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इलाहाबाद HC का बड़ा फैसला: यूपी टीईटी-2026 के दो सवालों को मूल्यांकन से किया बाहर, 148 प्रश्नों के आधार पर तय होगी पात्रता

By Suresh pandey Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Fri, 30 Oct 2026 06:45 PM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी टीईटी-2026 के प्रश्न 36 और 37 को मूल्यांकन से बाहर करने का आदेश दिया है। ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट।

इलाहाबाद हाई कोर्ट।

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने यूपी टीईटी-2026 के इन दो प्रश्नों को मूल्यांकन से बाहर करने का आदेश दिया

  2. एकलपीठ ने कानपुर नगर के विजय सोनकर और तीन अन्य की याचिका पर फैसला सुनाया

विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी टीईटी-2026 के प्रश्न 36 और 37 को मूल्यांकन से बाहर करने का आदेश दिया है। अंतिम उत्तर कुंजी में इन दोनों प्रश्नों के दो-दो विकल्प सही माने गए थे। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकलपीठ ने कानपुर नगर के विजय सोनकर और तीन अन्य की याचिका पर यह फैसला सुनाया है।

... इसलिए याचियों को अंक नहीं मिले थे

चारों याची तीन जुलाई 2026 को दूसरी पाली में परीक्षा में बैठे थे। 26 अगस्त 2026 को घोषित परिणाम में उनके अंक अर्हता अंक 82 से कम थे। उनके नार्मलाइज्ड अंक क्रमशः 81.39, 81.32, 80.40 और 80.94 थे। प्रोविजनल आंसर की में प्रश्न 36 और 37 का सही उत्तर केवल विकल्प (डी) बताया गया था। अंतिम कुंजी में प्रश्न 36 के लिए (बी) और (डी), जबकि प्रश्न 37 के लिए (ए) और (डी) को सही माना गया। आयोग ने इन्हीं विकल्पों में से कोई एक चुनने वाले अभ्यर्थियों को अंक दिए। याचियों ने इनमें से कोई विकल्प नहीं चुना था, इसलिए उन्हें अंक नहीं मिले।

अर्हता मानक निर्धारित प्रतिशत के आधार पर तय होगा

कोर्ट ने कहा कि प्रश्नपत्र 150 के बजाय 148 प्रश्नों का माना जाएगा और अर्हता मानक निर्धारित प्रतिशत के आधार पर तय होगा। आदेश का लाभ सभी समान स्थिति वाले अभ्यर्थियों को मिलेगा, न कि केवल उन लोगों को जिन्होंने सही माने गए विकल्पों में से कोई एक चुना था। प्रतिवादी याचियों के अंकों की पुनर्गणना कर परिणाम और स्कोरकार्ड में जरूरी सुधार करेंगे।

कोर्ट ने कहा...

कोर्ट के अनुसार, जब परीक्षा आयोजक एक प्रश्न के दो विकल्पों को सही मानता है, तो वह प्रश्न जानकार और अनजान अभ्यर्थियों के बीच अंतर करने का आधार नहीं रह जाता। केवल संयोग से सही विकल्प चुनने वालों को अंक देने का आयोग का तरीका टिकाऊ नहीं है।

आयोग ने प्रश्न 38 को भी हटाया था

इसी परीक्षा में आयोग ने प्रश्न 38 को भी हटाया था, इसलिए प्रश्न 36 और 37 के साथ अलग व्यवहार का तर्कसंगत आधार नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस राहत से याचियों को किसी भावी भर्ती में नियुक्ति या चयन का स्वतः अधिकार नहीं मिलेगा। उनका अधिकार यूपी टीईटी-2026 के परिणाम में सुधार और उससे जुड़ी पात्रता तक सीमित रहेगा। याचियों की ओर से अंकिता सिंह और तनिया पांडेय तथा प्रतिवादियों की ओर से स्थायी अधिवक्ता शिव कुमार सिंह और उदयन नंदन उपस्थित थे।

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