आजम खां के 'तनखैया' भाषण मामले में इलाहाबाद HC ने सरकार से मांगा जवाब, 30 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आजम खां के 'तनखैया' भाषण मामले में सरकार से जवाब तलब किया है। इस मामले की ...और पढ़ें

इलाहाबाद उच्च न्यायालय।
HighLights
एमपी-एमएलए कोर्ट ने चार प्रावधानों में ठहराया है दोषी
इलाहाबाद हाई कोर्ट में दी गई है दोषसिद्धि को चुनौती
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ‘तनखैया’ भाषण मामले में पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खां की दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर प्रदेश सरकार सहित अन्य प्रतिवादियों से दो सप्ताह में जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकलपीठ ने यह आदेश दिया है। अगली सुनवाई 30 नवंबर को होगी।
मामला आजम खां के भाषण से जुड़ा है
मामला नौ अप्रैल 2019 को लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान रामपुर जिले के ग्राम मनकरा में दिए गए आजम खां के भाषण से जुड़ा है। आजम खां ने दोनों अधीनस्थ अदालतों के फैसले निरस्त कर सभी आरोपों से बरी करने की मांग की है। अभियोजन के अनुसार उन्होंने तत्कालीन जिलाधिकारी और अन्य सरकारी अधिकारियों को ‘तनखैया’ (वेतनभोगी कर्मचारी) संज्ञा देते हुए लोगों से कलेक्टर से न डरने को कहा था। उन्होंने बसपा प्रमुख मायावती की ऐसी तस्वीरों का उल्लेख भी किया, जिनमें वरिष्ठ अधिकारी उनके जूते साफ करते दिख रहे थे।
आजम खां ने क्या कहा था?
आजम खां ने कहा था कि वह इन अधिकारियों से भी ऐसा ही करवाएंगे। अभियोजन का आरोप था कि टिप्पणियां सरकारी अधिकारियों का अपमान करने और विभिन्न वर्गों के बीच वैमनस्य बढ़ाने वाली थीं। तत्कालीन उपजिलाधिकारी टांडा घनश्याम त्रिपाठी ने 15 अप्रैल 2019 को शिकायत दर्ज कराई थी। पहले थाना सिविल लाइंस रामपुर में मुकदमा दर्ज हुआ फिर इसे थाना भोट स्थानांतरित किया गया। पुलिस ने 17 मई 2019 को आरोपपत्र दाखिल किया।
आजम पर मुकदमा चलाया गया
आजम खां के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 153-ए, 153-बी और 505(2) तथा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 125 के तहत मुकदमा चलाया गया। ये प्रावधान विभिन्न वर्गों के बीच वैमनस्य फैलाने, राष्ट्रीय एकीकरण के प्रतिकूल आरोप या कथन करने और चुनाव के संबंध में वैमनस्य बढ़ाने से जुड़े हैं।
रामपुर की एमपी/एमएलए कोर्ट ने दोषी ठहराया
रामपुर के विशेष न्यायाधीश (एमपी/एमएलए) एवं अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम ने 16 मई 2026 को उन्हें चारों प्रावधानों में दोषी ठहराया। प्रत्येक अपराध के लिए दो वर्ष का साधारण कारावास और 5,000 रुपये जुर्माना सुनाया गया। सभी सजाएं साथ-साथ चलाने का आदेश था। आजम खां की आपराधिक अपील 18 जुलाई 2026 को रामपुर के विशेष न्यायाधीश (एमपी/एमएलए) एवं अपर सत्र न्यायाधीश ने खारिज कर दी और सजा बरकरार रखी।
हाई कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर की
इसके बाद आजम खां ने हाई कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर की। याचिका में कहा गया है कि भाषण को समग्रता और राजनीतिक संदर्भ में देखने पर दोषसिद्धि के लिए जरूरी वैधानिक तत्व स्थापित नहीं होते। भाषण चुनाव प्रचार के दौरान जिला प्रशासन और सरकारी अधिकारियों के कामकाज की राजनीतिक आलोचना तक सीमित था। इसमें किसी धर्म, जाति, समुदाय या भाषा के विरुद्ध टिप्पणी अथवा घृणा या वैमनस्य फैलाने की अपील नहीं थी।
याचिका में उठाए गए सवाल
याचिका में इलेक्ट्रानिक साक्ष्य की विश्वसनीयता और ग्राह्यता पर भी सवाल उठाए गए हैं। घनश्याम त्रिपाठी ने जिरह में कहा था कि उन्होंने भाषण स्वयं नहीं सुना और उन्हें वीडियो के मूल अपलोडर, स्रोत या संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफार्म की जानकारी नहीं थी। भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-बी के प्रमाणपत्र पर भी आपत्ति है। याचिका के मुताबिक प्रमाणपत्र थाना सिविल लाइंस के मुकदमे से जुड़ा था, जबकि दोषसिद्धि थाना भोट में दर्ज मुकदमे में हुई।
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