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सिपाही और होमगार्ड भर्ती के अभ्यर्थियों को इलाहाबाद HC से राहत, PST में बाहर किए जाने वालों की दोबारा होगी नाप

By Suresh pandey Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Sat, 17 Oct 2026 07:53 PM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सिपाही और होमगार्ड भर्ती के उन अभ्यर्थियों को राहत दी है, जिन्हें शारीरिक मानक परीक्षा (PST) ...और पढ़ें

इलाहााबद उच्च न्यायालय की फाइल फोटो।

इलाहााबद उच्च न्यायालय की फाइल फोटो।

HighLights

  1. केजीएमयू प्राचार्य को मेडिकल बोर्ड बनाने का दिया निर्देश

  2. हाई कोर्ट में अब चार नवंबर को इस मामले की होगी सुनवाई

विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उप्र सिपाही सिविल पुलिस भर्ती 2025 और होमगार्ड भर्ती 2025 की शारीरिक मानक परीक्षा (पीएसटी) में ऊंचाई या सीना कम बताकर बाहर किए गए अभ्यर्थियों को राहत दी है। न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की एकलपीठ ने अनुज कुमार सहित 60 से अधिक याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू), लखनऊ के प्राचार्य को मेडिकल बोर्ड गठित कर अभ्यर्थियों की दोबारा नाप कराने का निर्देश दिया है। 

नाप 31 अक्टूबर 2026 को होगी। बोर्ड को अपनी सीलबंद रिपोर्ट चार नवंबर 2026 को अदालत में पेश करनी होगी। इसी दिन मामले की अगली सुनवाई भी होगी। अदालत ने याचिकाओं को तथ्यों के आधार पर पांच समूहों में बांटा। पहले समूह में वे अभ्यर्थी हैं, जो पिछली भर्तियों में निर्धारित ऊंचाई पर सफल रहे, लेकिन इस भर्ती में कम ऊंचाई बताकर बाहर कर दिए गए।

दूसरे समूह में पिछली भर्ती में सीने के मानक पर पास अभ्यर्थी हैं, जिन्हें इस बार अयोग्य बताया गया। तीसरे समूह के अभ्यर्थियों की ऊंचाई पीएसटी के पहले और अपील चरण में अलग-अलग दर्ज हुई। चौथे समूह के अभ्यर्थी अपील के अधिकार की जानकारी न होने और केवल 24 घंटे की अपील अवधि के कारण अपील नहीं कर सके। पांचवें समूह में दोनों बार समान ऊंचाई दर्ज होने के बावजूद निजी अस्पतालों या डाक्टरों के प्रमाणपत्र के आधार पर दावा करने वाले अभ्यर्थी शामिल हैं।

कोर्ट ने कहा कि सामान्यतः एक-दो साल में किसी व्यक्ति की ऊंचाई या सीने में बदलाव नहीं होता, इसलिए पहले दो समूहों में नाप में खामी की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता। तीसरे समूह में राज्य सरकार दो नापों के बीच अंतर होने की बात नकार नहीं सकी। चौथे समूह के संबंध में अदालत ने माना कि युवा अभ्यर्थी प्रक्रिया की जानकारी के अभाव में अपील नहीं कर पाए।

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के सौरभ यादव केस का भी उल्लेख किया, जिसमें मेडिकल बोर्ड से नाप कराई गई थी। राज्य सरकार ने दलील दी थी कि अपील के बाद की नाप अंतिम है और पिछली भर्तियों की ऊंचाई इस चयन में मान्य नहीं होगी। इसके बावजूद अदालत ने स्वतंत्र बोर्ड से नाप कराने का आदेश दिया।

सभी याचिकाकर्ताओं को 31 अक्टूबर को सुबह 10 बजे तक केजीएमयू में उपस्थित होना होगा। अनुपस्थित रहने पर दोबारा अवसर नहीं मिलेगा। भर्ती बोर्ड और होमगार्ड विभाग के अधिकारी अभिलेखों के साथ मौजूद रहेंगे, लेकिन बोर्ड को पिछली नाप की जानकारी नहीं देंगे। पांचवें समूह की याचिकाएं खारिज कर दी गईं।

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