Updated: Thu, 06 Feb 2025 03:21 PM (IST)
पीलीभीत में मिलावटी दूध बेचने पर डेयरी संचालक शरीफ अहमद पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने निरीक्षण में डेयरी से दूध का नमूना लिया जिसमें ठोस वसा की मात्रा कम पाई गई। परीक्षण में फेल होने पर न्यायालय ने जुर्माना एक माह में जमा करने का आदेश दिया अन्यथा तहसीलदार से वसूली कराई जाएगी।
जागरण संवाददाता, पीलीभीत। मिलावट के संदेह में एक डेयरी से लिया गया मिश्रित दूध का नमूना परीक्षण में फेल हो गया। इस मामले में सुनवाई के उपरांत न्यायालय ने डेयरी संचालक पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माना की धनराशि एक माह के भीतर राजकोष में जमा कराने का न्यायालय ने आदेश दिया।
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खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने अपर जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय में दाखिल अपनी आख्या में कहा कि 28 मार्च 2023 को दोपहर के समय पूरनपुर के मुहल्ला गणेशगंज पूर्वी में स्थित शरीफ अहमद की दुग्ध डेयरी का निरीक्षण किया गया।
इस डेयरी के बारे में स्थानीय निवासी डा. शरीफ अहमद साबरी ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की थी। उसी के संदर्भ में निरीक्षण किया गया। मौके पर डेयरी के संचालक शरीफ अहमद मिले। निरीक्षण के दौरान प्रतिष्ठान पर अन्य दुग्ध पदार्थों के साथ एक स्टील की टंकी में लगभग 15 लीटर मिश्रित दूध विक्रय के लिए भंडारित पाया गया।
दूध में ठोस वसा की मात्रा न्यूनतम से कम निकली
अवमानक के संदेह के आधार पर उसमें से दो लीटर मिश्रित दूध लेकर नमूना भरा गया। इसके बाद नमूना को परीक्षण के लिए लखनऊ स्थित खाद्य विश्लेषक के पास भेजा गया। खाद्य विश्लेषक ने अपनी रिपोर्ट मेंं कहा कि नमूना मानकों के अनरूप नहीं है। क्योंकि दूध में ठोस वसा की मात्रा न्यूनतम से कम है।
इसके बाद न्यायालय की ओर से डेयरी संचालक को नोटिस जारी किया गया। डेयरी संचालक की ओर से न्यायालय में दाखिल की गई आपत्ति में कहा गया कि वह एक छोटी सी दुकान में सिर्फ चाय बेचता है। उसकी दुकान पर शिकायतकर्ता डा. अब्दुल शोएब साबरी भी आकर चाय पीते थे। चाय की उधारी के रुपये उनसे मांगे थे।
उन्होंने उधारी के रुपये नहीं दिए बल्कि शिकायत करके फर्जी आरोप लगाया। वह दूध का कारोबार नहीं करता है। न्यायालय ने सुनवाई के उपरांत विक्रेता पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। साथ ही आदेश दिया कि यदि जुर्माना की धनराशि एक माह के भीतर राजकोष में जमा नहीं कराए जाने पर पूरनपुर के तहसीलदार से भू राजस्व की भांति इसकी वसूली कराई जाए।
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