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सेवानिवृत्ति के बाद गलत वेतन निर्धारण का हवाला देकर वसूली कानूनन अनुचित, इलाहाबाद HC का महत्वपूर्ण आदेश

By Suresh pandey Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Mon, 12 Oct 2026 08:16 PM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सेवानिवृत्ति के बाद गलत वेतन निर्धारण के आधार पर कर्मचारियों से वसूली ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट।

इलाहाबाद हाई कोर्ट।

HighLights

  1. सेवानिवृत्ति कांस्टेबल के बाद वेतन से कटौती को बताया अवैध

  2. 6.74 लाख रुपये आठ प्रतिशत ब्याज सहित लौटाने का आदेश

विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सेवानिवृत्ति के बाद गलत वेतन निर्धारण का हवाला देकर वेतन घटाना या पेंशन और ग्रेच्युटी से वसूली करना कानूनन उचित नहीं है। कोर्ट ने पीएसी के सेवानिवृत्त हेड कांस्टेबल सूरज सिंह की याचिका स्वीकार करते हुए उनसे की गई 6,74,404 रुपये की कटौती रद कर दी है। यह रकम आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ आठ सप्ताह में लौटाने का आदेश दिया गया है।

न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की एकलपीठ ने यह आदेश दिया है। याची नागरिक पुलिस में कांस्टेबल नियुक्त हुए थे और बाद में हेड कांस्टेबल बने। वह 31 जुलाई 2021 को नौवीं वाहिनी पीएसी मुरादाबाद से सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति के समय विभाग ने देयों के भुगतान के लिए उनसे वचनपत्र भरवाया था।

पुलिस मुख्यालय के वित्त नियंत्रक के 27 जुलाई 2022 के पत्र के आधार पर कमांडेंट ने कहा कि 2016 से उनका वेतन गलत तय हुआ था। इसके बाद 24 फरवरी 2010 से वेतन का पुनर्निर्धारण किया गया। 24 फरवरी 2023 के आदेश में 6,74,404 रुपये को अधिक भुगतान बताते हुए कुल देय 9,36,083 रुपये में से काट लिया गया। सूरज सिंह को केवल 2,61,679 रुपये दिए गए।

कोर्ट ने कहा कि ग्रुप ‘सी’ और ‘डी’ के कर्मचारियों से सेवानिवृत्ति के बाद गलत वेतन निर्धारण के आधार पर वसूली नहीं की जा सकती। 16 जनवरी 2007 और सात मई 2007 के शासनादेशों के अनुसार, सेवानिवृत्ति से 34 महीने से पुराने मामलों में ऐसा संशोधन नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी पाया कि सूरज सिंह को कारण बताओ नोटिस दिए बिना और सुनवाई का अवसर प्रदान किए बगैर कटौती की गई, जो नियम विरुद्ध है।

कोर्ट ने वेतन पुनर्निर्धारण और कटौती से जुड़े सभी विवादित आदेश रद कर दिए। निर्देश दिया कि पेंशन राशिकरण से काटी गई पूरी रकम आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत होने के आठ सप्ताह के भीतर ब्याज सहित लौटाई जाए। पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों की गणना अंतिम आहरित वेतन के आधार पर करने को भी कहा गया है।

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