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    कच्चा माल नहीं मिलने से खादी की तीन इकाइयां बंद

    By JagranEdited By:
    Updated: Fri, 11 Feb 2022 11:50 PM (IST)

    पीलीभीतजेएनएन खादी कारोबार को उम्मीद के मुताबिक पंख नहीं लग सके। शासन ने खादी कारोबार को बढ़ावा देने के दावे तो बहुत किए तमाम संसाधन क्षेत्रीय गांधी आश्रम को मुहैया कराए गए। जमीनी स्तर पर काम नहीं हो सका। आंकड़ेबाजी में ही खादी कारोबार को बढ़ाया जाता रहा। आलम यह है कि दो साल से बरखेड़ा क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम को कच्चा माल ही नहीं मिला है जिससे क्षेत्र में आने वाली तीनों उत्पादन इकाइया बंद हो गई है। नई मशीनरी भेजी गई मगर वह भी चालू नहीं कराई जा सकीं। ऐसे में क्षेत्रीय कार्यालय बरखेड़ा की तीनों इकाइयां बदहाल हैं इसमें काम करने वाले बुनकरों भी खाली हो गए है।

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    कच्चा माल नहीं मिलने से खादी की तीन इकाइयां बंद

    पीलीभीत,जेएनएन: खादी कारोबार को उम्मीद के मुताबिक पंख नहीं लग सके। शासन ने खादी कारोबार को बढ़ावा देने के दावे तो बहुत किए , तमाम संसाधन क्षेत्रीय गांधी आश्रम को मुहैया कराए गए। जमीनी स्तर पर काम नहीं हो सका। आंकड़ेबाजी में ही खादी कारोबार को बढ़ाया जाता रहा। आलम यह है कि दो साल से बरखेड़ा क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम को कच्चा माल ही नहीं मिला है, जिससे क्षेत्र में आने वाली तीनों उत्पादन इकाइया बंद हो गई है। नई मशीनरी भेजी गई, मगर वह भी चालू नहीं कराई जा सकीं। ऐसे में क्षेत्रीय कार्यालय बरखेड़ा की तीनों इकाइयां बदहाल हैं, इसमें काम करने वाले बुनकरों भी खाली हो गए है। खादी भंडार के कर्मचारियों को साल में छह माह वेतन समय से मिलता है। छह महीने वह मुफलिसी में बिताते है।

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    खादी कोई वस्त्र नहीं एक संस्कृति व विचार है। हर भारतीय संस्कृति की पहचान है। खादी के कपड़े आरामदायक तो होते ही हैं, इसके अलावा खादी में समय के साथ बदलाव भी आया है। यदि इस उद्योग पर सरकार ध्यान दे तो अन्य कपड़ा उद्योगों को मात दे सकता है। देश के प्रधानमंत्री से लेकर प्रदेश के मुखिया तक खादी को बढ़ावा देने के दावे करते हैं पर जमीनी स्तर पर खादी के उत्थान के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए है। कोरोना काल में खादी की उत्पादन के साथ साथ बिक्री पर भी असर पड़ा है। 1992 में बरेली से अलग होकर बरखेड़ा में खादी का क्षेत्रीय कार्यालय बनाया गया है। उत्पादन की तीन इकाइयां काम कर रही हैं, जहां सूत कताई से लेकर बुनाई तक का काम होता है। कच्चा माल न मिलने से तीनों इकाइयां बंद है।

    दो साल से नहीं मिला कच्चा माल

    बरखेड़ा क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम में तीन उत्पादन इकाइयां है। बीसलपुर, बरखेड़ा और शाहजहांपुर के गांव कसरक में सूत की कताई से लेकर बुनाई का काम होता है। पिछले दो साल से इन इकाइयों को कच्चे माल की विपणन विकास सहायता दावा (एमएमएडीए) ने सप्लाई नहीं दी है, जिस वजह से यह इकाईयां बंद हो गई है। यहां के कारीगर रजाई का लिहाफ, चादर, गमछा, लुंगी, तौलिया, शर्ट का कपड़ा तैयार करते हैं। यहां के कारीगरों की ओर से तैयार माल शाहजहांपुर और पीलीभीत में खादी आश्रमों पर बिक्री किया जाता है। क्षेत्रीय कार्यालय से विपणन विकास सहायता दावा किया जाता है, स्वीकृति मिलने पर खादी और ग्रामोद्योग आयोग रायबरेली से कच्चा (सूती पूनी और पोली पूनी) माल मिलता है। नौ माह में एक करोड़ की बिक्री

    कोरोना का असर खादी की बिक्री पर भी दिखाई पड़ रहा है। विधानसभा चुनाव के बाद इस कारोबार को पंख लगने की उम्मीद की जा रही है। पिछले नौ माह में शाहजहांपुर और पीलीभीत के खादी के आश्रमों पर एक करोड़ सात लाख की बिक्री हुई है। जिसमें शाहजहांपुर के सेंटरों पर 45 लाख का खादी का कपड़े की बिक्री हुई है। खादी के गर्म कपड़ों के साथ साथ रजाई की बहुत मांग है। धूल फांक रहे चरखे

    महात्मा गांधी सूत कातकर अपने लिए धोती तैयार कराते थे। उन्होंने खादी के लिए विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार किया था। समय के साथ खादी उद्योग पर सरकारों ने ध्यान नहीं दिया जिस वजह से खादी उद्योग बंदी की कगार पर है। बरखेड़ा में सैकड़ों की संख्या में आधुनिक चरखा है पर वह कच्चा माल न मिलने से धूल फांस करे है। कई उपकरण तो सालों से मरम्मत का इंतजार कर रहे हैं। दो अक्टूबर को नेताओं को आती है याद

    प्रधानमंत्री से लेकर जिला स्तर पर अधिकारियों और नेताओं को दो अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती पर खादी के उत्थान की याद आती है। इस दिन खादी को बढ़ावा देने से लेकर जन-जन तक पहुंचाने की बातें होती है पर अगले दिन से ही सभी यह भूल जाते है कि कल उन्होंने खादी के लिए क्या भाषण दिए थे। खादी कारोबार को तभी पंख लग सकते है जब जन-जन तक इसकी पहुंच हो। महंगाई की वजह से नहीं हो रही खादी की बिक्री

    खादी का कपड़ा हाथ से तैयार किया जाता है, जिस वजह से इसकी लागत अधिक आती है। यह महंगा होता है। बाजार में मिलने वाले अन्य कपड़ों के मुकाबले खादी के कपड़े दाम दोगुने हैं। जिस वजह से आम आदमी खादी के कपड़ों की खरीदारी नहीं करता है जो लोग खादी खरीदने में सक्षम है और सूती कपड़ा पहनते हैं वह भी खादी आश्रमों से कपड़ा नहीं लेते हैं। कोरोना की वजह से खादी उद्योग पर असर पड़ा है। उत्पादन से लेकर बिक्री प्रभावित हुआ है। पिछले दो साल से शासन से कच्चा माल नहीं मिल है जिस वजह से उत्पादन इकाइयां बद हो गई है। पत्राचार किया गया है कच्चा माल जल्द मिलने की उम्मीद है।

    सदानंद तिवारी, मंत्री क्षेत्रीय श्रीखादी गांधी आश्रम बरखेड़ा