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जॉब कार्ड में मां की उम्र 62 व 60 वर्ष का बेटा..., इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा- नियमानुसार करें शिकायत

By Sharad Dwivedi Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Sat, 07 Nov 2026 05:51 PM (GMT+05:30)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रयागराज के हरिभानपुर गांव में सूखा रोधी कार्य और जॉब कार्ड में कथित अनियमितताओं से जुड़ी ...और पढ़ें

इलाहाबाद उच्च न्यायालय।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय।

HighLights

  1. कोर्ट ने सूखा रोधी कार्य में गड़बड़ी की जनहित याचिका निस्तारित की

  2. प्रयागराज जनपद की करछना तहसील के ग्राम हरिभानपुर का मामला

विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रयागराज की करछना तहसील के ग्राम हरिभानपुर में वित्तीय वर्ष 2023-24 के सूखा रोधी कार्य में कथित गबन को लेकर दाखिल जनहित याचिका को निस्तारित कर दी। मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की पीठ ने याची को उत्तर प्रदेश रोजगार गारंटी शिकायत निवारण तंत्र नियम, 2009 के तहत अपनी शिकायत उठाने को कहा।

याची के वकील की दलील- जॉब कार्ड में गंभीर खामियां

याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि करछना तहसील के अकोढ़ा में भी वास्तव में कोई काम नहीं हुआ और जॉब कार्ड में गंभीर खामियां हैं। उदाहरण के तौर पर मां की उम्र 62 व बेटे की आयु 60 वर्ष दर्ज है।

याचिका में क्या आरोप लगाया गया था?

रामजी सिंह की इस याचिका में आरोप था कि काम हरिभानपुर के बजाय ग्राम पंचायत अकोढ़ा में कराया गया। सरकारी पक्ष ने बताया कि हरिभानपुर के निवासियों की जमीन अकोढ़ा में है। इसलिए मजदूर हरिभानपुर से लगाए गए लेकिन परिसंपत्ति अकोढ़ा में बनी। कोर्ट ने स्थायी अधिवक्ता से पूछा था कि क्या किसी नियम के तहत एक ग्राम पंचायत दूसरी पंचायत में परिसंपत्ति बना सकती है।

जवाब में यह बताया गया

जवाब में बताया गया कि तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है, जबकि तकनीकी सहायक को कड़ी चेतावनी मिली है। दूसरे गांव में खर्च की गई रकम तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम प्रधान और तकनीकी सहायक से बराबर हिस्सों में वसूलने का आदेश भी हो चुका है। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि अकोढ़ा में भी वास्तव में कोई काम नहीं हुआ। जॉब कार्ड में गंभीर खामियां हैं।

पीठ ने याचिका जारी रखने का औचित्य नहीं पाया

कोर्ट ने कहा कि मान भी लें कि काम अकोढ़ा में हुआ तो अधिकारियों पर कार्रवाई और वसूली का आदेश हो चुका है। काम न होने और मस्टर रोल/जाब कार्ड की गड़बड़ियों की शिकायत याची 2009 के नियमों के तहत कर सकता है, जिसमें इसके निस्तारण की व्यवस्था है। इसी आधार पर पीठ ने याचिका जारी रखने का औचित्य नहीं पाया।

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