सेवानिवृत्त है अथवा नहीं? निकट संबंधियों में पति/पत्नी, पिता, पुत्र, पुत्री, दामाद, बहू, सास, ससुर, साला/जीजा और चचेरे भाई-बहन आदि हैं। ऐसा कोई संबंधी न होने पर भी इस आशय का वचनपत्र देना होगा। सभी बीएसए तत्काल प्रधानाध्यापकों और प्रभारी प्रधानाध्यापकों को आदेश जारी करेंगे।
दस्तावेज मिलते ही शिक्षकों का नाम, नियुक्ति तिथि, शैक्षणिक योग्यता, तत्समय अपेक्षित न्यूनतम योग्यता और गजट के अनुसार प्राप्त मेरिट इत्यादि की एक्सेल शीट तैयार कर दस्तावेजों समेत एसटीएफ की संबंधित रेंज को भेजी जाएगी। एसटीएफ के रेंज प्रमुख सत्यापन की व्यवस्था बनाएंगे और जरूरत पर पुलिस अधीक्षक, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक या पुलिस आयुक्त की मदद ले सकेंगे।
बीएसए की कार्यवाही की शिक्षा निदेशक निगरानी करेंगे। अपर पुलिस महानिदेशक, एसटीएफ सत्यापन और जांच की निगरानी करेंगे। किसी भी अधिकारी की लापरवाही गंभीरता से ली जाएगी और उसे व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह ठहराया जा सकता है। हाई कोर्ट ने मामले को चार नवंबर 2026 को अनुपालन रिपोर्ट और आगे के विचार के लिए सूचीबद्ध किया है। कहा कि संबंधित अधिकारी प्रशासनिक कठिनाई या संसाधनों की कमी को कोर्ट के संज्ञान में अगली सुनवाई से पहले ला सकते हैं।
