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इलाहाबाद हाई कोर्ट में ध्वनि प्रदूषण मामले में याचिका वापस लेने के आधार पर खारिज, याची को कोर्ट ने दी स्वतंत्रता

By Suresh pandey Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Tue, 06 Oct 2026 07:22 PM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ध्वनि प्रदूषण मामले में अंजू शर्मा की याचिका वापस लेने के आधार पर खारिज कर दी ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट।

इलाहाबाद हाई कोर्ट।

HighLights

  1. याची के अधिवक्ता की मांग पर उचित मंच पर कानून के अनुसार चुनौती देने की स्वीकृति मिली

  2. मोदीनगर (गाजियाबाद) की अंजू शर्मा ने हाई कोर्ट में दायर आपराधिक याचिका को वापस लिया

विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ध्वनि प्रदूषण से जुड़े मामले में मोदीनगर (गाजियाबाद) निवासी अंजू शर्मा की आपराधिक याचिका को वापस लिए जाने के आधार पर खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकलपीठ ने यह आदेश दिया है। कोर्ट ने याची को उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 18 मार्च 2026 के आदेश को उचित मंच पर कानून के अनुसार चुनौती देने की स्वतंत्रता भी दी है।

नगर पालिका परिषद मोदीनगर की ओर से अदालत को बताया गया कि याची आवासीय इलाके में हैंडलूम यूनिट चला रही थीं, जिससे ध्वनि प्रदूषण हो रहा था। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के गाजियाबाद क्षेत्रीय कार्यालय की जांच में यूनिट से निकलने वाली आवाज आवासीय क्षेत्र के लिए निर्धारित 55 डेसिबल की सीमा से अधिक पाई गई।

इसके बाद बोर्ड ने मार्च 2026 के आदेश से नगर पालिका को यूनिट बंद कराने और उसे अन्यत्र स्थानांतरित कराने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया था। नगर पालिका के अधिवक्ता ने बताया कि बोर्ड के आदेश के अनुपालन में याची 22 अप्रैल 2026 से हैंडलूम यूनिट का संचालन बंद कर चुकी हैं।

याची के अधिवक्ता श्याम सूरत शुक्ला ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी और 18 मार्च 2026 के आदेश को चुनौती देने की छूट का अनुरोध किया। नगर पालिका के अधिवक्ता मनु सक्सेना ने इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई। कोर्ट ने याचिका वापस लिए जाने के आधार पर खारिज करते हुए याची को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेश को उपयुक्त फोरम के समक्ष कानून के मुताबिक चुनौती देने की स्वतंत्रता प्रदान की।

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