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    भयमुक्त वातावरण से बेहतर सीख सकेंगे बच्चे

    By JagranEdited By:
    Updated: Sun, 03 Sep 2017 06:32 PM (IST)

    जागरण संवाददाता, पीलीभीत : शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद स्कूलों में पठन-पाठन म

    भयमुक्त वातावरण से बेहतर सीख सकेंगे बच्चे

    जागरण संवाददाता, पीलीभीत :

    शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद स्कूलों में पठन-पाठन में पूरी तरह से बदलाव आया है। स्कूलों को मानकों के तहत संचालित किया जा रहा है। अमानक स्कूलों पर शिकंजा कसा जा रहा है, लेकिन स्कूल धड़ल्ले से चलाए जा रहे हैं। इन स्कूलों में अप्रशिक्षित शिक्षक-शिक्षिकाएं शिक्षण कार्य कर रहे हैं, जिससे बच्चों को गुणवत्तापरक शिक्षा नहीं मिल पा रही है। उन्हें संस्कार भी नहीं मिल रहे हैं। स्कूलों में बच्चों को भयमुक्त वातावरण देने के प्रयास किए जाए, तो बच्चा कुछ सीख सकेगा। बच्चों में किसी प्रकार का कोई भय नही रहेगा। वह स्वच्छंद माहौल में पढ़ाई कर सकेगा। समाज में पश्चिमी सभ्यता के प्रभाव की वजह से बच्चों पर विपरीत असर पड़ रहा है, जो किसी भी दशा में उचित नहीं है। स्कूल में प्रवेश लेने के बाद बच्चे पढ़ाई से दूर रहते हैं, जो आगे चलकर पढ़ाई से अलग हो जाते हैं। ऐसे बच्चों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। वर्तमान परिवेश में छात्र-छात्राओं को भयमुक्त वातावरण मिलने की जरूरत है, तभी उनका सर्वांगीण विकास हो सकेगा। अभिभावकों को भी बच्चों के प्रति जिम्मेदारी निभानी पड़ेगी, तभी वह कुछ हासिल कर सकेंगे। राजकीय बालिका इंटर कालेज की प्रवक्ता शिखा जोशी कहती है कि सरकार ने जो जिम्मेदारी दी है। उसके अनुरूप काम करती हूं। पढ़ाई के साथ छात्राओं को अतिरिक्त गतिविधियों का लाभ देती हूं। अगर कोई छात्रा किसी विषय में कमजोर है, तो उस विषय को कंठस्थ कराती हूं। मेरा कमजोर छात्राओं पर विशेष जोर रहता है। ऐसी छात्राओं को रेमिडयल क्लास लगाकर पढ़ाई कराई जाती है। छात्राओं के प्रति शिक्षिकाओं का व्यवहार बेहतर होना चाहिए, तभी गुरु-शिष्य की परंपरा को बरकरार रखा जा सकेगा।

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    हमें नाज है

    मैंने परिषदीय स्कूल में छह नवंबर 2015 को कार्यभार संभाला था, तब से बच्चों को बेहतर शिक्षा देने की दिशा में काम कर रही हूं। छात्र-छात्राओं को भयमुक्त वातावरण देने का प्रयास करती हूं। इस प्रयास से बच्चों को ज्यादा समझ में आता है। बच्चों को सिखाने के लिए गतिविधि आधारित तकनीकियों का प्रयोग किया जाता है, जिससे बच्चे स्वयं करके सीखते हैं। बच्चों को कहानी तथा कविताओं के माध्यम से हावभाव से सिखाने का पूर्ण प्रयास किया जाता है। इसके माध्यम से कक्षा में उपस्थित मानसिक दिव्यांग छात्र-छात्राएं भी आसानी से सीखते हैं। मानसिक दिव्यांग और कमजोर छात्रों को कक्षा में विशेष रूप से प्रोत्साहित कर आगे बढ़ने का अवसर दिया जाता है। छात्र भयमुक्त वातावरण में सरलतापूर्वक सीखते हैं तथा स्वयं को अभिव्यक्त कर पाते हैं। बच्चों को मोबाइल के उपस्थिति एप और टी¨चग एप के चित्र के माध्यम से सिखाया जाता है। कुछ विशेष आवश्यकता वाले छात्र इससे आसानी से अक्षर और चित्र देखकर बनाते और सीखते हैं। मोबाइल के माध्यम से पढ़ने में बच्चे रुचि लेते हैं। कक्षा में कमजोर बच्चों पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाता है। उपचारात्मक शिक्षण से बच्चों का स्तर मजबूत किया जाता है। बच्चों को गुणवत्तापरक शिक्षा देकर अच्छा नागरिक बनाने की कोशिश की जाती है।

    -नित्या लोधी, सहायक अध्यापक

    प्राथमिक विद्यालय नंबर दो, न्यूरिया हुसैनपुर (पीलीभीत)।